कार्तिक माह में स्नान-दान के साथ ही तुलसी पूजा का महत्व होता है। कई लोग कार्तिक का पूरा महीना स्नान करके अंत में एकादशी या फिर पूर्णिमा के दिन तुलसी विवाह करते हैं। तुलसी माता का विवाह शालिग्राम के साथ किया जाता है।

भगवान विष्णु का ही विग्रह रूप है शालिग्राम जैसे कि भगवान शिवजी का शिवलिंग। शालिग्राम को जाग्रत माना जाता है। तुलसी के साथ तो शालिग्राम की पूजा होती ही है।

यहां सवाल यह उठता है कि भगवान विष्णु शालिग्राम कैसे बन गए तो यहां वृंदा की कहानी कही व सुनी जाती है कि कैसे भगवान विष्णु ने वृंदा के पति जालंधर को मारने के लिए पतिव्रता वृंदा का पातिव्रत्य धर्म भंग किया और फिर कैसे वृंदा ने विष्णु को पत्थर बनने का श्राप दिया।

बाद में माता लक्ष्मी के कहने पर वृंदा ने विष्णु को अपने स्वरूप में ला दिया और वह खुद अपने पति के साथ सती हो गई। इधर भगवान विष्णु को भी अपने किये पर पछतावा हुआ और उन्होंने वृंदा को वरदान दिया कि वह पूजी जाएगी और जो भी उसका विवाह उनके शालिग्राम के साथ करेंगे उसके सारे कष्ट दूर हो जाएंगे और उसे सुख संपत्ति का वरदान मिलेगा।

जिस जगह वृंदा सती हुई थी वहीं उसकी राख से तुलसी का पौधा जन्मा और उसकी पूजा का विधान बन गया। तुलसी पूजा में शालिग्राम को रखा जाता है। वहीं कई लोग तो अपने घर में भी शालिग्राम को स्थापित करके उनकी पूजा करते हैं, तुलसी पत्र चढ़ाते हैं।

तुलसी पूजा में शालिग्राम का महत्व 
तुलसी पूजा में शालिग्राम का महत्व 

मान्यता है कि घर में भगवान शालिग्राम हो, वह तीर्थ के समान माना जाता है। स्कंदपुराण के कार्तिक महात्म्य में शिवजी ने भी शालिग्राम की स्तुति की है।

साथ ही यह भी माना जाता है कि शालिग्राम को घर में रखने के कई चमत्कारिक लाभ हैं। जिस घर में शालिग्राम का पूजन होता है उस घर में लक्ष्मी का सदैव वास रहता है।

शालिग्राम पूजन करने से अगले-पिछले सभी जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति हर ओर से सुखी रहता है। यहां यह जानना भी जरूरी है कि शालिग्राम पूजन में कई महत्वपूर्ण नियमों का पालन करना जरूरी होता है वरना वह बर्बाद भी हो सकता है।

भगवान विष्णु का विग्रह स्वरूप है शालिग्राम 
भगवान विष्णु का विग्रह स्वरूप है शालिग्राम 

- शालिग्राम वैष्णव धर्म का सबसे बड़ा विग्रह है। शालिग्राम सात्विकता के प्रतीक हैं। उनके पूजन में आचार-विचार की शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है। यदि आप मांस या मदिरा का सेवन करते हैं तो यह आपके लिए घातक सिद्ध हो सकता है।

- कहते हैं कि कुछ समय को छोड़कर शालिग्राम की प्रतिदिन पूजा करना जरूरी है। ऐसे समय है रोग, यात्रा या रजोदर्शन आदि।

- घर में सिर्फ एक ही असली शालिग्राम रखना चाहिए। कई घरों में कई शालिग्राम होते हैं जो उचित नहीं है।

- शालिग्राम को प्रतिदिन पंचामृत से स्नान कराया जाता है।

पूरे विधि-विधान से होती है शालिग्राम की पूजा 
पूरे विधि-विधान से होती है शालिग्राम की पूजा 

- शालिग्राम पर चंदन लगाकर उसके ऊपर तुलसी का एक पत्ता रखा जाता है। चंदन भी असली होना चाहिए। जैसे चंदन की एक लकड़ी को लाकर उसे शिला पर घिसे और फिर शालिग्रामजी को चंदन लगाएं।

जानें आखिर व्यक्ति क्यों हो जाता है बर्बाद

बहुत से विद्वान मानते हैं कि शालिग्राम का पत्थर ब्रह्मांडीय ऊर्जा का एक स्रोत है। मतलब यह कि यह एक छोटी-सी गैलेक्सी की तरह है। इसमें अपार एनर्जी होती है। इसका प्रभाव घर के आसपास तक रहता है।

शालिग्राम को घर में रखने से पहले जानें ये नियम 
शालिग्राम को घर में रखने से पहले जानें ये नियम 

एनर्जी के इस स्रोत को पवित्र और सकारात्मक बनाए रखना जरूरी है, लेकिन यदि आप इसे किसी भी प्रकार से दूषित करते हैं तो निश्‍चित ही आपके घर में गृहकलह और घटना-दुर्घटनाएं बढ़ जाएंगी।

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अच्छी-भली जिंदगी बर्बादी के रास्ते पर चली आएगी। यदि आप खुद को मांस, मदिरा, गाली-गलोच, स्त्री अपमान आदि जैसी बुराईयो से दूर नहीं रखते हैं और उपरोक्त पांच नियमों का पालन नहीं करते हैं तो आपको शालिग्राम को भी घर में नहीं लाना चाहिए। अमृत और जहर एक ही बोतल में नहीं भरे जा सकते।