चमकाना है भाग्य तो मार्गशीर्ष मास में करें ये काम, भूलकर भी न करें ये गलतियां  

मार्गशीर्ष मास का महत्व  - Sakshi Samachar

कार्तिक के समाप्त होते ही मार्गशीर्ष मास जिसे अगहन भी कहा जाता है शुरू हो चुका है। मार्गशीर्ष मास को भगवान श्री कृष्ण का प्रिय मास भी कहा जाता है इसीलिए इसका बड़ा महत्व है। इतना ही नहीं मार्गशीर्ष को भगवान श्रीकृष्ण का स्वरूप भी कहा गया है।

इस मास में तीर्थ स्थान या फिर किसी नदी, कुंड या तालाब में स्नान करने का विशेष महत्व है और माना जाता है कि इससे पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही यह भी माना जाता है कि अगर मार्गशीर्ष मास में कुछ बातों का ध्यान रखा जाए और कुछ खास नियम अपनाकर उपाय किये जाए तो भाग्य चमक सकता है।

तो आइये यहां जानते हैं कि आखिर मार्गशीर्ष मास में क्या कुछ करना चाहिए ...

- मार्गशीर्ष मास में यदि आप ओम दामोदराय नमः मंत्र के उच्चारण के साथ अपने गुरु को प्रणाम करते हैं तो आपकी प्रगति में आने वाले अवरोध स्वत: ही खत्म हो जाएंगे।

- मार्गशीर्ष मास भगवान श्रीकृष्ण को प्रिय है, ऐसे में लोगों को विष्णुसहस्त्र नाम, भगवत गीता और गजेन्द्रमोक्ष का पाठ करना चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

भगवान श्री कृष्ण का प्रिय महीना है मार्गशीर्ष 

- मार्गशीर्ष मास में शंख की पूजा की जाती है। पूजा के समय शंख में पवित्र जल भरें और उसे भगवान के चारों ओर घुमाएं। शंख के जल को घर में छिड़कने से शांति आती है। आपसी मनमुटाव खत्म होता है। इस मास में साधारण शंख की पूजा भी पंचजन्य शंख की पूजा के समान फल देती है।

- मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन चंद्र देव की आराधना करनी चाहिए। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन ही चंद्र देव को औषधीय गुण प्राप्त हुए थे।

- मार्गशीर्ष मास में व्यक्ति को संभव हो तो यमुना में स्नान करें या फिर किसी नदी या सरोवर में स्नान करें और भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करें। ऐसा करने से श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है, मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

- मार्गशीर्ष मास में प्रतिदिन स्नान के बाद भगवान श्रीकृष्ण की पूजा आराधना करें, संध्या के समय भजन कीर्तन भी विशेष फलदायी होता है।

- मार्गशीर्ष मास में पूजा के समय भगवान विष्णु के मंत्र ओम नमो भगवते वासुदेवाय का जाप करना चाहिए।

- मार्गशीर्ष मास में में पूजा के दौरान भगवान विष्णु को तुलसी का पत्र जरूर अर्पित करें। उसे प्रसाद स्वरूप स्वयं ग्रहण करें और परिजनों को भी दें।

- मार्गशीर्ष मास में अन्न का दान करना सर्वश्रेष्ठ पुण्य कर्म माना गया है। ऐसा करने पर हमारे सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। साथ ही सभी कामनाएं पूरी हो जाती हैं।

- इस माह में नियमपूर्वक रहने से अच्छा स्वास्थ्य तो मिलता ही है, साथ में धार्मिक लाभ भी मिलता है।

शंख पूजा का महत्व

हम जानते ही हैं कि सभी वैदिक कामों में शंख का विशेष स्थान है। शंख का जल सभी को पवित्र करने वाला माना गया है, इसी वजह से आरती के बाद श्रद्धालुओं पर शंख से जल छिड़का जाता है।

साथ ही शंख को लक्ष्मी का भी प्रतीक माना जाता है, इसकी पूजा महालक्ष्मी को प्रसन्न करने वाली होती है। इसी वजह से जो व्यक्ति नियमित रूप से शंख की पूजा करता है, उसके घर में कभी धन की कमी नहीं रहती।

मार्गशीर्ष में जरूर करें शंख पूजा 

ऐसा माना जाता है समुद्र मंथन के समय शंख भी प्रकट हुआ था। विष्णु पुराण में बताया गया है कि देवी महालक्ष्मी समुद्र की पुत्री है और शंख को लक्ष्मी का भाई माना गया है। इन्हीं कारणों से शंख की पूजा भक्तों को सभी सुख देने वाली गई है।

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श्री कृष्ण की कृपा पाने के लिए करें नदी स्नान

इस महीने में नदी स्नान की बड़ी महिमा कही गई है। शास्त्रों के अनुसार, जब गोकुल में असंख्य गोपियों ने श्रीहरि को प्राप्त करने के लिए ध्यान लगाया तब श्रीकृष्ण ने अगहन महीने में विधिपूर्वक नदी स्नान की सलाह दी। इसमें नियमित विधिपूर्वक प्रात: स्नान करने और इष्टदेव को प्रणाम करने की भी बात कही गई है।

मार्गशीर्ष में नदी स्नान के लिए तुलसी की जड़ की मिट्टी व तुलसी के पत्तों से स्नान करना चाहिए। स्नान के समय ऊं नमो नारायणाय या गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए।

मार्गशीर्ष में नदी स्नान का महत्व 

मार्गशीर्ष में न करें ये काम

- इस पूरे महीने में जीरे का सेवन नहीं करना चाहिए।

- भगवान की भक्ति में ध्यान लगाएं व किसी को बुरा-भला न कहें।

- इस महीने देर तक सोने की गलती न करें बल्कि सुबह-सवेरे ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर लें।

-दिन में सोने की गलती भी न करें।

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