हर कोई चाहता है कि उसका जीवन सुख-शांति से बीते। उसके घर में मां लक्ष्मी का वास हो और उसे किसी चीज की कोई कमी न रहे। इसके लिए वह मेहनत में कोई कसर नहीं छोड़ता पर कभी-कभी भाग्य उसका साथ नहीं देता।

वहीं कभी तो घर के वास्तुदोष भी उसे आगे बढ़ने से रोक लेते हैं। वह समझ ही नहीं पाता कि आखिर क्या कुछ किया जाए। तो आपको यहां यह जानना चाहिए कि ऐसे में घर में स्वास्तिक बनाया जाए तो कई तरह के वास्तुदोष दूर हो सकते हैं।

वास्तु में स्वास्तिक के कई तरह के लाभ बताए गए हैं साथ ही यह भी माना जाता है कि अलग-अलग चीजों से बनाए गए स्वास्तिक अलग फल देते हैं।

आइये यहां जानते हैं कि किस चीज से बनाया स्वास्तिक क्या फल देता है ...

- माना जाता है कि हल्दी से ईशान या उत्तर दिशा में दीवार पर पीले रंग का स्वास्तिक बनाने से घर में सुख शांति आती है और मांगलिक कार्य के लिए लाल रंग का स्वास्तिक बनाना शुभ होता है।

सोशल मीडिया के सौजन्य से 
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- कहा जाता है कि कोयले से बना काला स्वास्तिक बुरी नजर और बुरे समय को दूर करने के लिए बेहद उपयोगी और अचूक उपाय है।

- अगर आपके घर परिवार में बुरी नजर लग गई है तो कोयले से स्वास्तिक बनाएं। कहते हैं अगर घर के प्रवेश द्वार पर कुमकुम या रोली का इस्तेमाल कर स्वास्तिक का चिह्न बनाते हैं तो यह बहुत पवित्र तथा शुभ माना जाता हैं। इसी के साथ यह स्वास्तिक श्री गणेश भगवान का प्रतीक माना जाता हैं और स्वास्तिक के चिह्न को बनाने से घर पर इसका शुभ प्रभाव पड़ना शुरू हो जाता है।

सोशल मीडिया के सौजन्य से 
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- कहा जाता है किसी व्यक्ति को रात को सोते समय बुरे सपने आते हैं तो उसे सोने से पहले अपनी तर्जनी उंगली से जहाँ वह सोने जा रहा है वहां लाल स्वास्तिक का चिह्न बना लेना चाहिए।

- कहते हैं स्वास्तिक का प्रयोग शुद्ध, पवित्र एवं सही ढंग से उचित स्थान पर करना चाहिए और शौचालय एवं गंदे स्थानों पर इसे बनाने से दरिद्रता, तनाव एवं रोग एवं क्लेश में वृद्धि होना शुरू हो जाती है।

सोशल मीडिया के सौजन्य से 
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वास्तु में घर के मुख्य द्वार को बेहद खास माना जाता है क्योंकि यहीं से घर में सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती है। तो घर के मुख्य द्वार से वास्तु दोष दूर करने के लिए करें ये खास उपाय ....

- वास्तुदोष दूर करने के लिए घर के मुख्य द्वार पर स्वास्तिक का चिह्न बनाएं। किसी भी धार्मिक कार्यक्रम में या सामान्यत: किसी भी पूजा-अर्चना में घर के मुख्यद्वार पर या बाहर की दीवार पर स्वास्तिक का निशान बनाकर स्वस्ति वाचन करते हैं।

-स्वास्तिक श्रीगणेश का ही प्रतीक स्वरूप है। किसी भी पूजन कार्य का शुभारंभ बिना स्वास्तिक के नहीं किया जा सकता। चूंकि शास्त्रों के अनुसार श्रीगणेश प्रथम पूजनीय हैं, अत: स्वास्तिक का पूजन करने का अर्थ यही है कि हम श्रीगणेश का पूजन कर उनसे विनती करते हैं कि हमारा पूजन कार्य सफल हो।

-वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के मुख्य द्वार पर श्रीगणेश का चित्र या स्वास्तिक बनाने से घर में हमेशा सुख-समृद्धि बनी रहती है। ऐसे घर में हमेशा गणेश जी की कृपा रहती है और धन-धान्य की कमी नहीं होती, साथ ही स्वास्तिक धनात्मक ऊर्जा का भी प्रतीक है। इसे बनाने से हमारे आसपास से नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है।

- यदि आपके घर के सामने कोई पेड़ या खंभा है, तो यह एक अशुभ संकेत है। इसके दुष्प्रभावों को रोकने के लिए घर के मुख्य द्वार पर स्वास्तिक बनाएं।

- घर के मुख्य द्वार को साफ और सुंदर रखने से घर में सुख-समृद्धि आती है।

- द्वार पर पानी से भरे कांच के बर्तन में ताजे खुशबू वाले फूल रखें। इससे घर में सकारात्मकता आएगी।

- पीपल, आम या अशोक के पत्तों की माला बनाकर प्रवेश द्वार पर बांधें। इससे नकारात्मकता दूर होती है। जब यह पत्तियां सूख जाएं तो इन्हें बदल दें।

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- धन लाभ के लिए प्रवेश द्वार पर लक्ष्मी जी की तस्वीर लगाएं, लेकिन इनके आस-पास जूते-चप्पल न रखें।

- प्रवेश द्वार पर लक्ष्मी जी के पैर बनाएं, जो अंदर की तरफ जा रहे हों। इससे घर में समृद्धि आती है।