Kartik Purnima 2019: भगवान विष्णु ने इसी दिन लिया था मत्स्य अवतार, ये है इससे जुड़ी कथा   

कार्तिक पूर्णिमा पर भगवान विष्णु ने लिया था मत्स्य अवतार  - Sakshi Samachar

कार्तिक पूर्णिमा का हिंदू धर्म में बहुत महत्व है। इस दिन तीर्थ स्थान में स्नान व दान किया जाता है और माना जाता है कि इससे शुभ फल प्राप्त होता है। इस बार कार्तिक पूर्णिमा 12 नवंबर मंगलवार को है।

पौराणिक मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का अंत किया था और इसी खुशी में देवताओं ने दीप जलाए व दीप दान किया जिसकी वजह से इसे देव दीपावली कहते हैं और उत्तर भारत जैसे कि काशी में इसे धूमधाम से मनाया भी जाता है।

दूसरी ओर कार्तिक पूर्णिमा को ही गुरु नानक जयंती यानी गुरु पर्व भी मनाया जाता है वहीं इस दिन भगवान विष्णु ने पहला अवतार, मत्स्य अवतार भी लिया था जिससे इस दिन का महत्व बढ़ जाता है।

आइये जानते हैं आखिर क्यों लेना पड़ा भगवान विष्णु को मत्स्य अवतार ....

ये है इससे जुड़ी पौराणिक कथा

पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, मत्स्य अवतार को भगवान विष्णु का पहला अवतार माना जाता है। इस अवतार में विष्णु जी मछली के रूप में प्रकट हुए थे।दरअसल एक राक्षस ने जब वेदों को चुराकर समुद्र की गहराई में छुपा दिया था, तब वेदों की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया था।

मत्स्य अवतार का महत्व 

उनके इस अवतार से एक और कथा जुड़ी हुई है जिसके अनुसार संखासुर नामक राक्षस ने त्रिलोक पर अपना आधिपत्य जमा लिया था, जिसके बाद मदद मांगने के लिए सभी देवतागण भगवान विष्णु के पास पहुंचे।

देवताओं को उनका वैभव लौटाने और संखासुर का वध करने के लिए उन्होंने मत्स्य अवतार लेने का फैसला किया। संखासुर को पता चला कि देवताओं ने भगवान विष्णु से मदद मांगी है तो संखासुर देवताओं के शक्ति के स्रोत वेद स्रोतों के हरण का प्रयास करता है।

कार्तिक पूर्णिमा का महत्व 

इसके बाद उसने खुद को बचाने के लिए समुद्र में प्रवेश किया, लेकिन भगवान विष्णु के तेज से वो नहीं बच सका और भगवान विष्णु ने अपने दिव्य नेत्रों से संखासुर का पता लगा लिया। उन्होंने मत्स्य अवतार लेकर संखासुर का वध किया और वेद मंत्रों की रक्षा करते हुए देवताओं को उनका वैभव वापस लौटाया।

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इस तरह भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लेकर वेद स्रोत को बचाया और धर्म की रक्षा की, इसलिए इस दिन का महत्व और बढ़ जाता है।

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