मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को काल भैरव अष्टमी मनाई जाती है। माना जाता है कि भगवान शिव ने ही काल भैरव के रूप में इस दिन अवतार लिया था। इसीलिए काल भैरव अष्टमी पर भैरव बाबा की विशेष पूजा की जाती है।

काल भैरव की पूजा में कई बातों पर विशेष ध्यान दिया जाना जरूरी होता है वरना पूजा का फल नहीं मिलता। वहीं इस बार काल भैरव अष्टमी 19 नवंबर मंगलवार को है।

आइये जानते हैं खास बातें जो काल भैरव की पूजा में ध्यान रखनी चाहिए ...

- काल भैरव को भगवान शिव का ही रूप माना जाता है। वहीं यह भी माना जाता है कि भैरव अवतार प्रदोष काल यानी दिन-रात के मिलन की घड़ी में हुआ था। इसीलिए भैरव पूजा शाम और रात के समय करना ज्यादा शुभ माना गया है।

- काल भैरव अष्टमी पर स्नान के बाद किसी भैरव मंदिर जाएं। सिंदूर, सुगंधित तेल से भैरव भगवान का श्रृंगार करें। लाल चंदन, चावल, गुलाब के फूल, जनेऊ, नारियल अर्पित करें। तिल-गुड़ या गुड़-चने का भोग लगाएं।

- सुगंधित धूप बत्ती और सरसों के तेल का दीपक जलाएं। इसके बाद भैरव मंत्र का जाप करें।

धर्मध्वजं शङ्कररूपमेकं शरण्यमित्थं भुवनेषु सिद्धम्।

द्विजेन्द्र पूज्यं विमलं त्रिनेत्रं श्री भैरवं तं शरणं प्रपद्ये।।

इस दिन आप भैरव गायत्री मंत्र का जाप भी कर सकते हैं...

ऊँ शिवगणाय विद्महे। गौरीसुताय धीमहि।

तन्नो भैरव प्रचोदयात।।

मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करें, इसके बाद भैरव भगवान के सामने धूप, दीप और कर्पूर जलाएं, आरती करें, प्रसाद ग्रहण करें।

काल भैरव अष्टमी का महत्व 
काल भैरव अष्टमी का महत्व 

-भैरव भगवान के वाहन कुत्तों को प्रसाद और रोटी खिलाएं।

- रुद्राक्ष शिवजी का स्वरूप है इसलिए भैरव पूजा में रुद्राक्ष की माला पहनना चाहिए। रुद्राक्ष की माला से भैरव मंत्रों का जाप करना चाहिए।

- भैरव पूजा में ऊँ भैरवाय नम: बोलते हुए चंदन, चावल, फूल, सुपारी, दक्षिणा, नैवेद्य लगाकर धूप-दीप जलाएं।

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- भैरव भगवान के साथ ही शिवजी और माता-पार्वती की भी पूजा जरूर करें। इस दिन अधार्मिक कामों से बचना चाहिए।

शिवजी को आनंद स्वरूप में शंभु, विकराल स्वरूप में उग्र और सत्व स्वरूप में सात्विक भी पुकारा जाता है। शिवजी के ये त्रिगुण स्वरूप भैरव अवतार में भी देखे जाते हैं। शिवजी प्रदोषकाल में भैरव रूप में प्रकट हुए थे।

वहीं शास्त्रों में अष्ट भैरव से लेकर 64 भैरव के स्वरूप बताए गए हैं। यहां जानिए शिवजी के रज, तम और सत्व गुणों के आधार पर भैरव के स्वरूप कौन-कौन से हैं और किस मनोकामना के लिए कौन से स्वरूप की पूजा की जाती है...

काल भैरव की पूजा का महत्व 
काल भैरव की पूजा का महत्व 

बटुक भैरव

यह भैरव का सात्विक और बाल स्वरूप है। जो लोग सभी सुख, लंबी आयु, निरोगी जीवन, पद, प्रतिष्ठा और मुक्ति पाना चाहते हैं, वे बटुक भैरव की पूजा कर सकते हैं।

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काल भैरव

यह भैरव का तामसिक स्वरूप है, लेकिन कल्याणकारी है। इस स्वरूप को काल का नियंत्रक माना गया है। इनकी पूजा अज्ञात भय, संकट, दुख और शत्रुओं से मुक्ति देने वाली मानी गई है।

आनंद भैरव

यह भैरव का राजस यानी रज स्वरूप माना गया है। दस महाविद्या के अंतर्गत हर शक्ति के साथ भैरव की भी पूजा की जाती है। इनकी पूजा से धन, धर्म की सिद्धियां मिल सकती हैं।