अनोखी पहल : युवक ने दिव्यांग युवती से की शादी

कॉन्सेप्ट फोटो - Sakshi Samachar

भिंड : ग्वालियर-चंबल इलाके की पहचान यूं तो अपराध और दस्यु समस्या के कारण आपराधिक क्षेत्र के तौर पर रही है, मगर यहां नरम दिल और पीड़ितों के मददगार लोगों की संख्या भी कम नहीं है। भिंड जिले के लेागों ने सामूहिक प्रयास कर बचपन से दिव्यांग (आंखों से अंधी) बालिका की नौजवान से धूमधाम से शादी कर समाज के सामने एक अनुकरणीय नजीर पेश की है, वहीं एक युवक ने दिव्यांग को अपनाकर बेसहारा का सहारा बनने का संदेश दिया है।

भिंड जिले के मुकुट सिंह का पुरा (बबेड़ी) में रहने वाले रामशरण सिंह चौहान के परिवार में चार बेटियां जन्म से अंधी हैं। उनके लिए जवान हो रही बड़ी बेटी चांदनी की जिंदगी की चिंता सताए जा रही थी, मगर आसपास पास के लोगों और कुछ समाजसेवियों ने चांदनी की जिंदगी सुखमय बनाने का संकल्प लिया।

समाजसेवी राजेश शर्मा का कहना है कि रामशरण के परिवार की मदद हर कोई करना चाहता था, यही कारण है कि इस परिवार में जन्मांध लोगों की मदद के लिए सभी तरफ से मदद मिली। अब उसकी बड़ी बेटी चांदनी की शादी अजनौधा में रहने वाले रतन सिंह धाकरे के बेटे धर्मेद्र के साथ हुई। पूरी तरह स्वस्थ धर्मेद्र ने चांदनी को अपनाकर समाज को संदेश दिया है कि कोई किसी कमी के चलते कमजोर नहीं होता, उसे सहारा देकर खड़ा किया जा सकता है।

चांदनी और धर्मेद्र बिहारी बाल मंदिर परिसर में आयोजित समारोह में भव्य समारोह में परिणय सूत्र में बंधे। इस मौके पर भिंड के तमाम राजनीतिक नेताओं के साथ प्रशासनिक अधिकारी व समाजसेवी उपस्थित रहे।

सामाजिक कार्यकर्ता मनीष राजपूत ने बताया है कि इस तरह का विवाह समारोह कम ही देखने को मिलता है, जब किसी की अंधियारी जिंदगी दाम्पत्य जीवन में प्रवेश कर उजियारी हो रही हो। एक नेत्रहीन युवती को अपनाना किसी धार्मिक पुनीत कार्य से कम नहीं है।

राजपूत के अनुसार, एक नेत्रहीन युवती की शादी की सूचना सांसद और पूर्व मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया तक पहुंची तो उन्होंने ने भी चांदनी को शुभकामना संदेश भेजकर उसके सुखमय जीवन की कामना की।

सिंधिया ने चांदनी के पिता रामशरण सिंह को पत्र लिखकर शुभकामनाएं दी और नवदंपति के जीवन में खुशहाली आए कामना की। चांदनी को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमृत लाल मीणा ने गोद लिया था। विवाह समारोह में विधायक ओ.पी.एस. भदौरिया,अरविंद सिंह भदौरिया, संजीव सिंह कुशवाहा, सांसद भागीरथ प्रसाद भी मौजूद रहे।

संदीप पौराणिक

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