देवी भागवत के अनुसार वर्ष में चार बार नवरात्रि आती है और जिस प्रकार नवरात्रि में देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है, ठीक उसी तरह गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की साधना की जाती है। गुप्त नवरात्रि के दौरान भक्तजन माँ काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, माँ ध्रूमावती, माँ बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा करते हैं।

गुप्त नवरात्रि विशेषकर तांत्रिक क्रियाएं, शक्ति साधना, महाकाल आदि से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्त्व रखती है। इस दौरान देवी भगवती के साधक बेहद कड़े नियम के साथ व्रत और साधना करते हैं। इस दौरान लोग लंबी साधना कर दुर्लभ शक्तियों की प्राप्ति करने का प्रयास करते हैं।

माघ नवरात्रि उत्तर भारत में अधिक प्रसिद्ध है और आषाढ़ नवरात्रि दक्षिणी भारत में लोकप्रिय है। माना जाता है कि यदि आपकी कुछ समस्याएं हैं तो आप किसी विशेष समस्या के लिए इन नौ दिनों में विशेष मंत्रों का जप करके उन समस्याओं का समाधान प्राप्त कर सकते हैं।

सोशल मीडिया के सौजन्य से 
सोशल मीडिया के सौजन्य से 

कब शुरू होगी गुप्त नवरात्रि

गुप्त नवरात्रि 25 जनवरी से 3 फरवरी तक है। नवरात्रि पारायण 4 फरवरी को होगा। घट स्थापना का शुभ मुहूर्त 25 जनवरी को प्रतिपदा तिथि को सुबह 9:53 बजे से 10:49 बजे तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:17 बजे से दोपहर 1:01 बजे तक रहेगा।

साल में होती हैं ये चार नवरात्रि

देवी पुराण के अनुसार एक साल में चार बार नवरात्रि मनाई जाती है। पहली चैत्र नवरात्रि साल के पहले माह में आती है तो दूसरी साल के चौथे माह यानी आषाढ़ में आती है। वहीं तीसरी नवरात्रि अश्विन मास में और ग्यारहवें महीने में चौथी बार नवरात्रि महोत्सव मनाया जाता है।

सोशल मीडिया के सौजन्य से 
सोशल मीडिया के सौजन्य से 

इन चारों नवरात्रों में आश्विन मास की नवरात्रि सबसे प्रमुख मानी जाती है। जबकि दूसरी प्रमुख नवरात्रि चैत्र मास की होती है। इनके अलावा अन्य 2 नवरात्रि को गुप्त माना जाता है इसलिए इन्हें गुप्त नवरात्रि कहा जाता है।

तंत्र साधकों के लिए महत्वपूर्ण है नवरात्रि

एक वर्ष में चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ के महीनों में कुल चार नवरात्र होते हैं। इन चार नवरात्र में दो प्रत्यक्ष और दो गुप्त नवरात्र होते हैं। चैत्र और आश्विन माह के शुक्लपक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक इन 9 दिनों को प्रत्यक्ष नवरात्र माना जाता है।

इसे भी पढ़ें :

जानें कब है मौनी अमावस्या, महत्व व स्नान-दान का शुभ-मुहूर्त

जानें आखिर कब है षटतिला एकादशी का व्रत, क्यों और कैसे पड़ा इसका ये नाम

इनका विशेष महत्व है। वहीं आषाढ़ और माघ के नवरात्र गुप्त नवरात्र की श्रेणी में रखे गए हैं। नवरात्र गुप्त तंत्र साधकों और संन्यासियों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।