अक्सर हम घर बड़े-बुजुर्गों से सुनते हैं कि किस दिशा में सिर रखकर सोना चाहिए और किस दिशा में नहीं। हम उनकी बातों को हल्के में लेते हैं और सोचते हैं कि ये सारी बातें व्यर्थ हैं। पर तब हमें यह सोचना चाहिए कि उनका ऐसी बातें कहने के पीछे कोई कारण भी तो हो सकता है। कोई यूं ही तो कुछ भी नहीं कह देता।

जी हां, आपने सुना ही होगा कि उत्तर दिशा में सिर रखकर सोने के लिए मना किया जाता है। क्या आप जानते हैं कि ऐसा क्यों कहा जाता है, इसके पीछे क्या कारण हो सकता है।

तो आइये यहां जानते हैं इससे जुड़ा वैज्ञानिक कारण ....

सबसे पहले तो हमें यह जान लेना चाहिएक कि हमारा दिल शरीर के निचले हिस्से में नहीं है। वह शरीर से तीन-चौथाई ऊपर की ओर मौजूद है। जो रक्त शिराएं ऊपर की ओर जाती हैं, वे नीचे की ओर जाने वाली धमनियों के मुकाबले बहुत संवेदनशील और सूक्ष्म हैं।

मस्तिष्क की ओर जाते समय ये इतनी पतली हो जाती हैं कि एक कण भी फालतू नहीं ले सकतीं। एक बूंद फालतू गई, तो हैमरेज हो सकता है। जब शरीर क्षैतिज अवस्था में होता है तो नाड़ी की गति धीमी हो जाती है।

सोशल मीडिया के सौजन्य से 
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अगर रक्त उसी स्तर पर पंप किया जाएगा तो सिर में जरूरत से ज्यादा रक्त जा सकता है और नुकसान हो सकता है। अगर सिर उत्तर की ओर रखते हैं और पांच-छह घंटे तक उसी दशा में रहते हैं तो चुंबकीय खिंचाव आपके दिमाग पर दबाव डालेगा। इसलिए कहा जाता है कि उत्तर दिशा में सिर रखकर कभी नहीं सोना चाहिए।

आपने पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्रों (मैग्नेटिक फील्ड) के बारे में सुना होगा। पृथ्वी पर चुंबकीय शक्तियां प्रभावी हैं। अगर उत्तर की ओर सिर करते और पूरी नींद भर उसी तरह रहते हैं तो चुंबकीय खिंचाव दिमाग पर दबाव डालेगा।

अगर शरीर मजबूत है और ये चीजें आपके साथ नहीं होतीं तो आप उत्तेजित या परेशान होकर जाग सकते हैं क्योंकि सोते समय दिमाग में जितना रक्त संचार होना चाहिए, उससे ज्यादा होता है। ऐसा नहीं है कि एक दिन ऐसा करने पर आप मर जाएंगे, मगर रोजाना ऐसा करने पर आप परेशानियों को दावत दे रहे हैं। किस तरह की परेशानियां हो सकती हैं, यह इस पर निर्भर है कि शरीर कितना मजबूत है।

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सवाल यह है कि किस दिशा में सिर करके सोना अच्छा होता है? पूर्व सबसे अच्छी दिशा है। पूर्वोत्तर और पश्चिम दिशा भी चलेगी। कोई विकल्प नहीं है तो दक्षिण भी चल सकती है लेकिन उत्तर में तो कभी सिर रखकर सोने की गलती नहीं करनी चाहिए।