हिंदू धर्म में चतुर्थी तिथि का बड़ा महत्व है और इस दिन भगवान गणेश की पूजा के साथ ही व्रत भी किया जाता है। रात में चंद्र दर्शन के साथ ही व्रत खोला जाता है। चंद्र देव को दूध का अर्घ्य अर्पित किया जाता है, धूप-दीप जलाकर आरती की जाती है। संध्याकाल में भगवान गणेश की पूजा की जाती है।

बुधवार भी गणेशजी को प्रिय है और इस बार तो चतुर्थी बुधवार को पड़ी है। यानी आज 12 फरवरी को चतुर्थी होने से भगवान गणेश की पूजा करके उन्हें शीघ्र प्रसन्न करके सुख-संपत्ति का वरदान मांगा जा सकता है।

ज्योतिषियों के अनुसार बुधवार, 12 फरवरी को फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया और चतुर्थी तिथि रहेगी। इस दिन सुबह 7 बजे तक तृतीया रहेगी, इसके बाद चतुर्थी तिथि शुरू हो जाएगी।

सोशल मीडिया के सौजन्य से 
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माना जाता है कि फाल्गुन मास में चतुर्थी व्रत कर दान-दक्षिणा देने से श्री गणेश समस्त कामनाओं की पूर्ति कर जन्म-मृत्यु के कष्टों का नाश करके अपने दिव्य लोक में स्थान दे देते हैं।

संकष्टी चतुर्थी के दिन सूर्योदय से चंद्रोदय होने तक उपवास रखने का नियम है। कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन भगवान गणेश की आराधना सुख-सौभाग्य की दृष्टि से श्रेष्ठ है।

गणेश संकष्टी चतुर्थी पर ऐसे करें व्रत-पूजा

- चतुर्थी के दिन सुबह स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इस दिन व्रतधारी लाल रंग के वस्त्र धारण करें।

- श्री गणेश की पूजा करते समय अपना मुंह पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर रखें।

- तत्पश्चात स्वच्छ आसन पर बैठकर भगवान गणेश का पूजन करें।

- फल, फूल, रौली, मौली, अक्षत, पंचामृत आदि से श्री गणेश को स्नान कराके विधिवत तरीके से पूजा करें।

सोशल मीडिया के सौजन्य से 
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- गणेश पूजन के दौरान धूप-दीप आदि से श्री गणेश की आराधना करें।

- श्री गणेश को फल, तिल से बनी वस्तुओं, लड्‍डू तथा मोदक का भोग लगाएं औा प्रार्थना करें कि 'ॐ सिद्ध बुद्धि सहित महागणपति आपको नमस्कार है। नैवेद्य के रूप में मोदक व ऋतु फल आदि अर्पित है।'

- सायंकाल में व्रतधारी संकष्टी गणेश चतुर्थी की कथा पढ़ें अथवा सुनें और सुनाएं।

- चतुर्थी के दिन व्रत-उपवास रख कर चंद्र दर्शन करके गणेश पूजन करें।

- तत्पश्चात श्री गणेश की आरती करें।

- विधिवत तरीके से गणेश पूजा करने के बाद गणेश मंत्र 'ॐ गणेशाय नम:' अथवा 'ॐ गं गणपतये नम: का 108 बार अथवा एक माला करें।

- इस दिन अपने सामर्थ्य के अनुसार गरीबों को दान करें।

सोशल मीडिया के सौजन्य से 
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संकष्टी चतुर्थी की तिथि का प्रारंभ बुधवार, 12 फरवरी 2020, 02:52 ए.एम. से शुरू होकर चंद्रोदय रात्रि 09:37 मिनट पर होगा तथा चतुर्थी तिथि की समाप्ति रात्रि 11:39 मिनट पर होगी।

गणेश चतुर्थी का व्रत करने वाले व्यक्ति को शाम को चंद्र दर्शन करना चाहिए, पूजा करनी चाहिए। इसके बाद ही भोजन करना चाहिए।

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गणेशजी की पूजा में 12 मंत्रों का जाप करना चाहिए ...

ऊँ सुमुखाय नमः, ऊँ एकदंताय नमः, ऊँ कपिलाय नमः, ऊँ गजकर्णकाय नमः, ऊँ लंबोदराय नमः, ऊँ विकटाय नमः, ऊँ विघ्ननाशानाय नमः, ऊँ विनायकाय नमः, ऊँ धूम्रकेतवे नमः, ऊँ गणाध्यक्षाय नमः, ऊँ भालचंद्राय नमः, ऊँ गजाननाय नमः।