कम बजट में नए साल का जश्न मनाने के लिए भारत में कई सारे बेस्ट ऑप्शन हैं। इनमें से कुछ हैदराबाद, चेन्नई, कोलकाता, अहमदाबाद, मेघालय, मिजोरम, मणिपुर हैं।

न्यू ईयर का सेलिब्रेशन मनाने के लिए हैदराबाद एक बेहतर ऑप्शन है। यहां के प्रमुख जगहों में से एक जगह है नोवाटेल होटल। यह कन्वेंशन सेंटर हैदराबाद के ठीक बीचोंबीच बना हुआ है। यह सेंटर 15 एकड़ भूमि पर फैला हुआ है। इस सेंटर का निर्माण न्यू ईयर पार्टी के डिज़ाइन के हिसाब से ही किया गया है।

कोलकाता में नव वर्ष का जश्न धूमधाम से मनाया जा सकता है। कालीघाट पर नव वर्ष के उपलक्ष्य में जश्न का आयोजन किया जाता है। यहां पर दर्शनीय स्थलों और मनोरंजन केंद्रों की सैर कर लोग नव वर्ष मना सकते हैं। यह कम खर्चील होता है।

नववर्ष के स्वागत में अगर आपका बजट कम भी है तो आप पार्टी का मजा ले सकेंगे। गुजरात में आपको कम बजट में हैप्पी न्यू ईयर मना सकते हैं। अहमदाबाद बाद में सिंदू भवन रोड पर SK फार्म में '1920 म्यूजिक फेस्टिवल' नाम से नववर्ष की पूर्व संध्या से जश्न मनाया जाता है। यहां प्रति व्यक्ति के लिए एंट्री फी केवल 199 रुपये और कपल के लिए 349 रुपये और 10 लोगों के ग्रुप में शामिल होने के लिए महज 1899 रुपये खर्च करने होंगे।

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गोवा में हैप्पी न्यू ईयर मनाना खर्चीला माना जाता है लेकिन इसके बावजूद कम खर्च में हम नववर्ष का भरपूर आनंद ले सकते हैं। गोवा मौजूदा क्लबों से एक क्लब है टीटोज क्लब। यह एक बेस्ट नाइट क्लब है। हैप्पी न्यू ईयर का जश्न मनाने के लिए टीटोज क्लब से बेहतर और कोई जगह नहीं हैं। यहां की नाइट पार्टी और म्युजिक तथा डांस बेहद खास होता है। यहां की पार्टी ज्यादा मशहूर है। बता दें कि इस वर्ष होने वाले न्यू ईयर सिलेब्रेशन के लिए महिलाओं को पार्टी में एंट्री फ्री है।

चेन्नई में मरीना बीच पर हम न्यू ईयर सेलिब्रेशन का लुत्फ उठा सकते हैं। बीच पर न्यू ईयर सेलिब्रेशन का आयोजन करना काफी सस्ता होता है। इस बीच पर भीड़ देखी जा सकती है। नए साल का आनंद लेने के लिए खुली जगह पर लोक इकठ्ठा होते हैं।

मिजोरम, मेघालय और मणिपुर में हम नव वर्ष का जश्न पारंपारिक रूप से मना सकते हैं। इन राज्यों में नव वर्ष मनाना कम खर्चिला होता है। जश्न के दौरान भोजन में बने व्यंजनों को विशेष माना जाता है। यहां पर जश्न का आयोजन किसी हॉल या घर में किया जाता है। इसलिए यह कम खर्चिला होता है। बता दें कि नव वर्ष के अवसर पर मेघालय में सौ साल पुराने चीड़ के पेड़ को विशेष तौर पर सजाया जाता है। वर्ष 1897 के भूकंप के बावजूद यह पेड़ यहां टीका हुआ है।