भगवान शिव-शंकर का पावन पर्व महाशिवरात्रि अब बस आने को है। हिंदू धर्म में शिवरात्रि का बड़ा महत्व है और यह फाल्गुन मास के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है। इस बार शिवरात्रि 21 फरवरी, शुक्रवार को है। वहीं ज्योतिषियों की मानें तो इस बार शिवरात्रि विशेष योग में मनेगी और यह योग पूरे 59 साल बाद बन रहा है। इस योग को साधना व सिद्धि के लिए खास माना जाता है।

माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था और उनकी विवाह की वर्षगांठ को ही शिवरात्रि मनाई जाती है। भोलेनाथ और माता पार्वती की पूजा की जाती है और उनसे मनोवांछित फल मांगा जाता है।

वैसे तो भगवान शिव भक्तों पर बहुत जल्द प्रसन्न होते हैं और भक्त अगर उनको सिर्फ जल भी चढ़ा दे तो भी वे उसे आशीर्वाद देने में देर नहीं करते। ऐसे में अगर भक्त भोलेनाथ के लिए व्रत रखे, विधि-विधान से पूजा करे और पूजा में किसी तरह की कोई गलती न करे तो इन्हें शिव-शंकर का आशीर्वाद मिलता है।

सोशल मीडिया के सौजन्य से 
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जहां शिव शीघ्र प्रसन्न होकर आशीर्वाद देने में देर नहीं करते वैसे ही जब कोई गलती हो जाए तो क्रोधित भी हो जाते हैं। ऐसे में शिव पूजा में कुछ बातों का जरूर ध्यान रखना चाहिए जिससे कि कोई गलती न हो।

आइये यहां जानते हैं कि शिव पूजा में कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए ..

-सबसे पहले तो आप ये जान लें कि कभी भी भोलेनाथ को शंख से जल नहीं चढ़ाना चाहिए क्योंकि इससे वे रुष्ट भी हो सकते हैं। जी हां, ऐसा इसलिए क्योंकि भगवान शिव ने शंखचूड़ नामक असुर का वध किया था और शंख को उसी असुर का प्रतीक माना जाता है।

शंखचूड़ भगवान विष्णु का भक्त था इसीलिए विष्णु पूजा में शंख का उपयोग किया जाता है।

-भोलेनाथ की पूजा में केसर, दुपहरिका, मालती, चम्पा, चमेली, कुन्द, जूही आदि के पुष्प नहीं चढ़ाने चाहिए।

-शंकर जी की पूजा में करताल भी नहीं बजाए जाते। इससे भी शिवजी को चिढ़ होती है।

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- शिव पूजा में तुलसी का उपयोग भी नहीं होता क्योंकि जलंधर नामक असुर की पत्नी वृंदा के अंश से तुलसी का जन्म हुआ था जिसे भगवान विष्णु ने पत्नी रूप में स्वीकार किया।

-यह भगवान विष्णु के मैल से उत्पन्न हुआ मान जाता है इसलिए इसे भगवान शिव को नहीं अर्पित किया जाना चाहिए।

- भोलेनाथ की पूजा अक्षत से होती है। अक्षत यानी साबुत चावल। टूटे हुए चावल शिव पूजा में वर्जित होते हैं। शास्त्र कहते हैं कि टूटा हुआ चावल अपूर्ण और अशुद्ध होता है इसलिए यह शिव जी को नहीं चढ़ता।

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- शंकर जी को पूजा में भूलकर भी कुमकुम न चढ़ाएं क्योंकि कुमकुम सौभाग्य का प्रतीक है जबकि भगवान शिव वैरागी हैं इसलिए शिव जी को कुमकुम नहीं चढ़ता।

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तो देखा आपने कि कैसे छोटी-छोटी बातों पर गौर करके आप शिव कृपा के पात्र बन सकते हैं।