बोल्ड और बिंदास फीमेल कैरेक्टर्स से सजी है ‘वीरे दी वेडिंग’

फिल्म का पोस्टर  - Sakshi Samachar

कलाकार : करीना कपूर कान, सोनम कपूर अहूजा, स्वरा भास्कर, शिखा तलसानिया, सुमित व्यास, नीना गुप्ता, विवेक मुश्रान, मनोज पाहवा

निर्माता : एकता कपूर, शोभा कपूर, अनिल कपूर, निखिल त्रिवेदी और रिया कपूर

निर्देशक : शशांक घोष

संगीत : शाश्वत सचदेव और विशाल मिश्रा

बैनर : अनिल कपूर फिल्म्स कंपनी, बालाजी टेलीफिल्म्स लि.

लड़कियों की दोस्ती और मस्ती पर बनीं बॉलीवुड की फिल्मों की कड़ी में एक और फिल्म 'वीरे दी वेडिंग' के रूप में जुड़ गई है। बोल्ड और बिंदास लड़कियां अपनी जिन्दगी जीने के साथ रूढिवाद के खिलाफ अवाज उठाती हैं।

चारों लड़कियां बचपन से दोस्त होती हैं, जिनमें कालिंदी परु (करीना कपूर खान), मीरा सूद (शिखा तलसानिया). साक्षी सोनी( स्वरा भास्कर) और अवनि शर्मा (सोनम कपूर) है और सबकी कहानियां एक-दूसरे की कहानी से अलग होती है। फिल्म में अवनि एक वकील है और उसके लिए उसकी मां लड़के की तलाश में होती है, जबकि अवनि अपने पसंद का लड़का चाहती है।

साक्षी के पिता करोड़पति है और उसने करोड़ों रुपये खर्च कर उसकी शादी करवाता है, लेकिन शादी के कुछ ही समय बाद साक्षी अपने पति से अलग रहना पसंद करती है, जबकि मीरा ने एक अंग्रेज से शादी करती है, लेकिन उसके घर वाले उसके फैसले के खिलाफ रहते हैं।

चार लड़कियों में से आखिरी और सिड़नी में रहने वाली कालिंदी पुरी भी ऋषभ मल्होत्रा से प्यार करती है, लेकिन वह उससे शादी करने को लेकर इस लिये कन्फ्यूजन में होती है, क्योंकि उसने अपने माता-पिता को अकसर लड़ते-झगडते देखा था। उसका मानना होता है कि प्रेमी के पति बनते ही उसका मिजाज और सोच बदल जाता है। हालांकि काफी सोच-विचार के बाद कालिंदी भी ऋषभ से शादी के लिए हां भर देती है।

कालिंदी की शादी के लिये बाकी तीन सहेलियां भी दिल्ली पहुंच जाती है और शादी की तैयारियां भी शुरू हो जाती है। शादी के रस्मो-रिवाज और ढेर सारे रिश्तेदारों को एक साथ देखकर कालिंदी घबरासी जाती है और शादी से मना कर देती है।

फिल्म में इन चारों लड़कियों के माध्यम से दिखाया गया है कि शादी और बच्चों का लड़कियों पर कितना ज्यादा प्रेशर है। वे अपनी मर्जी के लड़के से शादी नहीं कर सकती। शादी नहीं करना चाहती हैं तो उन पर शादी का दबाव डाला जाता है। फिर पहले बच्चे का दबाव, फिर दूसरे का दबाव। कोई लड़की यदि अपनी मर्जी से पति से अलग होना चाहे तो उसके चरित्र पर अंगुली उठाई जाती है। कालिंदी के कैरेक्टर के जरिये लड़कियों के शादी के प्रति कन्फ्यूज नजरिये को दिखाया गया है। वे तय नहीं कर पातीं कि वे शादी करें या नहीं।

निर्देशक के रूप में शशांक की मेहनत नजर आती है। उन्होंने कई छोटे-छोटे सीन रचे हैं और फिल्म को बोझिल नहीं होने दिया। जहां फिल्म ठहरती हुई महसूस होती है वहीं पर वे मनोरंजक दृश्यों के जरिये फिल्म को पटरी पर ले आते हैं।

ऐसे बोल्ड और बिंदास फीमेल कैरेक्टर्स संभवत: पहली बार हिंदी फिल्मों में दिखाई दिए हैं। साथ ही एक साधारण कहानी को उन्होंने अपने आधुनिक किरदारों और प्रस्तुतिकरण के जरिये एक अलग लुक दिया है। फिल्म में कई प्रोडक्ट्स को प्रमोशन के लिए दिखाया गया है जो आंखों को चुभते हैं।

फिल्म की स्टारकास्ट बढ़िया है। शादी को लेकर कन्फ्यूज लड़की के रोल में करीना कपूर का काम अच्छा है। सोनम कपूर, स्वरा भास्कर और शिखा तलसानिया अपनी-अपनी जगह अच्छी हैं। नीना गुप्ता, मनोज पाहवा सहित सपोर्टिंग कास्ट ने भी अपना काम ठीक से किया है।

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