पौष पुत्रदा एकादशी पर संतान प्राप्ति के लिए यूं करें पूजा, भूलकर भी न करें ये गलतियां  

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पौष पुत्रदा एकादशी का बड़ा महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और व्रत रखा जाता है। इस बार पौष पुत्रदा एकादशी 6 जनवरी 2020, सोमवार को है। माना जाता है कि पौष पुत्रदा एकादशी पर व्रत और पूजा करने पर संतान सुख की प्राप्ति होती है। यदि आपको पौष पुत्रदा एकादशी व्रत का सही और पूर्ण लाभ अर्जित करना है तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

कुछ लोग व्रत तो रखते हैं पर उन्हें पता नहीं होता कि इस दिन क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए जिससे कि उन्हें व्रत का पूर्ण फल भी नहीं मिल पाता।

तो आइए यहां जानते हैं कि पौष पुत्रदा एकादशी पर क्या करें और क्या न करें ...

पौष पुत्रदा एकादशी पर क्या करें ...

- श्रीकृष्ण को भगवान विष्णु का पूर्ण अवतार माना जाता है। इसलिए पौष पुत्रदा एकादशी के दिन भगवान कृष्ण के लड्डू गोपाल रूप की पूजा करनी चाहिए। इससे संतान प्राप्ति की इच्छा पूर्ण होती है।

- पौष पुत्रदा एकादशी के दिन व्रत कर भगवान विष्णु की पूजा भी की जाती है।

- व्रत के दौरान रात्रि जागरण कर भगवान विष्णु की आराधना करनी चाहिए।

- पौष पुत्रदा एकादशी के दिन गरीब बच्चों को भोजन एवं अन्य सामग्री दान करने से भी संतान सुख की कामना पूर्ण होगी।

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- पौष पुत्रदा एकादशी पर गाय को चारा खिलाएं और सेवा करें।

- तुलसी की पूजा करें।

- पौष पुत्रदा एकादशी के दिन दीप दान का भी खास महत्व है।

- किसी ब्राह्मण या गरीब को भोजन कराएं, पुण्य मिलेगा।

पौष पुत्रदा एकादशी पर क्या न करें-

- पौष पुत्रदा एकादशी से एक दिन पहले दाल एवं शहद का सेवन वर्जित माना जाता है। इस बात का खास ध्यान रखें।

- संतान सुख की प्राप्ति के लिए किया जाने वाले पौष पुत्रदा एकादशी व्रत के दौरान किसी बच्चे का दिल न दुखाएं। उन्हें दुलार और प्रेम से पेश आएं।

- पेड़-पौधों को नुकसान न पहुंचाएं। हरी सब्जियां फल आदि का घर में प्रयोग न करें।

- पौष पुत्रदा एकादशी व्रत कर रहे हैं तो दिन में बिल्कुल न सोएं।

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- गाय अथवा किसी भी जानवर को सताएं नहीं।

- एकादशी व्रत का पारण द्वादशी को करें।

- मद्यपान, मांसाहार और तामसिक भोजन का सेवन न करें और घर में किसी को भी न करने दें।

- किसी भी गरीब का दिल न दुखाएं, उनकी मदद न कर सकें तो उन्हें अपमानित भी न करें।

आज संतान की कामना के लिए ऐसे करें पूजा ...

- प्रातः काल पति पत्नी संयुक्त रूप से श्री कृष्ण की उपासना करें।

- उन्हें पीले फल, पीले फूल, तुलसी दल और पंचामृत अर्पित करें।

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- इसके बाद संतान गोपाल मन्त्र का जाप करें।

- मंत्र जाप के बाद पति पत्नी संयुक्त रूप से प्रसाद ग्रहण करें।

- अगर इस दिन उपवास रखकर प्रक्रियाओं का पालन किया जाय तो ज्यादा अच्छा होगा।

- एकादशी के दिन भगवान् कृष्ण को पंचामृत का भोग लगायें।

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- साथ में एक तुलसी की माला भी चढ़ाएं।

- निम्न मंत्र का 108 बार जाप करें- "ॐ क्लीं कृष्णाय नमः"

- पंचामृत का प्रसाद ग्रहण करें।

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