मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को काल भैरव अष्टमी मनाई जाती है। माना जाता है कि इसी दिन भगवान शिव से काल भैरव का प्राकट्य हुआ था इस बार काल भैरव अष्टमी 19 नवंबर मंगलवार को मनाई जाएगी। इस दिन विशेष रूप से भैरव बाबा की पूजा की जाती है, उन्हें प्रसन्न करने के लिए खास उपाय किये जाते हैं।

माना जाता है कि भैरव बाबा की पूजा से संकट व शत्रु ही नहीं बल्कि भूत-पिशाच से जुड़ी बाधा व काल भी दूर हो जाते हैं और भक्त को किसी से भय नहीं रहता।

यूं तो भगवान भैरवनाथ को खुश करना बेहद आसान है लेकिन अगर वे रूठ जाएं तो मनाना बेहद मुश्किल। इसीलिए इस दिन कुछ खास उपाय कर लें जिससे कि भैरव बाबा प्रसन्न होकर आपके सारे दुख दूर कर दे।

ये है वो खास उपाय जिन्हें करने से प्रसन्न होंगे भैरव बाबा और देंगे सुख-समृद्धि का वरदान ....

- यह उपाय काल भैरव अष्टमी के साथ ही किसी भी रविवार, बुधवार या गुरुवार को किया जा सकता है। इस दिन एक रोटी लें। इस रोटी पर अपनी तर्जनी और मध्यमा अंगुली से तेल में डुबोकर लाइन खींचें। यह रोटी किसी भी दो रंग वाले कुत्ते को खाने को दे दें।

अगर कुत्ता यह रोटी खा ले तो समझिए आपको भैरव बाबा का आशीर्वाद मिल गया। अगर कुत्ता रोटी सूंघ कर आगे बढ़ जाए तो इस क्रम को जारी रखें लेकिन सिर्फ हफ्ते के इन्हीं तीन दिनों में (रविवार, बुधवार या गुरुवार)। यही तीन दिन भैरव बाबा के माने गए हैं।

काल भैरव की पूजा में भूलकर भी न करें ये गलतियां 
काल भैरव की पूजा में भूलकर भी न करें ये गलतियां 

- उड़द के पकौड़े शनिवार की रात को कड़वे तेल में बनाएं और रात भर उन्हें ढंककर रखें। सुबह जल्दी उठकर प्रात: 6 से 7 के बीच बिना किसी से कुछ बोलें घर से निकलें और रास्ते में मिलने वाले पहले कुत्ते को खिलाएं।

याद रखें पकौड़े डालने के बाद कुत्ते को पलटकर ना देखें। यह प्रयोग सिर्फ रविवार के लिए हैं।

- शनिवार के दिन शहर के किसी भी ऐसे भैरवनाथ जी का मंदिर खोजें जिन्हें लोगों ने पूजना लगभग छोड़ दिया हो। रविवार की सुबह सिंदूर, तेल, नारियल, पुए और जलेबी लेकर पहुंच जाएं।

मन लगाकर उनका पूजन करें। बाद में 5 से लेकर 7 साल तक के बटुकों यानी लड़कों को चने-चिरौंजी का प्रसाद बांट दें। साथ लाए जलेबी, नारियल, पुए आदि भी उन्हें बांटें। याद रखिए कि अपूज्य भैरव की पूजा से भैरवनाथ विशेष प्रसन्न होते हैं।

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जानें कब है भैरव अष्टमी, कैसे करें पूजा और इनकी उपासना से होते हैं क्या लाभ

- हर गुरुवार के दिन कुत्ते को गुड़ खिलाएं।

-सवा किलो जलेबी बुधवार के दिन भैरव नाथ को चढ़ाएं और कुत्तों को खिलाएं।

-शनिवार के दिन कड़वे तेल में पापड़, पकौड़े, पुए जैसे विविध पकवान तलें और रविवार को गरीब बस्ती में जाकर बांट दें।

- रविवार या शुक्रवार को किसी भी भैरव मं‍दिर में गुलाब, चंदन और गुगल की खुशबूदार 33 अगरबत्ती जलाएं।

- पांच नींबू, पांच गुरुवार तक भैरव जी को चढ़ाएं।

काल भैरव की पूजा में करें ये खास उपाय 
काल भैरव की पूजा में करें ये खास उपाय 

- सवा सौ ग्राम काले तिल, सवा सौ ग्राम काले उड़द, सवा 11 रुपए, सवा मीटर काले कपड़े में पोटली बनाकर भैरव नाथ के मंदिर में बुधवार के दिन चढ़ाएं।

काल भैरव अष्टमी पर भूलकर भी न करें ये गलतियां ...

-काल भैरव जयंती यानी काल भैरव अष्टमी के दिन झूठ बोलने से बचें, झूठ बोलने से नुकसान आपको ही होगा।

- काल भैरव अष्टमी के दिन अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए व्रत के दौरान आप फलाहार कर सकते हैं।

- कालभैरव की पूजा कभी भी किसी के नाश के लिए न करें।

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हर संकट से मुक्ति दिलाते हैं भैरव बाबा, शुभ मुहूर्त में पूजा करें और मनोवांछित फल पाएं

-आमतौर पर बटुक भैरव की ही पूजा करनी चाहिए क्योंकि यह सौम्य पूजा है।

- इस दिन नमक न खाएं। नमक की कमी महसूस होने पर सेंधा नमक खा सकते हैं।

- माता-पिता और गुरु का अपमान न करें।

- बिना भगवान शिव और माता पार्वती के काल भैरव पूजा नहीं करना चाहिए।

- गृहस्थ लोगों को भगवान भैरव की तामसिक पूजा नहीं करना चाहिए।

- सबसे पहली बात तो यह है कि इस दिन घर में गंदगी बिलकुल न करें। घर की साफ-सफाई करें। इसके बाद ही पूजा करें वरना शुभ फल नहीं मिलेगा।