हम जानते ही हैं कि हिंदू धर्म में माघ माह का बड़ा महत्व है और इसी महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी को वसंत पंचमी मनाई जाती है। इस दिन पूरे विधि-विधान से विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है।

इस बार यह तिथि 29 जनवरी, बुधवार को पड़ रही है। इसी दिन से वसंत ऋतु का आरंभ भी माना जाता है। वसंत पंचमी के दिन को बेहद शुभ माना जाता है और इस दिन किसी भी अच्छे काम की शुरुआत बिना मुहूर्त देखे भी किया जा सकता है। यही वजह है कि इस दिन शादियां खूब होती है।

वहीं वसंत पंचमी पर सरस्वती पूजन पीले वस्त्र पहनकर की जाती है साथ ही मां सरस्वती को हल्दी भी चढ़ाई जाती है। पीला रंग इस बात का संकेत है कि फसल पकने वाली हैं। पीला रंग समृद्धि का सूचक भी कहा गया है। मां शारदा के मंदिरों में विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं।

सोशल मीडिया के सौजन्य से 
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वसंत पंचमी का शुभ मुहूर्त

वसंत पंचमी- बुधवार, 29 जनवरी, 2020

सरस्वती पूजा मुहूर्त- 10:45 से 12:34

अवधि- 01 घंटा 49 मिनट्स

पंचमी तिथि प्रारंभ- 29 जनवरी 2020 10:45 बजे

पंचमी तिथि समाप्त- 30 जनवरी 2020, 01:19 बजे

इस दिन पवित्र नदियों में किया जाता है स्नान

माना जाता है कि इस दिन अगर कोई छात्र मां सरस्वती की आराधना करता है तो उसे मां सरस्वती की विशेष कृपा प्राप्त हो जाती है। मां सरस्वती को बागीशवरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी इत्यादि नामों से भी जाना जाता है। संगीत की उत्पत्ति करने के कारण वे संगीत की देवी भी हैं। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व बताया गया है।

ऐसे हुआ था मां सरस्वती का जन्म

हिंदू मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु की आज्ञा से इसी दिन ब्रह्मा जी ने मनुष्य योनि की रचना की थी लेकिन शुरू में इंसान बोलना नहीं जानता था। धरती पर सब शांत और नीरस था। ब्रह्माजी ने जब धरती को इस स्थिति में देखा तो अपने कमंडल से जल छिड़ककर एक अद्भुत शक्ति के रूप में चतुर्भुजी सुंदर स्त्री को प्रकट किया। इसके हाथ में वीणा थी। यह शक्ति को ज्ञान की देवी मां सरस्वती कहा गया।

सोशल मीडिया के सौजन्य से 
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मां सरस्वती ने जब अपनी वीणा का तार छेड़ा तो तीनों लोकों में कंपन हो गया और सबको शब्द तथा वाणी मिल गई। यही कारण है कि इस दिन मां सरस्वती का पूजन किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन मां सरस्वती का पूजन करने से ज्ञान की प्राप्ति होती है।

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वसंत पंचमी के दिन पवित्र नदियों में स्नान का महत्व भी बताया गया है। यह त्योहार सम्पूर्ण भारत के साथ ही पश्चिमोत्तर बांग्लादेश, नेपाल में बड़े उल्लास से मनाया जाता है। इस दिन स्त्रियां पीले वस्त्र धारण करती हैं।