यह तो हम सब जानते ही हैं कि फैशन की दुनिया में नित नए प्रयोग होते हैं, बदलाव होते हैं और युवतियां व महिलाएं बड़े चाव से सारे बदलाव अपनाती भी हैं पर आज भी कुछ बातें फैशन की दुनिया में ऐसी हैं जो कभी नहीं बदलती।

जी हां, हम बात कर रहे हैं साड़ी की। आज भी भारतीय महिलाओं की पहली पसंद साड़ी है और साड़ी के पहनने के तरीके में, फैब्रिक में भले ही बदलाव आ जाए पर साड़ी कभी फैशन से बाहर नहीं होती।

तभी तो भारतीय महिलाओं का वार्डरोब आज भी साड़ियों से भरा रहता है और उन साड़ियों में कम से कम एक-दो बनारसी या फिर कांजीवरम की साड़ी जरूर होती है।

अगर न हो तो महिलाओं का यह सपना होता है कि ये साड़ियां उनके वार्डरोब का हिस्सा बनें और इसे पहनकर इतराने का मौका उन्हें भी मिले।

बनारसी और कांजीवरम दोनों ही सिल्क साड़ियां होती है जो अपनी बुनाई व कारीगरी के लिए मशहूर है। बनारसी साड़ी उत्तर प्रदेश के बनारस में बनकर तैयार होती और कांजीवरम साड़ी दक्षिण के कांचीपुरम जो तमिलनाडु में स्थित है, वहां बनती है।

बनारसी साड़ी में मिलता है परफेक्ट परंपरागत लुक 
बनारसी साड़ी में मिलता है परफेक्ट परंपरागत लुक 

वैसे दोनों साड़ियों का इतिहास व कारीगरी बिलकुल अलग है, मिलता है कुछ तो बस इतना कि दोनों सिल्क फैब्रिक से तैयार होने वाली कीमती साड़ियां है।

बनारसी साड़ी मुगलकाल के दौरान अस्तित्व में आई इसीलिए इसके डिजाइन मुगल-प्रेरित है। कुछ खास डिजाइन जैसे कलगा, बेल व पत्तियों वाला डिजाइन तो बनारसी साड़ी की पहचान ही बन चुका है।

वहीं कांजीवरम साड़ी में दक्षिण भारतीय डिजाइन देखने को मिलते हैं और खासतौर पर कांजीवरम साड़ी की बॉर्डर चौड़ी होती है जो इसकी पहचान का हिस्सा बन चुकी है।

बनारसी साड़ी 
बनारसी साड़ी 

इन दोनों साड़ियों में दूसरा फर्क यह होता है कि कांजीवरम साड़ी में बुनाई के लिए सुनहरे धागे का इस्तेमाल किया जाता है।

जबकि बनारसी साड़ियों में जरी का इस्‍तेमाल किया जाता है वो सुनहरे और सिल्‍वर दोनों रंगों की होती है। बनारसी और कांजीवरम साड़ी दोनों अलग-अलग तरह के डिजाइन और रंगों में मिलती है।

शादी के मौके पर बनारसी साड़ी व लहंगा ब्राइडल आउटफिट का हिस्सा भी बनते हैं और दुल्हन की खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं। वहीं दक्षिण में कांजीवरम साड़ी भी ब्राइडल आउटफिट ही है जिसके बगैर शादी जैसे अधूरी सी लगती है।

कांजीवरम साड़ी 
कांजीवरम साड़ी 

जहां कुछ समय पहले तक सिर्फ बनारसी साड़ियां ही महिलाओं को लुभाती थी वहीं अब तो बनारसी लहंगे, ड्रेसेस, दुपट्टे भी फैशन का हिस्सा बन चुके हैं। बनारसी फैब्रिक आपको परंपरागत लुक के साथ-साथ फैशनेबल लुक भी देता है और आजकल तो यह आम हो चुका है।

जहां फैशन में कोई फैब्रिक आता है तो जाहिर सी बात है कि उसके जैसे यानी नकली फैब्रिक भी उस नाम से धड़ल्ले से बिकते हैं और कुछ सस्ते होते हैं तो लोग अक्सर उसकी परख नहीं कर पाते और असली समझकर नकली फैब्रिक खरीद लेते हैं।

तो यह नकली फैब्रिक बनारसी और कांजीवरम का भी बिकता है बाजार में। ऐसे में आपके लिए इस फैब्रिक की पहचान कैसे की जाती है यह जानना जरूरी हो जाता है।

बनारसी साड़ी 
बनारसी साड़ी 

आइये जानते हैं कि बनारसी व कांजीवरम सिल्क की परख कैसे की जाती है ...

सबसे पहले तो आपको यह जानना चाहिए कि असली बनारसी साड़ी पर बने डिजाइन पारंपरिक होते हैं और इसके पल्लू में छह से आठ इंच लंबा प्लेन सिल्क फैब्रिक होता है।

इसके अलावा बनारसी साड़ी पर मुगल पैटर्न के अमरू, अंबी और दोमक जैसे पैटर्न होते हैं जो बताते हैं कि आपकी साड़ी असली है।

इसके अलावा आपको यह भी देखना चाहिए कि आपकी बनारसी या कांजीवरम साड़ी सिल्क की है तो इसकी चमक कैसी है क्योंकि सिल्क की साड़ियां हमेशा चमकीली होती है और अगर इसकी चमक फीकी है तो यह असली नहीं है।

चौड़ी बॉर्डर वाली कांजीवरम साड़ी 
चौड़ी बॉर्डर वाली कांजीवरम साड़ी 

वैसे कांजीवरम साड़ी की जरी को खुरचकर भी इसको परखा जाता है। अगर इसके नीचे लाल सिल्क निकले तो इसका मतलब होता है कि आपकी साड़ी असली है अगर ऐसा नहीं है तो आपकी साड़ी नकली है।

बनारसी व कांजीवरम सिल्क साड़ी को इसके अलग रंग के धागे एक अलग ही चमक देते हैं। रोशनी बदलने पर असली सिल्क का रंग भी बदला हुआ दिखता है।

वैसे सिल्क की साड़ी को परखने के लिए इसे अपनी अंगूठी से निकालकर भी देखा जाता है। अगर इसमें आप सफल होते हैं तो आपकी सिल्क साड़ी असली होती वरना नहीं। वैसे असली सिल्क साड़ी की पहचान ही यह होती है कि वह बहुत ही ज्यादा हल्की होती है।

अलग-अलग रंगों में छाया बनारसी साड़ी का जादू 
अलग-अलग रंगों में छाया बनारसी साड़ी का जादू 

अगर आप भी बनारसी या कांजीवरम की साड़ी पसंद करती है तो इन बातों पर ध्यान देकर अपने लिए असली फैब्रिक की परख कर सकती हैं। वैसे भी बनारसी और कांजीवरम सिल्क का फैशन कभी पुराना नहीं होता।

तो अब आप भी अपने लिए ले आएं बनारसी या फिर कांजीवरम की सिल्क साड़ी और फिर बन जाएं किसी भी महफिल की शान।