अबकी बार तेल-तिलहन बाजार दिखाई देगी मंदी, सरकार के बजट से निराश हैं व्यापारी

कॉंसेप्ट फोटो - Sakshi Samachar

नई दिल्ली : आम बजट में तेल तिलहन उद्योग की उम्मीद के अनुरूप कोई घोषणा नहीं होने से निराश कारोबारियों की सक्रियता सप्ताह के दौरान कमजोर रही। यही वजह रही की बीते सप्ताह स्थानीय तेल तिलहन बाजार में ज्यादातर खाद्य तेल कीमतों में नरमी रही जबकि अन्य खाद्य तेल कीमतों में मामूली घट बढ़ रही।

बाजार सूत्रों के अनुसार कारोबारियों को बजट में घरेलू तेल उद्योग को सोयाबीन के सस्ते आयात से बचाने के लिये शुल्क बढ़ाये जाने की उम्मीद थी। लेकिन बजट में ऐसी कोई घोषणा नहीं होने से सप्ताह के दौरान बाजार में मायूसी रही। स्टाकिस्टों और सटोरियों ने कारोबार में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई जिससे गतिविधियां सुस्त रहीं।

साधारण मांग और बाजार में कम आपूर्ति के चलते सरसों तिलहन की कीमत जहां 15 रुपये बढ़कर 3,920- 3,935 रुपये प्रति क्विन्टल पर बंद हुई, वहीं साधारण मांग से सरसों दादरी का भाव सप्ताहांत के मुकाबले 120 रुपये की तेजी के साथ 7,870 रुपये प्रति क्विन्टल पर पहुंच गया। दूसरी ओर सरसों पक्की घानी और सरसों कच्ची घानी के भाव क्रमश: 1,275- 1,575 रुपये और 1,475-1,675 रुपये प्रति टिन पर पूर्ववत बंद हुए। स्थानीय मांग कमजोर होने से मूंगफली दाना और मूंगफली मिल डिलिवरी गुजरात की कीमतें क्रमश: 40 रुपये और 250 रुपये की हानि के साथ क्रमश: 4,750-4,900 रुपये और 11,500 रुपये प्रति क्विन्टल पर बंद हुईं।

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मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड की कीमत 1,880-1,930 रुपये प्रति टिन पर पूर्ववत बंद हुई। बेहद साधारण कारोबार के बीच जहां सोयाबीन मिल डिलिवरी दिल्ली की कीमत 100 रुपये घटकर 7,900 रुपये प्रति क्विन्टल पर बंद हुई, वहीं सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर की कीमत 50 रुपये की हानि के साथ 7,750 रुपये प्रति क्विन्टल पर बंद हुई। सोयाबीन डीगम की कीमत 6,900 रुपये प्रति क्विन्टल पर पूर्ववत बनी रही।

सीपीओ एक्स-कांडला का भाव पिछले सप्ताहांत के मुकाबले 100 रुपये की हानि के साथ 4,950 रुपये प्रति क्विन्टल पर बंद हुआ। विदेशों से सस्ते आयात और बाजार में उपलब्धता बढ़ने से पामोलीन दिल्ली और पामोलीन कांडला तेल की कीमतें क्रमश: 130 रुपये और 150 रुपये की हानि दर्शाती क्रमश: 6,270 रुपये और 5,650 रुपये प्रति क्विन्टल पर बंद हुई। नारियल तेल सहित विभिन्न अखाद्य तेलों की कीमतें पूर्व सप्ताहांत के स्तर पर ही बनी रहीं।

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