मकर संक्रांति का दिन बेहद शुभ होता है क्योंकि इसी दिन से सूर्य देव का उत्तरायण आरंभ होता है। सूर्य देव धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। सूर्य का यह राशि परिवर्तन वैदिक ज्योतिष के हिसाब से बहुत बड़ी घटना है।

मकर संक्रांति को ही मलमास समाप्त हो जाता है और सारे शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है। सूर्य के उत्तरायण को देवताओं का दिन भी कहा जाता है जो आषाढ़ मास तक चलता है। दक्षिणायन देवताओं के रात्रि का समय होता है। सूर्य देव इस दिन से उत्तर दिशा की ओर बढ़ना शुरू करते हैं इसीलिए इसे उत्तरायण कहा जाता है।

ये है मकर संक्रांति का महत्व ...

- कपिल मुनि ने गुस्से में आकर राजा सगर के 60,000 पुत्रों को भस्म कर दिया था। मकर संक्रांति के दिन ही महाराज भगीरथ ने अपने भाईयों का तर्पण करके उन्हें गंगा स्नान द्वारा मुक्ति दिलवाई थी। इसीलिए, मकर संक्रांति के दिन प्रयागराज में गंगा, यमुना एवं सरस्वती के संगम पर माघ स्नान के पर्व का विशेष महत्व होता है।

- महाभारत काल के महान नायक भीष्म पितामह ने उत्तरायण के समय ही अपनी देह का त्याग किया था। यह तो सब जानते ही हैं कि उन्हें इच्छामृत्यु का वरदान मिला था तो उन्होंने सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा बाणों की शय्या पर लेटकर ही की थी।

सोशल मीडिया के सौजन्य से 
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मकर संक्रांति बुधवार, जनवरी 15, 2020 को

मकर संक्रांति का शुभ मुहूर्त

मकर संक्रांति पुण्य काल 07:23 से 18:15

अवधि 10 घण्टे 52 मिनट

मकर संक्रांति महा पुण्य काल 07:23 से 09:12

अवधि 01 घण्टा 49 मिनट

मकर संक्रांति का क्षण 02:22

मकर संक्रांति पर ऐसे करें पूजा

- इस दिन पावन नदियों में श्रृद्धापूर्वक स्नान करें। इसके बाद, पूजा-पाठ, दान और यज्ञ क्रियाओं को करें।

- प्रातः काल नहा-धोकर भगवान शिव जी की पूजा तेल का दीपक जलाकर करें। भोलेनाथ की प्रिय चीजों जैसे धतूरा, आक, बिल्व पत्र इत्यादि को अर्पित करें।

- सूर्यदेव को अर्घ्य दें। आदित्य हृदय स्तोत्र का 108 बार पाठ करें।

- मकर संक्रांति के शुभ मुहूर्त में सिद्ध सूर्य यंत्र को सूर्य मंत्र का जप करके पहनने से सूर्यदेव आपकी तरक्की की राह आसान बना देते हैं।

- तिल युक्त खिचड़ी, रेवड़ी, लड्डू खाएं एवं दूसरों को भी खिलाएं।

- ब्राह्मण को गुड़ व तिल का दान करें और खिचड़ी खिलाएं। कॅरियर और सोशल स्टेटस में प्रोग्रेस होगी।

- वेदों में वर्जित कार्य जैसे कि दूसरों के बारे में गलत सोचना या बोलना, वृक्षों को काटना और इंद्रिय सुख प्राप्ति के कार्य इत्यादि कदापि नहीं करना चाहिए।

- सामर्थ्य के अनुसार, जरूरतमंद को कंबल, वस्त्र, छाते, जूते-चप्पल इत्यादि का दान करें।

सोशल मीडिया के सौजन्य से 
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शुभ कार्यों की होगी शुरुआत

भारतीय परंपरा और मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि से शुभ कार्यों का श्रीगणेश प्रारंभ हो जाता है। देव प्रतिष्ठा, पूजा-अनुष्ठान, गृह प्रवेश, मैरिज, इंगेजमेंट, आदि मांगलिक कार्यों के लिए यह अच्छा समय है। इस समय सीजनल चेंजस की वजह से बीमारियां होने का खतरा अधिक रहता है। ऐसे में तिल और गुड़ का सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कई गुना बढ़ा देता है।

ज्योतिष शास्त्र में सूर्य का महत्व

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, लीडरशिप, फिटनेस, सरकारी क्षेत्र, पिता व अधिकारियों की कृपा, करियर में सफलता और समाज में यश, मान और प्रतिष्ठा आदि चीजें सूर्य के शुभ होने पर ही संभव है। तो इस सबको पाने के लिए रोज़ाना सूर्य पूजा जरूर करें।

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मकर संक्रांति के दिन की गई सूर्य उपासना सूर्य के कष्टों से मुक्ति दिलाकर आपको जीवन में यश, मान और सफलता दिला सकती है।