सबरीमाला मंदिर में पूजे जाते हैं भगवान अय्यप्पा, ये है इनसे जुड़ी खास मान्यताएं 

सबरीमाला में पूजे जाते हैं भगवान अय्यप्पा  - Sakshi Samachar

भारत के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है सबरीमाला मंदिर जहां भगवान अय्यप्पा की पूजा होती है। 8 पहाड़ियों के बीच में बसा यह मंदिर केरल में स्थित है और करोड़ों हिंदुओं की आस्था का प्रतीक है।

यहां लाखों की तादाद में भक्तजन पहुंचकर भगवान अय्यप्पा के दर्शन करते हैं। ज्ञात हो कि भगवान अय्यप्पा की पूजा के नियम कड़े होते हैं और भक्तजन इन नियमों का अनुसरण करते हुए लगभग चालीस दिनों की तपस्या भी करते हैं।

भगवान अय्यप्पा 

वहीं भगवान अय्यप्पा के सबरीमाला मंदिर से जुड़ी कई मान्यताएं खास है आइये जानते हैं इन मान्यताओं के बारे में ....

- इस मंदिर से जुड़ी खास मान्यता यह है कि मकर संक्रांति की रात्रि में सबरीमाला मंदिर के पास के घने अंधेरे में एक ज्योति दिखाई देती है। इस ज्योति के दर्शन मात्र के लिए करोड़ों श्रद्धालु हर साल यहां आते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस देव ज्योति को भगवान प्रज्वलित करते हैं।

मकर संक्रांति पर होते हैं मकर ज्योति के दर्शन 

-धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्री अय्यप्पा ब्रह्मचारी थे, इस वजह से यहां पर 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर रोक है। छोटी बच्चियां जिनका मासिक धर्म शुरू नहीं हुआ हो, या ऐसी औरतें जो मासिक धर्म से मुक्त हो चुकी हैं, उनके प्रवेश पर किसी तरह की कोई रोक नहीं है। वहीं महिलाओं के प्रवेश पर सुप्रीम कोर्ट में मामला चल रहा है।

-धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्री अय्यप्पा को भगवान विष्णु और शिव का पुत्र कहा जाता है।

भगवान विष्णु व शिव के पुत्र माने जाते हैं अय्यप्पा 

-यहां दर्शन करने वाले भक्त दो महीने पहले से ही मांस-मछली का सेवन करना छोड़ देते हैं। चालीस दिनों की खास तपस्या के बाद ही वे भगवान अय्यप्पा के दर्शनों के लिए आते हैं।

सबरीमाला मंदिर में भगवान अय्यप्पा की होती है पूजा 

-धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भक्त तुलसी या फिर रुद्राक्ष की माला धारण कर और व्रत रखकर यहां दर्शन करें तो उनकी सभी मनोकामना पूरी हो जाती हैं।

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