भगवान दत्तात्रेय की जयंती मार्गशीर्ष पूर्णिमा को मनाई जाती है। माना जाता है कि भगवान दत्तात्रेय त्रिदेव का स्वरूप है और इनकी पूजा से भक्त के सारे संकट दूर हो जाते हैं। दत्तात्रेय के पिता ऋषि अत्रि थे और माता अनुसूया थी।

इस बार मार्गशीर्ष पूर्णिमा बुधवार को होने से इसका महत्व बढ़ गया है और चूंकि बुधवार भगवान गणेश को प्रिय है तो इस दिन दत्तात्रेय के साथ गणेशजी की पूजा करेंगे तो शुभ फल मिलेगा।

ऐसे करें भगवान गणेश की पूजा

- पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठ जाएं और फिर जरूरी कामों से निवृत्त होकर स्नान कर लें।

-स्नान के बाद भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा स्थापित करें या घर के मंदिर में रखी प्रतिमा की पूजा करें।

भगवान गणेश की पूजा का महत्व 
भगवान गणेश की पूजा का महत्व 

-गणेशजी को जल और पंचामृत से स्नान कराएं। जनेऊ पहनाएं। अबीर, गुलाल, चंदन, सिंदूर, इत्र आदि चढ़ाएं। पूजा का धागा, वस्त्र अर्पित करें। चावल चढ़ाएं।

- गणेशजी के मंत्र बोलते हुए दूर्वा चढ़ाएं।

गणेशजी के 12 नाम मंत्रों का जाप करें-

भगवान गणेश को दूर्वा चढ़ाएं और मंत्रों का जाप करें। मंत्र- ऊँ गणाधिपतयै नम:, ऊँ उमापुत्राय नम:, ऊँ विघ्ननाशनाय नम:, ऊँ विनायकाय नम:, ऊँ ईशपुत्राय नम:, ऊँ सर्वसिद्धप्रदाय नम:, ऊँ एकदन्ताय नम:, ऊँ इभवक्त्राय नम:, ऊँ मूषकवाहनाय नम:, ऊँ कुमारगुरवे नम:।

- लड्डुओं का भोग लगाएं। कर्पूर से भगवान श्रीगणेश की आरती करें।

- पूजा के बाद प्रसाद अन्य भक्तों को बांटें। अगर संभव हो सके तो घर में ब्राह्मणों को भोजन कराएं। दक्षिणा दें।

इसके बाद करें भगवान दत्तात्रेय की पूजा

- प्रथम पूज्य गणेशजी की पूजा के बाद भगवान दत्तात्रेय की पूजा करनी चाहिए।

- भगवान दत्तात्रेय की मूर्ति को स्नान कराएं।

- भगवान को हार-फूल, चंदन आदि पूजन सामग्री अर्पित करें। भोग लगाएं।

- पूजा में ऊँ द्रां दत्तात्रेयाय नम: मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करें।

भगवान दत्तात्रेय की पूजा का महत्व 
भगवान दत्तात्रेय की पूजा का महत्व 

- अगर आप चाहें तो दत्तात्रेय के गायत्री मंत्र का जाप भी कर सकते हैं। दत्तात्रेयाय विद्महे। अवधूताय धीमहि। तन्नो दत्तः प्रचोदयात्।।

मंत्र जाप और पूजा के बाद भगवान से पूजा में हुई जानी-अनजानी भूल के लिए क्षमा याचना करें।

- अंत में भक्तों को प्रसाद वितरीत करें और स्वयं भी लें।

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अगर आप इस तरह भगवान दत्तात्रेय के साथ गणेशजी की पूजा भी करेंगे तो आपके सारे संकट दूर तो होंगे ही साथ ही आपको पूजा का फल भी शीघ्र मिलेगा।