हिंदू धर्म में सूर्यदेव को प्रत्यक्ष देवता माना जाता है जिनकी पूजा और अर्घ्य से ही दिन की शुरुआत होती है। जहां सूर्य के आशीर्वाद से मान-सम्मान की प्राप्ति होती है वहीं आरोग्य का वरदान भी भुवन भास्कर ही देते हैं।

वहीं ज्योतिष में भी सूर्य का स्थान सभी ग्रहों में सर्वोत्तम माना गया है। सूर्य के उत्तरायण व दक्षिणायन होने से ही जलवायु और ऋतुओं में परिवर्तन संभव हो पाता है। सूर्य हर महीने एक राशि से दूसरी राशि में जाते हैं और इसीको संक्रांति कहते हैं।

वर्ष में बारह संक्रांतियां आती है और जिस राशि में सूर्य प्रवेश करते हैं उसीके नाम पर संक्रांति का नामकरण होता है। अब सूर्य मकर से कुंभ में प्रवेश कर रहे हैं तो इसे कुंभ संक्रांति कहते हैं।

वैसे तो हर दिन सूर्य पूजा की जाती है और रविवार को विशेष रूप से सूर्य देव को अर्घ्य देकर पूजा की जाती है, व्रत किया जाता है पर संक्रांति पर तो सूर्य देव की विशेष पूजा करने का विधान है। साथ ही इस दिन स्नान-दान का भी महत्व है और जो भक्त ऐसा करता है उस पर सूर्य देव कृपा बरसाते हैं।

माना जाता है कि संक्रांति के दिन स्नान का और विशेषकर गंगा स्नान का अत्यंत महत्व है। कहते हैं कि संक्रांति के दिन स्नान मात्र से जातक को ब्रह्म लोक की प्राप्ति होती है। देवी पुराण मे यहाँ तक कहा गया है की संक्रांति के दिन जो स्नान नहीं करता दरिद्रता उसे कई जन्मों तक घेरे रहती है। संक्रांति के दिन दान-पुण्य की परंपरा सदियों से चली आ रही है।

सोशल मीडिया के सौजन्य से 
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इस वर्ष कुंभ संक्रांति का यह पर्व 13 फरवरी को गुरुवा के दिन मनाया जायेगा। आमतौर पर कुंभ संक्रांति फरवरी या मार्च महीने में ही आती हैं।

कुंभ संक्रांति पर स्नान-दान का शुभ मुहूर्त

शुभ मुहूर्त प्रातः 7 बज के 5 मिनट से 9 बज के 3 मिनट तक (1 घंटा 58 मिनट)

महापुण्य मुहूर्त प्रातः 8 बज के 39 मिनट से 9 बज के 3 मिनट तक (23 मिनट)

ऐसे करें सूर्य पूजा

- कुंभ संक्रांति के दिन भक्तों को अन्य संक्राति की तरह अन्न, कपडे और अन्य जरुरी सामान ब्राह्मण पंडितों को दान करने का महत्व हैं।

- इस दिन गंगा स्नान करने का विशेष महत्व हैं। कहते हैं इस दिन गंगा में स्नान करने से जन्म-जन्म के पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती हैं।

सोशल मीडिया के सौजन्य से 
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- इस दिन साफ़ मन और पूर्ण श्रद्धा से गंगा जी की आरती और पूजा पाठ करना चाहिए।

- जो लोग गंगा में स्नान करने में असमर्थ होते हैं वह इस दिन शिप्रा, यमुना और गोदावरी नदी की किनारे मोक्ष प्राप्ति के लिए रुख करते हैं।

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- कुंभ संक्रांति के इस दिन गाय दान करने की भी परंपरा हैं। ऐसा माना जाता हैं इससे सुख और वैभव की प्राप्ति होती हैं।