मकर संक्रांति का त्योहार आए और पतंगों की बात ना हो ऐसा तो हो ही नहीं सकता। जी हां, मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने का बड़ा महत्व है। इस दिन बच्चे क्या बड़े सभी पतंगबाजी का आनंद लेना चाहते हैं। पतंगबाजी का रिवाज मकर संक्रांति के साथ जुड़ा हुआ है।

मकर संक्राति के दिन हर कोई यही चाहता है कि वह छत पर तिल के लड्डू खाते हुए पतंगबाजी का मजा ले। आजकल तो युवावर्ग डीजे व म्युजिक का आनंद लेते हुए भी पतंगबाजी का मजा लेते देखे जा सकते हैं।

अब यहां सवाल यह उठता है कि पतंग उड़ाने का चलन कैसे शुरू हुआ और संक्रांति के साथ इसकी परंपरा कैसे जुड़ी। क्या इसका कोई धार्मिक व वैज्ञानिक महत्व भी है?

तो आइये यहां जानते हैं इन्हीं सवालों के जवाब ...

ये है पतंग उड़ाने के वैज्ञानिक महत्व व लाभ ...

- माना जाता है कि जब छत पर पतंग उड़ाते हैं तो इस दौरान सूर्य से मिलने वाली धूप से शरीर को बेहद फायदा होता है।

- हम जानते ही हैं कि सर्दियों में हमारा शरीर संक्रमण से प्रभावित होता है और इस वजह से हमें सर्दी, खांसी व जुकाम हो जाता है। तो जब संक्रांति पर सूर्य उत्तरायण होता है तो उससे निकलने वाली किरणें मानव शरीर को बेहद लाभ पहुंचाती है।

सोशल मीडिया के सौजन्य से 
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माना जाता है कि इस समय निकलने वाली सूर्य की किरणें मानव शरीर के लिए औषधी का काम करती है।

तो जब छत पर पतंग उड़ाई जाती है तो हमारे शरीर को लगातार सूर्य की किरणों से सेंक मिलता है जिससे शरीर स्वस्थ रहता है और संक्रमण आदि से छुटकारा मिल जाता है।

पतंगबाजी से जुड़ी धार्मिक मान्यता ...

पतंगबाजी से जुड़ी धार्मिक मान्यता यह है कि त्रेतायुग में भगवान श्री राम ने मकर संक्रांति के दिन ही अपने भाइयों और श्री हनुमान के साथ पतंग उड़ाई थी, इसलिए तब से यह परंपरा पूरी दुनिया में प्रचलित हो गई। प्राचीन भारतीय साहित्य और धार्मिक ग्रंथों में भी पतंगबाजी का काफी उल्लेख मिलता है।

हिंदू पंचांग के अनुसार पौष माह में जब सूर्य मकर राशि में आता है तब ये पर्व मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माना जाता है कि इस दिन देव भी धरती पर अवतरित होते हैं और आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

सोशल मीडिया के सौजन्य से 
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मकर संक्रांति के दिन पुण्य, दान, जप तथा धार्मिक अनुष्ठानों का महत्व माना जाता है। इस दिन भगवान को खिचड़ी का भोग लगाया जाता है। कई स्थानों पर इस दिन मृत पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए खिचड़ी दान करने की परंपरा भी है।

उत्साहवर्धक व मनोरंजक होती है पतंगबाजी

मकर संक्रांति के मौके पर न सिर्फ हर उम्र के लोग पूरे जोश और मस्ती से पतंग उड़ाते हैं बल्कि कई जगहों पर तो पतंगोत्सव का भव्य आयोजन भी किया जाता है या फिर कई तरह की प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती हैं। जिसमें पूरे देश के पतंगबाज शामिल होते हैं और अपने दांव−पेंचों से अपना ही नहीं दूसरों का भी मनोरंजन करते हैं।

संक्रांति के दिन से होती है शुभता की शुरुआत

मकर संक्रांति के पर्व को बेहद पुण्य पर्व माना जाता है। कहा जाता है कि इस पर्व से ही शुभ कार्यों की शुरूआत होती है क्योंकि मकर संक्रांति के दिन से ही सूर्य उत्तर की ओर गमन करने लगता है। ऐसे में शुभता की शुरूआत का जश्न मनाने के लिए पतंग का सहारा लिया जाता है। वैसे भी पतंग को शुभता, आजादी व खुशी का प्रतीक माना जाता है इसलिए स्वतंत्रता दिवस पर भी पतंगें उड़ाई जाती हैं। ठीक इसी तरह घर में शुभता के आगमन की खुशी में मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की प्रथा है।

सोशल मीडिया के सौजन्य से 
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पतंग उड़ाते समय रखें इन बातों का ध्यान

मकर संक्रांति का त्योहार उत्साह व उमंग के साथ मनाया जाता है। वहीं पतंगें अपने साथ खुशी का माहौल लेकर आती हैं लेकिन अगर कुछ बातों का ध्यान न रखा जाए तो खुशी को गम में बदलने में पल भर का भी समय नहीं लगता।

मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाते समय इन बातों का विशेष रूप से ख्याल रखें जिससे की कोई दुर्घटना न घटे ...

- सबसे पहले तो पतंग उड़ाते समय किसी सुरक्षित स्थान का ही चयन करें।

सोशल मीडिया के सौजन्य से 
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- अगर आप छत पर पतंग उड़ा रहे हैं तो मुंडेर का ध्यान रखें। - चाइना के मांझे का प्रयोग न करें और न ही मांझा की धार को तेज करने के लिए बल्ब का चूरा व सरस आदि का प्रयोग न करें। यह जानलेवा हो सकता है।

- पतंग उड़ाने से पहले सनस्क्रीन व गॉगल्स का प्रयोग करें। सूरज की सीधी किरणों का आंखों या त्वचा पर पड़ना हानिकारक हो सकता है। बहुत तेज धूप में पतंग उड़ाने से परहेज करें।

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- पतंग की डोर से अंगुली को नुकसान न पहुंचे इसके लिए पतंग उड़ाते समय हाथों में दस्ताने पहनें। पतंग उड़ाते समय अगर वह फट जाए तो उसे तुरंत कूड़े में फेंकें।