नई दिल्ली : राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल एक ऐसा नाम हैं, जिनकी चाल से दुश्मन खौफ खाते हैं। उनकी रणनीति का तोड़ निकालना किसी के लिए भी आसान नहीं है। सोमवार (20 जनवरी) को अजीत डोभाल का जन्मदिन है। आइए जानते हैं डोभाल से जुड़ी अहम बातें।

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद अजीत डोभाल लगातार घाटी के हालात पर नजर रखे हुए थे। माना जाता है कि मोदी सरकार ने अजीत डोभाल को मुख्य रूप से कश्मीर के हालात को सामान्य रखने का जिम्मा सौंपा था, जिस पर वह पूरी तरह से खरे उतरे।

अजीत डोभाल के देश की सुरक्षा के कई ऐसे कारनामें हैं, जिसे लोग आज भी याद करते हैं। चाहे वो ऑपरेशन ब्लू स्टार रहा हो या पाकिस्तान में खुफिया तरीके से रहना हो या फिर भारत का पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक रहा हो, हर जगह डोभाल ने खुद को साबित किया है और देश की सुरक्षा चाक चौबंद की है। अजीत डोभाल से न केवल पाकिस्तान की हवा खराब रहती है बल्कि चाइना भी उनकी नीतियों से डरता है।

एनएसए अजीत डोभाल (फाइल फोटो)
एनएसए अजीत डोभाल (फाइल फोटो)

कौन हैं अजीत डोभाल

अजीत डोभाल केरल कैडर के एक आईपीएस अधिकारी हैं। सेवानिवृत्त होने के बाद वो देश के पांचवें सुरक्षा सलाहकार बने। डोभाल का जन्म 20 जनवरी 1945 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के गिरि बानसेल्युन गाँव में हुआ था। उनके पिता इंडियन आर्मी में थे।

उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा राजस्थान के अजमेर में अजमेर सैन्य स्कूल में की। उन्होंने 1967 में आगरा विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की डिग्री ली। स्नातक के बाद उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा की तैयारी शुरू कर दी थी। डोभाल केरल कैडर में 1968 में आईपीएस में शामिल हुए।

अजीत डोभाल ने ज्यादातर समय खुफिया विभाग में ही काम किया। कहा जाता है कि वह सात साल तक पाकिस्तान में खुफिया जासूस रहे।

एक तेज तर्रार खुफिया अफसर के रूप में स्थापित अजीत डोभाल इंटेलीजेंस ब्यूरो के डायरेक्टर पद से सन 2005 रिटायर हुए। इसके बाद साल 2009 में अजीत डोभाल विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन के फाउंडर प्रेसिडेंट बन गए. इस दौरान न्यूज पेपर में लेख भी लिखते रहे।

साल 1989 में अजीत डोभाल ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर से चरमपंथियों को निकालने के लिए 'ऑपरेशन ब्लैक थंडर' का नेतृत्व किया था। उन्होंने पंजाब पुलिस और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के साथ मिलकर खुफिया ब्यूरो के अधिकारियों के दल के साथ मुख्य भूमिका निभाई थी।

जम्मू-कश्मीर में घुसपैठियों और शांति के पक्षधर लोगों के बीच काम करते हुए डोभाल ने कई आतंकियों को सरेंडर कराया था।

अजीत डोभाल (फाइल फोटो)
अजीत डोभाल (फाइल फोटो)

जासूस की भूमिका निभाई

अजीत डोभाल 33 साल तक नार्थ-ईस्ट, जम्मू-कश्मीर और पंजाब में खुफिया जासूस रहे हैं, जहां उन्होंने कई अहम ऑपरेशन में हिस्सा लिया है। 30 मई, 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अजीत डोभाल को देश के 5वें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में नियुक्त किया।

ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान उन्होंने एक जासूस की भूमिका निभाई और भारतीय सुरक्षा बलों के लिए महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी उपलब्ध कराई, जिसकी मदद से सैन्य ऑपरेशन सफल हो सका।

पाकिस्तान में जासूसी के दौरान एक शख्स ने पकड़ा था

एनएसए अजीत डोभाल 7 सालों तक खुफिया तरीके से पाकिस्तान में जासूस के तौर पर रह चुके हैं। इसका एक किस्सा काफी फेमस हुआ था- लाहौर में एक मजार के पास एक मुसलमान ने अजीत डोभाल को पहचान लिया था कि वो पाकिस्तानी या एक तरह से कहें तो मुसलमान हैं ही नहीं।

उस मुसलमान ने उनसे पूछा कि क्या तुम हिंदू हो? तो डोभाल चौंक गए और उन्होंने जवाब दिया- नहीं। फिर वो उन्हें अपने साथ लेकर गया और एक छोटे कमरे में दोनों गए, उसने कमरे का दरवाजा बंद कर दिया और एक बार फिर उसने कहा कि देखो मैं कह रहा हूं तुम हिंदू हो। डोभाल ने फिर से ना मे जवाब दिया। तो उस मुसलमान ने अजीत से कहा कि तुम्हारे कान छिदे हुए हैं।

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डोभाल ने बात बनाते हुए कहा कि हां बचपन में मेरे कान छेदे गए थे, लेकिन मैं बाद में कनवर्ट हो गया था। उसने कहा तुम बाद में भी कनवर्ट नहीं हुए थे। खैर तुम इसकी प्लास्टिक सर्जरी करवा लो नहीं तो यहां लोगों को शक हो जाएगा।

इसके बाद उस मुसलमान ने कहा कि वो भी एक हिंदू है। फिर उसने अपनी आलमारी में शिव और दुर्गा जी की तस्वीरें उन्हें दिखाई। डोभाल ने विदर्भ मैनेजमेंट एसोसिएशन के समारोह में भाषण देते हुए एक कहानी सुनाई थी। पाकिस्तान में छिपकर रहते हुए पाकिस्तान के कई खुफिया राज अजीत डोभाल ने पता कर लिए थे और यही वजह है कि पाकिस्तान आज भी उनसे डरता है।