कहते हैं कि हैदराबादी बिरयानी का कोई जवाब नहीं है और अगर आप नानवेज के शौकीन हैं तो आप इसे जरूर चखना चाहते होंगे। साक्षी समाचार की टीम ने बिरयानी की पहचान को देश-विदेश तक पहुंचाने वाले हैदराबाद के अली हिम्मती से मुलाकात की और उनके सफर को पाठकों के सामने लाने की पहल की। साक्षी समाचार के असिस्टेंट न्यूज एडिटर विजय कुमार तिवारी ने अली हिम्मती से खास मुलाकात की और बिरयानी किंग बनने के पूरे सफर को जानने की कोशिश की।

ऐसा है पूरा सफरनामा

अली हिम्मती ने साक्षी समाचार को बताया कि 1953 में शुरू हुआ पैराडाइज, शुरुआती दौर में केवल एक छोटा रेस्टोरेंट हुआ करता था। यह पास के एक सिनेमा हॉल के पास चला करता था। 1977-78 में अली ने जब अपने पिता से इस कारोबार को अपने हाथ में लिया तो उनका एक अलग सपना था और वह हैदराबाद में एक ऐसा रेस्टोरेंट स्थापित करना चाहते थे जिसमें कोई भी अपने परिवार के साथ बेहिचक आ सके। आमतौर पर शहर में सारे एसी वाले रेस्टोरेंट बार के साथ खोले जाते थे। जहां शराब न पीने वाले लोग अपने परिवार के साथ जाने में संकोच करते थे। ऐसे में रिस्क लेते हुए नयी सोच के साथ पहल की और सफल साबित हुए। अब उनका छोटा रेस्टोरेंट एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में तब्दील हो चुका है, जिसमें 3 हजार से अधिक लोग काम करते हैं।

ऐसे खास बनी बिरयानी

जहां तक बात सबसे अच्छी बिरयानी की है तो वह केवल नेक इरादे और हर चीज बेहतरीन करने के शौक के चलते हो पायी। बेहतरीन सामानों के इस्तेमाल से बेहतरीन बिरयानी का सफर धीरे धीरे बेहतरीन होता गया।

इनको भी खींच लायी बिरयानी

अपने पिछले 65 सालों के सफर को याद करते हुए अली कहते हैं कि यहां पर तमाम सेलिब्रेटीज भी आए, जिसमें राहुल गांधी और सचिन तेन्दुलकर के साथ-साथ तमाम खिलाड़ी व फिल्म कलाकार शामिल हैं। बिरयानी खाने के लिए ये लोग अचानक आ जाया करते हैं। साथ ही जाते जाते बिरयानी के स्वाद की तारीफ करके जाते हैं।

यहां जाने का है सपना

अली कहते हैं कि इस बिरयानी को देश के अन्य कोने के साथ-साथ विदेशों में भी ले जाने का इरादा है। 2020 तक देश में इसकी 50 शाखाएं खोलने और उसके बाद अरब व खाड़ी देशों में ले जाने का इरादा है।