आज पुत्रदा एकादशी पर सूर्यास्त के बाद करें ये खास उपाय, हर इच्छा होगी पूरी  

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पौष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। आज यानी 6 जनवरी को पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जा रहा है वहीं दक्षिण भारत में इसी एकादशी को वैकुंठ एकादशी भी कहा जाता है।

माना जाता है कि वैकुंठ एकादशी पर वैकुंठ के द्वार भक्तों के लिए खुल जाते हैं और भगवान के दर्शन व व्रत मात्र से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है।

वहीं पुत्रदा एकादशी के व्रत का भी बड़ा महात्म्य है। कहते हैं कि इस दिन व्रत करने से जहां निसंतान दंपतियों को संतान प्राप्ति होती है वहीं संतान से जुड़ी हर समस्या भी इस दिन व्रत करने से दूर हो जाती है।

एकादशी का व्रत करने के साथ ही इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। वहीं यह तो हम जानते ही हैं कि भगवान विष्णु को तुलसी के बिना भोग नहीं लगता तो एकादशी की शाम को तुलसी से जुड़ा एक उपाय मात्र कर लेने से भक्तों के सारे कष्ट दूर हो सकते हैं।

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एकादशी पर तुलसी पूजन की भी परंपरा है। तुलसी को देवी लक्ष्मी का स्वरूप भी माना गया है। इसलिए मान्यता प्रचलित है कि एकादशी पर तुलसी पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

आज करें ये खास उपाय ....

एकादशी की शाम तुलसी के दीपक जलाकर मंत्र जाप करना चाहिए। ध्यान रखें सूर्यास्त के बाद तुलसी को जल नहीं चढ़ाना चाहिए और स्पर्श भी नहीं करना चाहिए।

तुलसी पूजा करते समय तुलसी नामाष्टक मंत्र का जाप करना चाहिए...

ये है तुलसी नामाष्टक मंत्र

वृंदा वृंदावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी।

पुष्पसारा नंदनीय तुलसी कृष्ण जीवनी।।

एतनामांष्टक चैव स्त्रोतं नामर्थं संयुतम।

य: पठेत तां च सम्पूज्य सौश्रमेघ फलंलभेत।।

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ऐसे कर सकते हैं इस मंत्र का जाप

स्नान के बाद तुलसी की पूजा और परिक्रमा करें। तुलसी के पौधे को गंध, फूल, लाल वस्त्र अर्पित करें। फल का भोग लगाएं। घी का दीप जलाएं। इसके बाद तुलसी के सामने बैठकर तुलसी की माला से इस मंत्र का जाप करें।

मंत्र जाप करते समय मुंह पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। मंत्र जाप कम से कम 108 बार करें। जाप के बाद भगवान से परेशानियां दूर करने की प्रार्थना करें और पूजा में हुई भूल-चूक की क्षमा प्रार्थना करें।

तुलसी के पास बैठकर तुलसी की माला की मदद से तुलसी गायत्री मंत्र का जाप भी किया जा सकता है।

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ये है तुलसी गायत्री मंत्र

ऊँ श्री तुलस्यै विद्महे। विष्णु प्रियायै धीमहि।

तन्नो वृन्दा प्रचोदयात्।।

इस मंत्र जाप कम से कम 108 बार करना चाहिए।

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