वसंत पंचमी का त्योहार देवी सरस्वती के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है और इस दिन बड़े धूमधाम से विद्या की अधिष्ठात्री देवी को पूजा जाता है। यह पर्व माघ मास के शुक्लपक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। वहीं वसंत ऋतु जिसे ऋतुराज भी कहा जाता है, कि शुरुआत इसी दिन से होती है। शास्त्रों में वसंत पंचमी को श्री पंचमी, सरस्वती पंचमी के नाम से भी जाना जाता है।

इस बार वसंत पंचमी का यह त्योहार 29 जनवरी को मनाया जा रहा है। इस दिन जहां पीले वस्त्र धारण करने का महत्व है वहीं मां सरस्वती को भी पीले फूल, वस्त्र व हल्दी चढ़ाई जाती है। इतना ही नहीं मां सरस्वती को भोग भी पीला ही चढ़ाया जाता है जैसेकि केसरिया भात, केसरिया पेड़े, मालपुआ आदि।

वसंत पंचमी की पूजा का शुभ मुहूर्त

बसंत पंचमी 2020 में माघ मास की शुक्ल की पंचमी तिथि यानी 29 जनवरी 2020 को है

सरस्वती पूजा मुहूर्त 2020 - सुबह 10 बजकर 45 मिनट से 12 बजकर 45 मिनट तक (29 जनवरी 2020) पंचमी तिथि प्रारम्भ - सुबह 10 बजकर 45 मिनट से (29 जनवरी 2020 ) पंचमी तिथि समाप्त - अगले दिन रात 01 बजकर 19 मिनट तक (30 जनवरी 2020)

वसंत पंचमी का महत्व

वसंत पंचमी का महत्व त्रेतायुग युग से जुड़ा है। जिस समय रावण ने माता सीता का हरण कर लिया था उस समय भगवान श्री राम माता सीता को ढूंढते हुए दंडकारण्य नामक स्थान पर भी गए थे। इस स्थान पर ही एक शबरी नामक एक भीलनी भी रहती थी। उसे काफी समय से भगवान श्री राम के दर्शनों की अभिलाषा थी।

जैसे ही भगवान श्री राम उसकी कुटिया में पधारे तो वह भगवान श्री राम की आवभगत में लग गई। वह भगवान श्री राम के प्रेम में वशीभूत होकर उन्हें बेर चखकर खिलाने लागी। ताकि उनके पास खट्टे बेर न जाएं।

सोशल मीडिया के सौजन्य से 
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मां शबरी का आश्रम आज भी गुजरात के डांग जिले में मौजूद है। जिस दिन भगवान श्री राम शबरी के आश्रम में गए थे उस दिन वसंत पंचमी का ही दिन था। यहां के लोग अब भी आस्था से एक शिला की पूजा करते हैं उनका मानना यह है कि यहीं आकर भगवान श्री राम बैठे थें। इसी जगह पर मां शबरी का मंदिर भी है।

वसंत पंचमी का दिन पृथ्वीराज चौहान से भी जुड़ा हुआ है। पृथ्वीराज चौहान ने अपने जीवन में 16 बार मोहम्मद गोरी को हराया था और उसे हर बार जीवनदान दिया था। लेकिन सत्रहवीं बार मोहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज चौहान को हरा दिया और बंदी बनाकर अफगानिस्तान ले गया। जहां जाकर उसने पृथ्वीराज चौहान की आंखें फोड़ दी।

मोहम्मद गोरी पृथ्वीराज चौहान को मृत्युदंड देने से पहले उनकी शब्दभेदी कला को देखना चाहता था। इस बात का लाभ उठाते हुए चंदबरदाई ने पृथ्वीराज को संदेश दिया।

चार बांस चौबीस गज, अंगुल अष्ट प्रमाण।

ता ऊपर सुल्तान है, मत चूको चौहान ॥

पृथ्वीराज नें जैसे ही चंदबरदाई का संदेश सुना उन्होंने तीर चला दिया और वह तीर मुहम्मद गोरी के सीने में जाकर लगा। इसके बाद चंदबरदाई ने पृथ्वीराज और स्वंय के पेट में चाकू भोंककर वीरगति को प्राप्त हो गए जिस दिन यह घटना घटी थी उस दिन वसंत पंचमी का ही दिन था।

ऐसे करें वसंत पंचमी पर देवी सरस्वती की पूजा

- साधक को वसंत पंचमी के दिन सुबह जल्दी उठाकर स्नान करने के बाद पीले या सफेद रंग के वस्त्र धारण करना चाहिए।

- इसके बाद एक साफ चौकी लेकर उस गंगाजल छिड़क कर सफेद रंग का वस्त्र बिछाकर उस पर मां सरस्वती की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।

