हम सब जानते ही हैं कि खरमास में मांगलिक कार्यक्रम रुक जाते हैं और फिर उसके बाद फिर से शुरू होते हैं। तो अब 15 दिसंबर तक ही मांगलिक कार्यक्रम होंगे। 16 दिसंबर 2019 से खरमास लग जाएगा जिसके कारण मांगलिक व शुभ कार्य रुक जाएंगे।

अगले वर्ष यानी 14 जनवरी 2020 तक मंगल कार्य नहीं होंगे और फिर 15 जनवरी 2020 से मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे। ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार देव गुरु बृहस्पति 17 दिसंबर की शाम 5:50 बजे अस्त हो जाएंगे। इसके बाद 11 जनवरी 2020 को फिर उदय होंगे।

देव गुरु बृहस्पति सूर्य भगवान से 11 डिग्री या उससे कम की दूरी पर होते है तो उन्हें अस्त कहा जाता है। सभी ग्रह राहु और केतु का छोड़कर समय-समय पर अस्त होते रहते हैं।देव गुरु बृहस्पति का पूजन मांगलिक कार्यक्रमों में जरूरी है। उनके अस्त होने के समय सभी मांगलिक कार्यक्रम वर्जित हो जाते हैं।

इस बार 15 दिसंबर को देव गुरु बृहस्पति की राशि धनु में सूर्य भगवान के प्रवेश करने के साथ ही खरमास शुरू हो जाएंगे।यह स्थिति 14 जनवरी 2020 तक रहेगी। ऐसे में 14 जनवरी तक मांगलिक कार्यक्रम वर्जित रहेंगे।

खरमास में मांगलिक कार्यों नहीं होते 
खरमास में मांगलिक कार्यों नहीं होते 

धनुर्मास का माहात्म्य

16 दिसंबर को सूर्य वृश्चिक का परित्याग कर रात्रि में 12 बजकर 10 मिनट पर धनु राशि में प्रवेश कर जाएगा।लगभग एक महीने तक ये इसी राशि में रहेंगे। पुन: 15 जनवरी को सुबह इस राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करेंगे।

इस तरह एक महीने तक धनुर्मास (खरमास) रहेगा। शुभ कार्यों में प्रयुक्त तीन ग्रह, सूर्य, चंद्र और बृहस्पति में से एक का बल क्षीण हो जाता है। इसलिए शुभ कार्य नहीं होते हैं, लेकिन इस महीने का अधिपति बृहस्पति होने से भगवत भक्ति के लिए सर्वोत्तम महीने के रूप में मान्य है।

खरमास में पूजा-पाठ का महत्व 
खरमास में पूजा-पाठ का महत्व 

दक्षिण भारत और उत्तरी भारत के अनेक मंदिरों में धनुर्मास (खरमास) का उत्सव मनाया जाता है। यह पौष मास के नाम से जाना जाता है।

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पौष कृष्ण अष्टमी को श्राद्ध करके ब्राह्मण भोजन कराने से उत्तम फल मिलता है। पौष कृष्ण एकादशी को उपवासपूर्वक भगवान विष्णु का पूजन करना चाहिए। यह सफला एकादशी कहलाती है। इस व्रत को करने से सभी कार्य सफल हो जाते हैं । पौषमास की कृष्ण द्वादशी को सुरूपा द्वादशी का व्रत होता है।