मुंबई : नामी-गिरामी हस्तियों की पसंदीदा डिजाइनर जोड़ी अंकुर और प्रियंका मोदी का मानना है कि भारतीय फैशन लेबलों के लिए पश्चिम का रुख करने से पहले स्थानीय बाजार को समझना और उसे संतुष्ट करना जरूरी है। प्रियंका जो एएम-पीएम लेबल का आधा हिस्सा हैं, कहती हैं कि विश्वभर में उनके ब्रांड की सफलता का कारण यह है कि वह अपनी भारतीयता को बहुत 'आत्मविश्वास' से स्वीकार करते हैं।

प्रियंका ने एक साक्षात्कार में बताया, 'बीते कई सालों में, हमें सभी प्रेरणाएं भारतीय कला से मिली हैं। यह कुम्हारी, धातु का काम या कुछ भी हो सकता है। हर सीजन में हम अपने संग्रह में भारत को केंद्र में रखते हैं। हमें कलात्मक कार्यों के साथ प्रयोग करना पसंद है। हम रंगों के सही प्रयोग के लिए बहुत समय देते हैं। चलन के साथ-साथ हम स्थानीय सौंदर्यशास्त्र को भी शामिल करते हैं।'

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फैशन अब अधिक प्रतिस्पर्धी बन गया है : डिजाइनर

उन्होंने कहा, 'भारत के लोग हमेशा से हमारे लक्षित ग्राहक रहे हैं। और वह कितना भी विदेश घूम लें, अंतत: अगर कोई पर्व-त्योहार है तो लोग भारतीय परिधान पहनना चाहते हैं। परिधानों को आधुनिक किया जा सकता है, लेकिन वह अपनी शादी में बॉल गाउन ड्रेस पहनने के लिए तैयार नहीं होंगे।'

डिजाइनर ने कहा कि फैशन डिजाइनिंग भले ही एक रचनात्मक प्रक्रिया है, लेकिन इसके आर्थिक पहलु को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। भारत में खुद को जीवित रखने के लिए डिजाइनरों को भारतीय ग्राहकों के लिए परिधान बनाना जरूरी है। हम पश्चिमी देशों में लोगों के लिए कपड़े बनाते हुए यहां सफल नहीं हो सकते। हमें यहां के ग्राहक जो चाहते हैं वह उन्हें देने की जरूरत है। डिजाइनर जोड़ी ने मुंबई में जारी लैक्मे फैशन वीक विंटर/ फेस्टिव 2018 में अपना नया संग्रह 'द जिप्सेट' प्रस्तुत किया।