माघ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी पर विनायकी चतुर्थी का शुभ योग बन रहा है। इस बार विनायकी चतुर्थी 28 जनवरी, मंगलवार को है। जब विनायकी चतुर्थी मंगलवार को होती है तो उसे अंगारकी चतुर्थी कहते हैं।

मंगलवार को चतुर्थी पड़ने के कारण यह तिथि विशेष हो जाती है और इस दिन भगवान गणेश के साथ ही मंगल ग्रह की भी पूजा की जानी चाहिए।

चतुर्थी गणेशजी की तिथि है। इस दिन गणेशजी के लिए व्रत-उपवास और पूजा-पाठ करने से घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है। मंगलवार का कारक ग्रह मंगल है। इस वजह से चतुर्थी पर मंगल की भी पूजा करें।

बात करें मंगल ग्रह की तो ज्योतिष में मंगल ग्रह को सेनापति माना गया है। ये ग्रह मेष और वृश्चिक राशि का स्वामी है। अंगारक चतुर्थी पर सबसे पहले गणेशजी की पूजा करें, इसके बाद मंगल ग्रह को लाल फूल चढ़ाना चाहिए। इस ग्रह की पूजा शिवलिंग रूप में की जाती है।

सोशल मीडिया के सौजन्य से 
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मंगल को जल चढ़ाएं, लाल गुलाल चढ़ाएं। इस शुभ योग में मंगल के लिए भात पूजा कर सकते हैं। इसमें शिवलिंग का पके हुए चावल से श्रृंगार किया जाता है और फिर पूजा की जाती है। ऊँ अं अंगारकाय नम: मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करें।

इन मंत्रों से करें भगवान गणेश की पूजा

चतुर्थी पर सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद किसी गणेश मंदिर जाएं। भगवान को सिंदूर, दूर्वा, फूल, चावल, फल, प्रसाद चढ़ाएं। धूप-दीप जलाएं। श्री गणेशाय नम: मंत्र का जाप करते हुए पूजा करें। गणेशजी के सामने व्रत करने का संकल्प लें और पूरे दिन अन्न ग्रहण न करें।

सोशल मीडिया के सौजन्य से 
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व्रत में फलाहार, पानी, दूध, फलों का रस आदि चीजों का सेवन किया जा सकता है। पूजा में भगवान को दूर्वा और जनेऊ चढ़ाएं। फलों का भोग लगाएं। दीपक जलाकर आरती करें। पूजा के बाद प्रसाद अन्य भक्तों को बांटें और स्वयं भी ग्रहण करें। इसके बाद उनके 12 नाम वाले मंत्रों का जाप कम से कम 108 बार करें।

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गणेशजी के मंत्र- ऊँ सुमुखाय नम:, ऊँ एकदंताय नम:, ऊँ कपिलाय नम:, ऊँ गजकर्णाय नम:, ऊँ लंबोदराय नम:, ऊँ विकटाय नम:, ऊँ विघ्ननाशाय नम:, ऊँ विनायकाय नम:, ऊँ धूम्रकेतवे नम:, ऊँ गणाध्यक्षाय नम:, ऊँ भालचंद्राय नम:, ऊँ गजाननाय नम:।