Teej Special : यह है हमारे देश में तीज के त्यौहार की महत्ता, ऐसे मनाई जाती है तीज

कांसेप्ट फोटो - Sakshi Samachar

कहते हैं कि तीज के त्यौहार का सदैव बड़े चाव से महिलाएं इंतजार करती हैं। यह त्यौहार बारिश के मौसम में तब मनाया जाता है जब बारिश होने से वातावरण सुहाना हो जाता है और चारों तरफ हरियाली फैल जाती है। हर ओर हरियाली को देखकर मन में उल्लास और उमंग के बाव जगने लगते हैं। ऐसे माहौल में ही तीज का त्यौहार को मनाया जाता है।

वैसे तो इस तीज के त्यौहार को उत्तर भारत और पश्चिमी भारत के राज्यों में जोरशोर से मनाया जाता है, लेकिन धीरे-धीरे यह अन्य राज्यों में भी मनाया जाने लगा है। अन्य राज्यों की अपेक्षा राजस्थान , पंजाब , उत्तर प्रदेश , उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और बिहार में तीज का त्यौहार बड़े उत्साह के साथ महिलाओं के द्वारा मनाया जाता है। इतना ही नहीं हमारे पड़ोसी देश नेपाल में भी तीज का त्यौहार बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।

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कई तरह के होते हैं त्यौहार

आमतौर पर तीज के त्यौहार को लोग यह जानते हैं कि एक ही तिथि पर एक ही साथ मनाई जाती है। पर ऐसा नहीं है। देश के अलग अलग भागों में तीज का त्यौहार अलग अलग तरीके से अलग अलग समय पर मनाया जाता है।

आइए डालते हैं इस पर एक नजर....

सावन के महीने में मनाई जाने वाली तीज को हरियाली तीज, श्रावणी तीज या फिर सावन की तीज के नाम से भी जानते हैं। कहते हैं कि सावन का महीने में शिवजी की पूजा का बहुत महत्त्व होता है। इसलिए यह हरियाली तीज भी शिवजी और माता पार्वती को समर्पित एक त्यौहार है।

हमारे हिन्दू धर्म में मान्यता है कि महादेव शिवजी और देवी पार्वती का पुनर्मिलन के लिए ही यह हरियाली तीज मनाई जाती है। कहते हैं कि देवी पार्वती ने महादेव को पाने के लिए कई जन्मों तक कठोर तप किया था और इसी तीज के दिन महादेव ने देवी पार्वती को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था।

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ऐसे की जाती है पूजा

तीज के दिन महिलाएं दिनभर का निराजल व्रत या उपवास रखतीं हैं। इसके बाद रात में देवी पार्वती की पूजा करके आशीर्वाद लेती हैं और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए मंगल कामना करतीं हैं। इसीलिए कुछ स्थानों पर देवी पार्वती को तीज माता के नाम से भी पुकारा जाता है। कहते हैं कि हमारे हिन्दू धर्म को मानने वाली कुआंरी लड़कियां भगवान शिवजी जैसे वर की कामना के लिए इस तरह का व्रत और पूजा करती हैं।

ऐसा होता है पहनावा

तीज के दिन महिलाएं लहरदार डिज़ाइन वाले रंग बिरंगे वस्त्र पहनती हैं और खुद को आकर्षक तरीके से सजाती हैं। बताते हैं कि इस त्यौहार के लिए पहने जाने वाले वस्त्रों में पीले, हरे, लाल, नीले और गुलाबी जैसे रंगों की प्रमुखता होती है। ऐसा माना जाता है कि इस महीने में चटक रंगों का समावेश होता है और ये चटकदार रंग महिलाओं के उत्साह को प्रदर्शित करते हैं।

कुछ जगह यह है परंपरा

उत्तर भारत में एक परंपरा यह भी है कि तीज के दिन मायके की ओर से नवविवाहित कन्या को कई तरह के उपहार भेजे जाते हैं। कुछ जगहों पर यह कार्य सास ससुर और पति भी करते हैं और महिला को कई प्रकार के तोहफे खरीद कर लाते हैं। इन तोहफों में नए नए कपड़े, जेवर, चूड़ियां, पायल, बिंदी, मेहंदी, फल, मिठाई आदि शामिल होता है।

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सातुड़ी तीज / कजरी तीज / बड़ी तीज

एक और तरह की तीज देश के कुछ इलाकों में मनाई जाती है, जिसे सातुड़ी तीज, कजरी तीज या बड़ी तीज कहा जाता है।

कहते हैं कि रक्षा बंधन के तीन दिन बाद मनाई जाने वाली तीज को सातुड़ी तीज कहते हैं। कुछ जगहों पर इसे बड़ी या कजली तीज भी कहते हैं। यह कृष्ण जन्माष्टमी से पांच दिन पहले आती है। सातुड़ी तीज मनाते समय नीम की पूजा की जाती है।

वैसे तो राजस्थान के बूंदी शहर में कजली तीज का उत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। पालकी को सजाकर उसमें तीज माता (पार्वतीजी) की सवारी नवल सागर से शुरू होती है। इसमें हाथी , घोड़े , ऊंट तथा कई लोक नर्तक और कलाकार हिस्सा लिया करते हैं।

अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए महिलाओं ने रखा हरितालिका तीज व्रत

इसको मनाने के लिए महिलाएं और लड़कियां इस दिन परिवार के सुख शांति की मंगल कामना में निर्जला व्रत रखती है। शाम को तीज की पूजा करके कजरी तीज की कथा कहानी कहानी सुनी जाती है। इसमें नीमड़ी माता की पूजा करके नीमड़ी माता की कहानी भी सुनी जाती है। रात में चांद निकलने पर उसकी पूजा की जाती है। चांद को अर्ध्य देने के बाद परिवार के बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया जाता है। इसके बाद सत्तू के पकवान खाकर व्रत तोड़ा जाता है।

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