आज भी ‘बैंडिट क्वीन’ के लिए जानी जाती है सीमा बिस्वास, किया था शानदार अभिनय  

सीमा बिस्वास के विभिन्न रूप  - Sakshi Samachar

बॉलीवुड में कई ऐसी अभिनेत्रियां भी है जिन्होंने अपनी पहली फिल्म में इतना शानदार अभिनय किया कि न सिर्फ उन्हें इसके लिए अवार्ड मिला बल्कि जिसने भी उनका अभिनय देखा उसने दांतों तले उंगली दबा ली।

पहली ही फिल्म में इतना जानदार व मुश्किल अभिनय हर किसी की बात नहीं होती पर सीमा बिस्वास ने यह कर दिखाया। आज तक उनकी पहचान उसी रोल से होती है। जी हां, हम बात कर रहे हैं बैंडिट क्वीन में उनके द्वारा निभाए गए फूलन देवी के रोल की।

सीमा बिस्वास

सीमा बिस्‍वास का जन्‍म 14 जनवरी 1965 को असम के नालबाड़ी में हुआ‍ था। उनके पिता का नाम जगदीश बिस्‍वास है जबकि मां का नाम मीरा बिस्‍वास जो असम में इतिहास की एक शिक्षिका थीं। सीमा ने नेशनल स्‍कूल ऑफ ड्रॉमा से अभिनय की बारीकियां सीखी।

फूलन देवी के किरदार में जान डालने वाली सीमा बिस्वास 

सीमा बिस्वास के परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। उनके माता-पिता ने बड़ी मुश्किलों के साथ उन्हें नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) भेजा। हालांकि एक वक्त ऐसा भी था जब सीमा अभिनेत्री नहीं वकील बनना चाहती थीं। एनएसडी जाने के बाद उनकी किस्मत पूरी तरह बदल गई।

परिवार की आर्थिक हालात को देखते हुए सीमा ने अपना करियर अपने दम पर बनाया और उन्होंने एनएसडी जाने के बाद कभी घर से पैसे नहीं मंगाए।

सीमा को पहली बार कांजे नोबूमित्सू के 'रशोमोन' प्ले में एक छोटे से रोल के लिए चुना गया था। सीमा की जिंदगी उस वक्त बदल गई जब उन्होंने 'बैंडिट क्वीन' की। फिल्म के निर्देशक शेखर कपूर को सीमा का अनप्रोफेशनल पोर्टफोलियो पसंद आया था और उन्हें फिल्म में मुख्य भूमिका के लिए चुन लिया गया था। सीमा ने किरदार को इतने दमदार तरीके से निभाया कि लोग उन्हें आज भी फूलन देवी के किरदार से याद करते हैं। इसके लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार से भी नवाजा गया।

सीमा बिस्वास 

असम में पली बढ़ी सीमा की हिंदी शुरुआत में काफी कमजोर थी। उन्होंने इस फिल्म की लाइनों को सैकड़ों बार रिहर्सल किया। फिल्म रिलीज के बाद सीमा ने बताया था कि 'कई सारे न्यूड सीन थे। इसके चलते बहुत विवाद हुआ था हालांकि वो बॉडी डबल पर फिल्माया गया था लेकिन विवादों की वजह से मुझे रात-रात भर रोना पड़ा था। इस सीन को शूट करते समय निर्देशक और कैमरामैन के अलावा बाकी क्रू मेंबर का अंदर आना मना था।'

विवाद इतना बढ़ गया था कि सीमा ने शेखर कपूर से न्यूड सीन हटाने के लिए कहा था। शेखर कपूर का मानना था कि फिल्म सच्ची घटना पर आधारित है। फिल्म में लोगों की क्रूरता को दिखाने के लिए ये सीन जरूरी है। सीमा बिस्वास का कहना है कि हॉलीवुड में कई अभिनेताओं ने उनके इस सीन की तारीफ की थी लेकिन भारत में इसे गलत तरीके से देखा जाता है।

शानदार अभिनेत्री है सीमा बिस्वास 

सीमा की फिल्म देखने के बाद उनके पिता ने मां की ओर देखते हुए कहा था कि 'कुछ भी कहो मीरा (सीमा की मां), इतना मजबूत और मुश्किल किरदार मेरी बेटी के अलावा और कोई नहीं कर सकता था।' सीमा का मानना है कि उनके पिता का ये कहना उनके लिए सबसे बड़ा अवॉर्ड है।

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सीमा बिस्‍वास 1994 में आई शेखर कपूर की फिल्‍म बैंडिट क्‍वीन से फिल्‍मी डेब्‍यू किया। जहां फूलन देवी के किरदार ने उन्‍हें काफी प्रसिद्धि दिलाई। इसके बाद सीमा ने कई बेहतरीन फिल्‍मों में सह अभिनेत्री का किरदार निभाया। सीमा की कुछ बेहतरीन फिल्‍में हैं- बैंडिट क्‍वीन, खामोशी: द म्‍यूजिकल, भूत, एक हसीना थी, विवाह और हॉफ गर्लफ्रेंड।

फिल्म खामोशी में नाना पाटेकर के साथ सीमा बिस्वास 

सीमा बिस्‍वास अपने अभिनय के दम पर कई पुरस्‍कार भी अपने नाम कर चुकी हैं। जिनमें से फिल्‍म बैंडिट क्‍वीन के लिये 1997 में फिल्‍मफेयर का बेस्‍ट फीमेल डेब्‍यू अवार्ड साथ ही इसी फिल्‍म के लिये राष्‍ट्रीय फिल्‍म पुरस्‍कार के अलावा साल 1997 में स्‍टार स्‍क्रीन अवार्ड और 2001 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्‍कार भी शामिल है।

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