हिंदू धर्म में माघ माह का बड़ा महत्व है। इस महीने पवित्र नदियों में स्नान किया जाता है साथ ही दान भी। माघ के महीने में लोग जप, तप और दान करने के लिए पवित्र नदियों के किनारे एकत्रित होते हैं। तीर्थराज प्रयागराज में संगम स्नान को बेहद ही शुभ माना जाता है। यहां तो माघ महीने में कल्पवास भी किया जाता है।

वहीं माघी अमावस्या का भी महत्व है जिसे मौनी अमावस्या भी कहते हैं। इस बार मौनी अमावस्या 24 जनवरी, शुक्रवार को है। इस दिन स्नान-दान के साथ ही मौन व्रत भी रखा जाता है।

ये है मौनी अमावस्या ज्योतिषीय महत्व

ज्योतिष की मानी जाए तो मौनी अमावस्या के दिन सूर्य और चंद्रमा मकर राशि में होते हैं। इनके एक साथ होने का संयोग प्रत्येक वर्ष एक ही दिन होता है। इस शुभ संयोग में किसी पवित्र नदी में मौन धारण करते हुए डुबकी लगाने का विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व होता है। यही कारण है कि तमाम तीर्थों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पावन डुबकी लगाने के लिए इकट्ठा होते हैं।

इसलिए रखा जाता है इस दिन मौन

हम सब जानते ही हैं कि मौनी अमावस्या पर मौन व्रत रखने का विधान है। यहां सवाल उठता है कि आखिर मौन व्रत क्यों रखा जाता है। तो आइये यहां जानते हैं इसका कारण ....

ज्योतिष के अनुसार माना जाता है कि मौनी अमावस्या के दिन सूर्य और चंद्रमा मकर राशि में होते हैं। इनके एक साथ होने का संयोग प्रत्येक वर्ष एक ही दिन होता है। इस शुभ संयोग में किसी पवित्र नदी में मौन धारण करते हुए डुबकी लगाने का विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व होता है। यही कारण है कि तमाम तीर्थों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पावन डुबकी लगाने के लिए इकट्ठा होते हैं।

सोशल मीडिया के सौजन्य से 
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मौन व्रत रखकर मन और वाणी पर नियंत्रण पाते हुए इस पावन तिथि पर स्नान करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और मोक्ष मिलता है। साथ ही इस दिन किए जाने वाले मौन स्नान से शरीर की सकारात्मक ऊर्जा का ह्रास भी नहीं होता है।

मौन साधना से मिलने वाला पुण्य अक्षय रहता है। संतों के अनुसार मौन व्रत के बगैर मौनी अमावस्या पर स्नान करने से श्रद्धालुओं को पूरा पुण्य नहीं मिलता है।

ऐसे करें मौनी अमावस्या पर पूजा

यदि आप किसी कारण किसी नदी तीर्थ पर जाकर इस पावन दिन स्नान-ध्यान एवं पूजन करने में असमर्थ हैं तो आप अपने घर में ही इसका पुण्य लाभ पा सकते हैं।

मौनी अमावस्या के दिन मां गंगा का ध्यान करते हुए अपने जल के स्नान में गंगाजल और तिल डाल कर मौन रखते हुए स्नान करें और स्नान-ध्यान के पश्चात किसी मंदिर में जाकर अपनी क्षमता के अनुसार दान करें।

सोशल मीडिया के सौजन्य से 
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ये है मौनी अमावस्या का आध्यात्मिक महत्व

कड़ाके की ठंड में धार्मिक नियमों का पालन करते हुए साधना-आराधना का आध्यात्मिक महत्व भी है। विदित हो कि प्रयागराज कुंभ के अधिकांश स्नान पर्व भीषण ठंड में पड़ते हैं। हाड़ कंपा देने वाली सर्दी के मौसम में ये स्नान पर्व हमारे अंदर अदम्य जिजीविषा एवं संकल्प शक्ति का निर्माण करते हैं। इसी प्रकार मौनी अमावस्या पर मौन स्नान का भी अपना महत्व है।

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मौन रहते हुए अमृत रूपी जल का यह स्नान हमें जीवन की विषमताओं से न घबराने और चुनौतियों का दृढ़ता के साथ सामना करते हुए अपनी साधना-मनोकामना पूर्ण करने का संदेश देता है।