जानें भौमवती अमावस्या का महत्व, इस दिन राशि अनुसार करेंगे दान तो खुल जाएंगे भाग्य  

भौमवती अमावस्या का महत्व  - Sakshi Samachar

हिंदू धर्म में अमावस्या व पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है और इस दिन विशेष पूजा व उपाय किये जाते हैं जिससे कि हमारा जीवन सुख-शांति के साथ व्यतीत हो सके। वैसे तो हर माह अमावस्या आती है पर कुछ अमावस्या खास होती है जैसे कि सोमवती अमावस्या, भौमवती अमावस्या और शनिश्चरी अमावस्या आदि।

धर्मग्रंथों के अनुसार मंगलवार को आने वाली अमावस्या को भौमवती अमावस्या कहा जाता है। भौमवती अमावस्या के समय पितृ तर्पण कार्यों को करने का विधान माना जाता है। अमावस्या को पितरों के निमित्त पिंडदान और तर्पण किया जाता है। मान्यता है कि भौमवती अमावस्या के दिन पितरों के निमित पिंडदान और तर्पण करने से पितर देवताओं का आशीष मिलता है।

भौमवती अमावस्या के दिन स्नान, दान करने का विशेष महत्व होता है। भौमवती अमावस्या के दिन दान करने का सर्वश्रेष्ठ फल प्राप्त होता है। देव ऋषि व्यास के अनुसार इस तिथि में स्नान-ध्यान करने से सहस्त्र गौ दान के समान पुन्य फल प्राप्त होता है। इस के अतिरिक्त इस दिन पीपल की परिक्रमा कर, पीपल के पेड और श्री विष्णु का पूजन करने का नियम है। इस दिन दान-दक्षिणा देना भी शुभ होता है।

भौमवती अमावस्या पर हजारों की संख्या में हरिद्वार, काशी जैसे तीर्थ स्थलों और पवित्र नदियों पर स्नान करने का विशेष महत्व होता है।

ये है भौमवती अमावस्या का महत्व

भौमवती अमावस्या तिथि के दिन विशेष रुप से पितरों के लिये किए जाने वाले कार्य किये जाते है। इस दिन पितरों के लिये व्रत और अन्य कार्य करने से पितरों की आत्मा को शान्ति प्राप्त होती है।

शास्त्रों में में अमावस्या तिथि का स्वामी पितृदेव को माना जाता है इसलिए इस दिन पितरों की तृप्ति के लिए तर्पण, दान-पुण्य का महत्व है। जब अमावस्या के दिन सोम, मंगलवार और गुरुवार के साथ जब अनुराधा, विशाखा और स्वाति नक्षत्र का योग बनता है, तो यह बहुत पवित्र योग माना गया है. इसी तरह शनिवार, और चतुर्दशी का योग भी विशेष फल देने वाला माना जाता है।

ऎसे योग होने पर अमावस्या के दिन तीर्थस्नान, जप, तप और व्रत के पुण्य से ऋण या कर्ज और पापों से मिली पीड़ाओं से छुटकारा मिलता है इसलिए यह संयम, साधना और तप के लिए श्रेष्ठ दिन माना जाता है।

पुराणों में अमावस्या को कुछ विशेष व्रतों के विधान है जिससे तन, मन और धन के कष्टों से मुक्ति मिलती है।

भौमवती अमावस्या पर दान-पुण्य का महत्व 

इस बार मार्गशीर्ष मास में 26 नवंबर, मंगलवार के दिन भौमवती अमावस्या आ रही है। हिन्दू पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष / अगहन माह की अमावस्या का विशेष महत्व माना गया है। यह अमावस्या मंगलवार को यानी भौमवती अमावस्या है इसलिए इसका महत्व बढ़ गया है।

इस दिन दान और पूर्वजों की आत्मा शांति के लिए गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है। शास्त्रों के अनुसार इस अमावस्या पर पितरों की शांति के लिए किए गए कार्य शुभ माने जाते हैं। इस दिन दान करना अतिशुभ माना जाता है।

वहीं जब दान राशि अनुसार किये जाते हैं तो उनका महत्व कई गुना बढ़ जाता है।

तो आइये जानते हैं इस भौमवती अमावस्या को राशि अनुसार क्या कुछ दान किया जाना आपके लिए शुभ हो सकता है ...

मेष- इस राशि के जातक के लिए चादर एवं तिल का करना शुभ होगा। ऐसा करने से शीघ्र ही इनकी हर मनोकामना पूरी हो सकती है।

वृषभ- इस राशि के जातक वस्त्र एवं तिल का दान करेंगे तो शुभ रहेगा।

मिथुन- चादर एवं छाते का दान करें तो बहुत लाभदायक सिद्ध होगा।

कर्क- साबूदाना एवं वस्त्र का दान करना शुभ फल प्रदान करने वाला रहेगा।

सिंह- कंबल एवं चादर का दान अपनी क्षमतानुसार करें।

कन्या- तेल तथा उड़द दाल का दान करें।

तुला- रुई, वस्त्र, राई, सूती वस्त्रों के साथ ही चादर आदि का दान करें।

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वृश्चिक- खिचड़ी का दान करें साथ ही अपनी क्षमता के अनुसार कंबल का दान भी शुभ फलदायी सिद्ध होगा।

धनु- चने की दाल का दान करें तो विशेष लाभ होने की संभावना बनती है।

मकर- कंबल और पुस्तक का दान करें तो हर मनोकामना पूरी हो सकती है।

कुंभ- साबुन, वस्त्र, कंघी व अन्न का दान करें।

मीन- साबूदाना, कंबल सूती वस्त्र तथा चादर का दान करें।

मार्गशीर्ष महीने को काफी पवित्र माना जाता है। अत: मार्गशीर्ष अमावस्या जो इस बार मंगलवार को आने से भौमवती अमावस्या भी हो गई है, इस दिन राशि के अनुसार दान करना आपके लिए मंगलकारी रहेगा।

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