वसंत पंचमी आने ही वाली है और इस दिन देवी सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाती है। वहीं वसंत पंचमी वसंत ऋतु के आगमन का सूचक है। वसंत को ऋतुओं का राजा माना जाता है। वसंत ऋतु के आने पर प्रकृति के सौंदर्य में अनुपम छटा के दर्शन होते हैं।

जहां एक तरफ पेड़ों के पुराने पत्ते झड़ जाते हैं वहीं वसंत में उनमें नयी कोपलें आने लगती हैं। माघ महीने की शुक्ल पंचमी को वसंत पंचमी होती है और इसी दिन से वसंत ऋतु की शुरुआत होती है। इस बार 29 जनवरी, बुधवार को देशभर में वसंत पंचमी का त्योहार धूमधाम से मनाया जाएगा।

वसंत पंचमी का त्योहार हिंदू धर्म में एक विशेष महत्व रखता है। इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। यह पूजा पूर्वी-उत्तरी भारत में बड़े उल्लास से की जाती है। इस दिन स्त्रियां पीले वस्त्र धारण कर पूजा-अर्चना करती हैं। पूरे साल को छः मौसमों में बांटा गया है, उनमें वसंत लोगों का मनचाहा मौसम है।

सोशल मीडिया को सौजन्य से 
सोशल मीडिया को सौजन्य से 

वसंत का उत्सव प्रकृति का उत्सव है। यौवन हमारे जीवन का वसंत है तो वसंत इस सृष्टि का यौवन है। भगवान श्री कृष्ण ने भी गीता में ऋतुनां कुसुमाकरः कहकर ऋतुराज वसंत को अपनी विभूति माना है। शास्त्रों एवं पुराणों कथाओं के अनुसार वसंत पंचमी और सरस्वती पूजा को लेकर एक बहुत ही रोचक कथा कुछ इस प्रकार है:-

जब भगवान विष्णु की आज्ञा से प्रजापति ब्रह्माजी सृष्टि की रचना करके उस संसार को देखते हैं तो उन्हें चारों ओर सुनसान निर्जन ही दिखाई देता था। उदासी से सारा वातावरण मूक सा हो गया था। जैसे किसी की वाणी न हो।

यह देखकर ब्रह्माजी ने उदासी तथा मलिनता को दूर करने के लिए अपने कमंडल से जल लेकर छिड़का। उन जलकणों के पड़ते ही पेड़ों से एक शक्ति उत्पन्न हुई जो दोनों हाथों से वीणा बजा रही थी तथा दो हाथों में पुस्तक और माला धारण की हुई, जीवों को वाणी दान की, इसलिये उस देवी को सरस्वती कहा गया।

सोशल मीडिया को सौजन्य से 
सोशल मीडिया को सौजन्य से 

यह देवी विद्या, बुद्धि को देने वाली है। इसलिये वसंत पंचमी के दिन हर घर में सरस्वती की पूजा भी की जाती है। दूसरे शब्दों में वसंत पंचमी का दूसरा नाम सरस्वती पूजा भी है। मां सरस्वती को विद्या और बुद्धि की देवी माना गया है।

वसंत पंचमी के दिन विशेष रूप से मां सरस्वती की पूजा होती है। मंदिरों में भगवान की प्रतिमा का वसंती वस्त्रों और पुष्पों से श्रंगार किया जाता है तथा गाने-बजाने के साथ महोत्सव मनाया जाता है। यह ऋतुराज वसंत के आगमन का प्रथम दिन माना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण इस उत्सव के अधिदेवता हैं। इसीलिए ब्रज प्रदेश में राधा तथा कृष्ण का आनंद-विनोद बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।

इस दिन विशेष रूप से लोगों को अपने घर में सरस्वती यंत्र स्थापित करना चाहिये, तथा मां सरस्वती के इस विशेष मंत्र का 108 बार जप करना चाहिये। मंत्र - ऊँ ऐं महासरस्वत्यै नमः होली का आरंभ भी वसंत पंचमी से ही होता है।

इसे भी पढ़ें :

वसंत पंचमी 2020: जानें आखिर इस दिन पीले वस्त्र ही क्यों पहने जाते हैं, क्या है इसका महत्व

वसंत पंचमी 2020: इस दिन राशि अनुसार करेंगे मां सरस्वती की पूजा तो दूर होंगे कष्ट और मिलेगा शुभ फल

इस दिन पहली बार गुलाल उड़ाते हैं और वसंती वस्त्र धारण कर नवीन उत्साह और प्रसन्नता के साथ अनेक प्रकार के मनोविनोद करते हैं। ब्रज में भी वसंत के दिन से होली का उत्सव शुरू हो जाता है।