यूं तो बॉलीवुड में काम मिलना आसान नहीं माना जाता। कहते हैं कि या तो आपके परिवार का बैकग्राउंड फिल्मी होना चाहिए या फिर कोई गॉडफादर जो आपको बॉलीवुड में काम दिलवा सके।

या फिर आपको यहां स्थापित कर सके, पर कुछ कलाकार ऐसे भी होते हैं जो इन बातों के न होते हुए भी बॉलीवुड में अपने दम-खम पर जगह बना ही लेते हैं।

सिर्फ जगह ही नहीं बनाते बल्कि फिल्म दर फिल्म उनका अभिनय इतना निखरता जाता है कि पुरस्कारों की झड़ी लग जाती है।

जी हां, हम बात कर रहे हैं आयुष्मान खुराना की। आयुष्मान का नाम आते ही उनकी एक अलग ही छवि हमारे सामने उभरकर आती है।

वे लीक से हटकर फिल्में करते हैं और उन्हीं फिल्मों को तवज्जो भी देते हैं। उन्हें देखकर साफ लगता है कि वे सिर्फ पैसे के लिए काम नहीं करते बल्कि अच्छे काम और फिल्मों को ही वरीयता देते हैं।

संघर्ष से सफलता तक

आयुष्मान के लिए ये सफर उतना आसान भी नहीं था। बिना किसी गॉडफादर के उन्हें यह मंजिल तय करनी थी। अभिनय का शौक बचपन से था। वहीं करियर की शुरुआत में उन्होंने टीवी के रियलिटी शो में प्रतिभागी के रूप में भाग लिया। फिर टीवी पर होस्टिंग भी की।

आयुष्मान के किस्मत का तारा तब चमका जब जॉन अब्राहम ने स्पर्म डोनर जैसे बोल्ड विषय पर फिल्म बनाने की सोची। जॉन ने इस रोल के लिए आयुष्मान को चुना।

फिल्म अंधाधुन में आयुष्मान का अवॉर्ड विनिंग परफार्मेंस 
फिल्म अंधाधुन में आयुष्मान का अवॉर्ड विनिंग परफार्मेंस 

तो इस तरह 2012 में आयुष्मान खुराना ने शुजित सरकार की हास्यप्रधान फ़िल्म विकी डोनर के जरिये अभिनय की दुनिया में पहला कदम रखा था। यह फिल्म शुक्राणु दान तथा बांझपन पर आधारित थी।

इस फ़िल्म को समीक्षकों ने सराहा था। वहीं आयुष्मान के अभिनय की भी तारीफ हुई। आयुष्मान की सर्वाधिक सफल फिल्मों में 'विकी डोनर' के बाद 'दम लगा के हईशा' और 'बरेली की बर्फी' को शुमार किया जाता है।

उनकी फिल्म 'शुभ मंगल सावधान' को भी दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला था। कुछ दिनों पहले आई उनकी फिल्में बधाई हो और अंधाधुन में भी आयुष्मान के काम की तारीफ हुई है।

फिल्म दम लगा के हईशा में आयुष्मान व भूमि पे़डनेकर
फिल्म दम लगा के हईशा में आयुष्मान व भूमि पे़डनेकर

वहीं अंधाधुन के बेहतरीन अभिनय के लिए तो उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार देने की घोषणा भी हो गई है। आयुष्मान का अभिनय हर फिल्म में दमदार होता है, उन्हें पर्दे पर देखकर कहीं से यह लगता ही नहीं है कि वे अभिनय कर रहे हैं, लगता है जैसे वे उस रोल को जी रहे हैं।

थिएटर से रहा रिश्ता

यही बात उन्हें दूसरे अभिनेताओं से अलग भी करती है। आयुष्मान पांच साल तक चंडीगढ़ में थिएटर ग्रुप आगाज से जुड़े रहे शायद उनके अभिनय में सटीकता उसी थिएटर ग्रुप की देन है।

उस समय उन्हें धरमवीर भारती के अंधा युग में अश्वत्थामा की भूमिका निभाने के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार भी मिल चुका है।

फिल्म बधाई हो में आयुष्मान ने की शानदार एक्टिंग 
फिल्म बधाई हो में आयुष्मान ने की शानदार एक्टिंग 

पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पहली नौकरी दिल्ली में रेडियो एफएम चैनल 'बिग एफएम' में रेडियो जॉकी के रूप में की। यहां पर उनका कार्यक्रम 'मान न मान मैं तेरा आयुष्मान' काफी चर्चित हुआ। वह टीवी पर पहली बार एमटीवी रोडीज के सीजन-2 में नजर आये।

उसके बाद वह एमटीवी पर ही पेप्सी एमटीवी वाजअप, द वाइस आफ यंगिस्तान जैसे युवाओं के लिए कार्यक्रम में वीडियो जॉकी के रूप में नजर आये।

