सोने-चांदी के आभूषणों को को टक्कर दे रही है फैशन जूलरी,  जानें कहां सजता है बाजार

कॉन्सेप्ट इमेज - Sakshi Samachar

जयपुर : सस्ती, सुंदर और जोरदार। इन तीन खासियतों के चलते फैशन जूलरी ने सोने-चांदी के पारंपरिक आभूषण कारोबार को जबर्दस्त टक्कर दी है। ‘यूज एंड थ्रो' में विश्वास रखने वाली युवा पीढ़ी ऐसी ‘इमिटेशन' जूलरी की दीवानी है और जयपुर इसका प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है।

जूलर्स एसोसिएशन के सदस्य, कारोबारी विजय केडिया के अनुसार ये आभूषण बहुत सस्ते हैं और इनमें सोने, चांदी जैसा जोखिम नहीं है। इसके साथ ही डिजाइन, फिनिशिंग और रंग विविधता के मामले में ये इक्कीस हैं। इन्हीं खूबियों के चलते इमिटेशन जूलरी का प्रचलन लगातार बढ़ा है। उन्होंने कहा कि आजकल ज्यादातर फिल्मों व टीवी कार्यक्रमों में कलाकार आमतौर फैशन जूलरी ही पहनते हैं। इस कारण विशेषकर युवा वर्ग यानी उन युवतियों में यह तेजी से लोकप्रिय हुई है जो चीजों को ‘यूज एंड थ्रो' की सोच के साथ इस्तेमाल करती हैं। इमिटेशन जूलरी को कृत्रिम या फैशन जूलरी भी कहा जाता है।

इस तरह की जूलरी बनाने में कांच, प्लास्टिक, सिंथेटिक स्टोन, लाख, चमड़े, टेराकोटा, एल्युमिनियम व पीतल का इस्तेमाल होता है। इनमें अंगूठी व बालियों (ईयर रिंग) लेकर पूरे सेट शामिल हैं।

एसोसिएशन के एक और सदस्य सुनील वटवारा के अनुसार पिछले कुछ साल में इमिटेशन जूलरी उद्योग काफी तेजी से आगे बढ़ा है। पहले आभूषण का मतलब सोने-चांदी के जेवरों से होता था, लेकिन अब इसका खूबसूरत व सस्ता विकल्प इमिटेशन जूलरी है। इस तरह की जूलरी के चार प्रमुख केंद्रों में एक जयपुर है। यहां जौहरी बाजार में इसके कई शोरूम व दुकानें हैं। इसके अलावा इमिटेशन जूलरी के अन्य प्रमुख केंद्र मुंबई, कोलकाता व राजकोट हैं।

चूंकि इमिटेशन जूलरी का सारा कारोबार मुख्य रूप से असंगठित क्षेत्र का है इसलिए इस उद्योग के आकार के बारे में कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। हालांकि बाजार सूत्रों के अनुसार 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का यह बाजार बड़ी संख्या में रोजगार दे रहा है। चीन के बाद भारत को ऐसी जूलरी का दूसरा सबसे बड़ा बाजार माना जाता है। इमिटेशन जूलरी के बढ़ते चलन का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि प्रमुख आनलाइन खुदरा पोर्टल अमेजन, फ्लिपकार्ट, वूनिक व टाटाक्लिक के जरिये भी इन्हें बेचा जा रहा है। इन साइटों पर इस तरह के आभूषण की शुरुआती कीमत 25 रुपये है।

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