हैदराबाद : पूर्व क्रिकेटर विवियन रिचर्ड्‌स की बेटी मसाबा गुप्ता भारतीय फैशन इंडस्ट्री के बड़े नामों में से एक हैं। 2009 में लैक्मे फैशन वीक में इंटरनैशनल इंस्टिट्यूट औफ फैशन डिजाइनिंग की ओर से मोस्ट प्रौमिसिंग डिजाइनर का खिताब मिला, जिसने मसाबा के लिए फैशन डिजाइनिंग में कामयाबी के नये दरवाजे खोल दिए। भारतीय और पश्चिमी फैशन का फ्यूजन पेश करने में माहिर मसाबा खुद सादगी से रहना पसंद करती हैं।

हालिया एक साक्षात्कार में मसाबा ने अपने बारे में कहा है कि वे मुंबई में पैदा और बड़ी हुई हैं और बचपन में माता-पिता दोनों उनके आसपास ही रहे। हालांकि पिता खेल की वजह से पूरी दुनिया में घूमते रहे, फिर भी वे हमेशा मसाबा के लिए समय निकालते रहे। जब वे 14 साल की हुईं तो विवियन रिचर्ड्‌स स्थायी तौर पर अपने शहर में जा बसे। मसाबा कहती हैं कि वे उनकी कमी महसूस करती हैं, लेकिन उसके बाद से पिता हमेशा उनके संपर्क में रहते हैं।

वे कहती हैं कि उनके माता-पिता ने कभी भी उन पर प्रोफेशन को लेकर कोई दबाव नहीं डाला। वे हमेशा अपनी इच्छा से प्रयोग करने के लिए स्वतंत्र रहीं हैं, इसीलिए स्कूल के दिनों में वे खेल को लेकर दीवानी थीं। उन्हीं दिनों वे राज्य स्तर पर टेनिस खेल चुकी हैं। फिर इससे मन भर गया।

इसके बाद एक समय उनका रुझान भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रति भी रहा और इसके लिए उन्होंने लंदन विश्वविद्यालय से संगीत से संबंधित एक कोर्स भी किया। फिर जब वे भारत आईं तो उनका इससे भी मोहभंग हो गया। वे कहती हैं कि इस सबके बाद भी उनके माता-पिता ने उनसे करियर को लेकर किए प्रयोगों पर कभी कोई सवाल नहीं किया।

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जब उन्होंने फैशन डिजाइनिंग के बारे में सोचा तो लगा कि यही सबसे अच्छा है। फिर भारत के ही एक फैशन डिजाइनिंग संस्थान से डिग्री ली और कुछ ही महीनों में उन्होंने अपना ब्रांड 'मसाबा' के नाम से लांच कर दिया।

जब वे यह बताती हैं कि उन्हें फैशन की दुनिया में आए मात्र 3 ही महीने हुए थे और उन्हें मोस्ट प्रॉमिसिंग डिजाइनर का अवॉर्ड मिला तो वे बहुत खुश हुईं, तो यह खुशी उनकी आंखों में भी दिखाई देती है।

वे बताती हैं कि चूंकि उनकी मां नीना गुप्ता ने अपना समय उन्हें बड़ा करने में दिया, इसलिए जब उन्होंने 49 साल की उम्र में विवेक मेहरा से शादी करने का निर्णय लिया तो मसाबा को कोई आश्चर्य नहीं हुआ। हकीकत में मसाबा नीना के निर्णय की प्रशंसा करती हैं। वे कहती है, 'युवावस्था में जिंदगी की मुश्किलों से अकेले निबटा जा सकता है लेकिन जैसे ही उम्र बढ़ती है, हर व्यक्ति को कंपनी और सहयोग की जरूरत होती है।'