गायकी में भी किया कमाल

अभिनय के साथ-साथ आयुष्मान ने गायकी में भी हाथ आजमाया। वो कुछ ही मल्टी-टैलेंटेड कलाकारों में से एक है जो एक्टिंग के साथ-साथ गायकी भा जानते और समझते है। कई फिल्मों में वो गीत गा चुके है जो चार्ट बस्टर भी साबित हुए है।

आयुष्मान ने अपनी पहली ही फिल्म विक्की डोनर में पानी दा रंग गाया था जिसने धूम मचा दी थी। इसके बाद भी वे कई गाने गा चुके हैं और अभी भी गाते हैं।

छाप छोड़ जाता है आयुष्मान का अभिनय

पहले के समय में यानी सत्तर-अस्सी के दशक में मध्यमवर्ग की समस्याओं, परेशानियों, जिंदगियों को दिखाती फिल्में बनती थी। इन फिल्मों में अभिनेता के तौर पर पहली पसंद अमोल पालेकर हुआ करते थे।

बरेली की बर्फी में कीर्ति सेनन और राजकुमार राव के साथ आयुष्मान खुराना 
बरेली की बर्फी में कीर्ति सेनन और राजकुमार राव के साथ आयुष्मान खुराना 

अभिनय से जुड़ी 3 खास बातें ...

ठीक उसी तरह आज भी जब ऐसी फिल्में बन रही है तो पहली पसंद आयुष्मान खुराना बन गए हैं।आयुष्मान का शानदार अभिनय, सहज संवाद, अदायगी और उनका व्यक्तित्व इन फिल्मों में जान डाल देता है।

तभी तो हाल ही में आई बधाई हो में आयुष्मान ने एक ऐसे बेटे का किरदार बड़ी खूबी से निभाया जिसकी मां अधेड़ उम्र में फिर से मां बनने वाली है।

आयुष्मान ने ऐसा ही मध्यवर्गीय किरदार बरेली की बर्फी, दम लगा के हईशा, शुभ मंगल सावधान जैसी फिल्मों में भी शानदार तरीके से निभाया।

आयुष्मान खुराना 
आयुष्मान खुराना 

बड़े पर्दे पर प्रेम को पाने के लिए संघर्ष करता चिराग दुबे हो या फिर अपनी मनचाही पत्नी ना मिल पाने के बाद खुद से द्वंद्व करता दम लगा के हईशा का प्रेम प्रकाश तिवारी।

हर रोल में आयुष्मान का अभिनय असलियत के बिलकुल करीब लगता है और मध्यवर्गीय दर्शक खुद को उनसे आसानी से जोड़ लेता है।

अंधाधुन में आयुष्मान ने ऐसा किरदार निभाया जो अंधा होता नहीं पर उसका अभिनय करता है। फिर कुछ यूं होता है कि वह हत्या का गवाह यानी हत्या का चश्मदीद गवाह बनता है। परिस्थितियां मोड़ लेती है और उसके साथ काफी कुछ घटता है।

आयुष्मान खुराना 
आयुष्मान खुराना 

इस फिल्म में आयुष्मान के काम की काफी तारीफ हुई और अब उसी काम को देखकर उनको राष्ट्रीय पुरस्कार देने की घोषणा भी हो गई है।

आयुष्मान अच्छी फिल्मों के लिए जाने जाना चाहते हैं। इसीलिए लीक से हटकर फिल्में करते हैं। अब तो उनका काम ही उनकी पहचान बन चुका है।

पिछले साल रिलीज हुई आयुष्मान की दोनों फिल्मों, बधाई हो और अंधाधुन को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दिया जाएगा। जाहिर सी बात है कि ये मोमेंट उनके लिए खास है। अपनी इन दोनों फिल्मों की बंपर सफलता और भारत की सरकार से मिलने वाले सम्मान से वो काफी खुश हैं।

आयुष्मान हमेशा से कहते रहे हैं कि जनता अच्छा सिनेमा देखना चाहती है इसलिए अच्छा सिनेमा बनना चाहिए।

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अभी भी वे यही कह रहे हैं कि मेरी इन दोनों फिल्मों को पुरस्कार मिलना यही बताता है कि देश की जनता अच्छा सिनेमा देखना चाहती है जो उन्हें एंटरटेन करे, जिसके साथ वो खुश हो सकें, बात कर सकें और प्रचारित कर सकें।

आयुष्मान फिल्में भी अपने ही तरीके से चुनते हैं। वे फिल्म चुनते समय यह नहीं देखते कि उसका बजट कितना है बल्कि इस बात पर ध्यान देते हैं कि उससे जनता में क्या मैसेज जाएगा, उनका मनोरंजन होगा या नहीं, आखिर जनता को उनकी वह फिल्म क्यों देखनी चाहिए।

तो इस तरह अपने ही तरीके से बॉलीवुड में आगे बढ़ रहे हैं आयुष्मान। दिन ब दिन और फिल्म दर फिल्म उनका अभिनय निखर रहा है और अब तो उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल रहा है।

आयुष्मान को शुभ कामनाएं व बधाई। यूं ही वे करते रहें शानदार अभिनय और गढ़ते रहें नये कीर्तिमान।