- बसंत पंचमी की पूजा सूर्योदय के ढाई घंटे पहले या सूर्यास्त के ढाई घंटे बाद ही की जाती है। इसके बाद एक चौकी पर मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित करें।

सोशल मीडिया के सौजन्य से 
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- मां सरस्वती को सफेद या फिर पीले फूल और सफेद चंदन अर्पित करें और इसके बाद मां सरस्वती का श्रृंगार करें।

- मां का श्रृंगार करने के बाद ॐ ह्रीं ऐं ह्रीं सरस्वत्यै नमः मंत्र का जाप करें।

- इसके बाद मां सरस्वती के चरणों में गुला अर्पित करें।

- गुलाल अर्पित करने के बाद मां सरस्वती की विधिवत पूजा करें।

- मां सरस्वती का पूजन करने के बाद पुस्तकों और वाद्य यंत्रों की भी अवश्य पूजा करें।

- इसके बाद वसंत पंचमी की कथा सुने या पढ़ें।

- कथा सुनने के बाद मां सरस्वती की आरती उतारें और उन्हें दही, हलवा, केसर मिली हुई मिश्री के प्रसाद का भोग लगाएं।

- अंत में मां सस्वती की धूप व दीप से आरती उतारें और पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा मांगे।

- कुछ जगहों पर वसंत पंचमी के दिन मां की मूर्ति विर्सजन करने की भी परंपरा है। यदि आप भी ऐसा करते हैं तो मां सरस्वती की मूर्ति के साथ उनका सारा समान भी प्रवाहित करें।

ये है वसंत पंचमी की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार भगवान विष्णु ने ब्रह्मदेव को संसार की रचना का आदेश दिया था। जिसके बाद ब्रह्मा जी ने सभी जीवों विशेषकर मनुष्य की रचना की। लेकिन ब्रह्मदेव को इससे भी संतुष्टि प्राप्त नही हुई।

ब्रह्मा जी को लगता था कि संसार में अभी भी कुछ कमी है क्योंकि हर तरफ ही मौन का वातावरण है। इसके बाद ब्रह्मा जी ने भगवान विष्णु से आज्ञा पाकर अपने कमंडल में से जल लेकर छिड़काव किया। पृथ्वीं पर जैसे ही ब्रह्मा जी के कमंडल का जल गिरा उसी समय धरती पर कंपन होने लगा। जिसके बाद वृक्षों से अद्भुत शक्ति प्रकट हुई।

सोशल मीडिया के सौजन्य से 
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यह शक्ति एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री थी। जो वीणा और वर मुद्रा के साथ प्रकट हुई थीं। उनके अन्य हाथों में पुस्तक एवं माला थी। ब्रह्मा जी ने उस देवी से वीणा बजाने के लिए कहा। जैसे ही उस देवी ने वीणा बजाई वैसे ही संसार के सभी प्राणियों को वाणी प्राप्त हो गई।

जलधारा में कोलाहल होने लगा। पवन से सरसराहट की आवाज आने लगी। उस समय ब्रह्मा जी ने उस देवी को सरस्वती नाम से संबोधित किया। माता सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी जैसे नामों से भी जाना जाता है।

मां सरस्वती के मंत्र

- ओम् ऐंग सरस्वतीये नमः ओम्

- सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरुपिणि विद्यारंबम करिष्यामि सिद्धिर बावतुमे सधा

- ओम ऐम हरिम क्लेम महा सरस्वती देवया नमः

- सरस्वती नमस्तुभ्यं, वरादे कामरुपेणि, विद्यारंभम करिश्मयामी, सिधीर भगवत मे सदा

- ॐ वागीश्वर्यै विद्महे वाग्वादिन्यै धीमहि तन्नः सरस्वति प्रचोदयात

सोशल मीडिया के सौजन्य से 
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मां सरस्वती की आरती

जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता।

सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥ जय सरस्वती माता॥

चन्द्रवदनि पद्मासिनि, द्युति मंगलकारी। सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी॥

बाएं कर में वीणा, दाएं कर माला। शीश मुकुट मणि सोहे, गल मोतियन माला॥

देवी शरण जो आए, उनका उद्धार किया। पैठी मंथरा दासी, रावण संहार किया॥

विद्या ज्ञान प्रदायिनि, ज्ञान प्रकाश भरो। मोह अज्ञान और तिमिर का, जग से नाश करो॥

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धूप दीप फल मेवा, माँ स्वीकार करो। ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्तार करो॥

माँ सरस्वती की आरती, जो कोई जन गावे। हितकारी सुखकारी ज्ञान भक्ति पावे॥

जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता। सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