हैदराबाद : रहमतों और बरकतों का महीना रमजान शुरू होने वाला है। लेकिन इसकी तारिख को लेकर अभी असमंजस बना हुआ है, जो चांद को देखकर साफ हो जाएगा। वैसे रमजान का महीना इस्लामी महीने शाबान की 29 तारीख यानी 5 मई से शुरू हो सकता है। चांद दिखने पर ही रमजान के शुरू होने की सही तारीख तय होगी। अगर रविवार को रमजान का चांद नजर नहीं आता तो सोमवार से तरावीह की नमाज शुरू हो जाएगी।

इस महीने में रोजा, नमाज, जकात और कुरान की तिलावत करना फर्ज है। मुस्लिम समाज के लोग पूरे महीने रोजा रखकर बुरी आदतों को छोड़ते हैं और अच्‍छाई के रास्‍ते पर चलते हैं।

इस्‍लामिक कैलेंडर के मुताबिक रमजान नौवां महीना है। इस्‍लामिक विद्वानों के मुताबिक इस महीने में खुदा अपने बंदों पर रहमत की बारिश करता है। रमजान में अन्‍य दिनों की अपेक्षा 70 गुना ज्‍यादा सबाब मिलता है। रमजान के दौरान जन्‍नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं।

शरीयत की किताबों में आया है यदि कोई व्यक्ति रमजान में बुरे कार्य करता है तो उसके बुरे कामों का बदला 70 गुना अधिक मिलेगा और इसी तरह अच्छे काम करेगा तो उसको 70 गुना अधिक सवाब मिलेगा। रमज़ान में मुसलमान को अपने पूरे साल की माल व दोलत की ज़कात निकलने के साथ साथ गरीबों को खैरात भी करनी चाहिए।

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इस्‍लामिक विद्वानों के मुताबिक, अल्लाह ने मुसलमानों पर रोजे इसलिए फर्ज फरमाए हैं जिससे अपने अंदर तकवा परहेजगारी पैदा कर सके। यदि कोई व्यक्ति भूखा प्यासा रहता है और बुरे काम नहीं छोड़ता तो उसका रोजा सिर्फ फांके के सिवा कुछ नहीं है। अल्लाह को ऐसे लोगों के रोजे पसंद नहीं जो बुरे काम न छोड़े।

साथ ही बच्चों, बुजुर्गों, मुसाफिरों, गर्भवती महिलाओं और बीमारी की हालत में रोजे से छूट है। जो लोग रोजा नहीं रखते उन्हें रोजेदार के सामने खाने से मनाही है।