माघ मास का हिंदू धर्म में बड़ा महत्व है। माघ मास के कृष्णपक्ष की एकादशी को षटतिला एकादशी का व्रत रखा जाता है। यह व्रत पूरी तरह से तिल से जुड़ा हुआ है। इस बार षटतिला एकादशी को 20 जनवरी 2020, सोमवार को है। इसी दिन व्रत किया जाएगा साथ ही भगवान विष्णु की विशेष पूजा भी की जाएगी।

षटतिला एकादशी के दिन तिलों का छ: प्रकार से उपयोग किया जाता है। इसमें तिल से स्नान करना, तिल का उबटन लगाना, तिल से हवन करना, तिल से तर्पण करना , तिल का भोजन करना और तिलों का दान करना शामिल है। इसलिए इसे षटतिला एकादशी व्रत कहा जाता है।

सोशल मीडिया के सौजन्य से 
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षटतिला एकादशी के दिन भगवान विष्णु का पूजन किया जाता है। कुछ लोग वैकुण्ठ रूप में भी भगवान विष्णु की पूजा करते हैं।

काले तिल से करें भगवान विष्णु की पूजा

इस दिन भगवान
विष्णु और श्रीकृष्ण की आराधना विधिपूर्वक की जाती है। पूजा के समय काले तिल के प्रयोग का विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि षटतिला एकादशी के दिन काले तिल का प्रयोग करने से सभी पापों का नाश होता है। इस दिन पूजा में काली गाय का भी महत्व होता है।

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षटतिला एकादशी व्रत मुहूर्त

षटतिला एकादशी तिथि का प्रारंभ: 20 जनवरी दिन सोमवार को तड़के 02:51 बजे।

षटतिला एकादशी तिथि का समापन: 21 जनवरी दिन मंगलवार को तड़के 02:05 बजे।

षटतिला एकादशी व्रत का पारण: 21 जनवरी दिन मंगलवार को सुबह 08:00 बजे से सुबह 09:21 बजे तक।

ऐसे करें षटतिला एकादशी पर पूजा

- एकादशी के दिन स्नान के बाद भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण का मन में स्मरण करने के बाद षटतिला एकादशी व्रत का संकल्प लें।

दशमी के दिन तिल मिश्रित गाय के गोबर से 108 उपले बनाएं। फिर एकादशी को व्रत संकल्प के साथ भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा करें। उन्हें चन्दन, अरगजा, कपूर, नैवेद्य आदि से पूजा करें। फिर श्रीकृष्ण नाम का उच्चारण करते हुए कुम्हड़ा, नारियल अथवा बिजौर के फल से विधिपूर्वक पूजा कर अर्घ्य दें। उड़द और तिल मिश्रित खिचड़ी का भोग लगाएं और प्रसाद स्वरूप बांट दें।

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एकादशी को रात में श्रीहरि का भजन-कीर्तन करें। रात के समय तिल मिश्रित गाय के गोबर से बने 108 उपलों का उपयोग हवन में करें। हवन के समय 108 बार "ऊं नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें। अगले दिन सुबह पारण कर व्रत खोलें।

षटतिला एकादशी व्रत का दान

षटतिला एकादशी पूजा के बाद तिल से भरा बर्तन, छाता, घड़ा, जूता, वस्त्र आदि दान करें। संभव हो तो काली गाय का दान कर सकते हैं।

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माना जाता है कि जो मनुष्य षटतिला एकादशी के दिन व्रत रखता है, उस पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा बनी रहती है। साथ ही भगवान विष्णु उसके द्वारा अज्ञानतावश की गई सारी गलतियों को क्षमा कर देते हैं।