हम जानते ही हैं कि देवउठनी एकादशी का बड़ा महत्व है क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु चार माह के बाद योग निद्रा से जागते हैं। इसी दिन तुलसी विवाह भी किया जाता है जिसके साथ ही शुभ कार्य आरंभ हो जाते हैं।

इस बार देवउठनी एकादशी 8 नवंबर शुक्रवार को है और इसी दिन तुलसी विवाह भी संपन्न होगा। तुलसी माता का विवाह शालिग्राम के साथ किया जाता है।

कई लोग अपने घर में तुलसी विवाह का आयोजन करते हैं। जो लोग सालों से ये विधि निभाते आ रहे हैं वे तो जानते हैं कि तुलसी विवाह में क्या कुछ चाहिए पर कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जो पहली बार इसका आयोजन कर रहे हैं। वे नहीं जानते कि तुलसी विवाह में क्या कुछ चाहिए।

तो आइये हम यहां आपको बताते हैं कि तुलसी विवाह की पूजा सामग्री। जिससे कि आप पहले से लाकर सब कुछ रख सकें और आपको ऐन वक्त पर कहीं कोई कमी न दिखे ...

तुलसी विवाह की पूजन सामग्री-

फल, फूल, धूप, दीप, भोग, हल्दी, कुमकुम, तिल, हल्दी की गांठ, बताशा, दिये, तुलसी जी, विष्णु जी का चित्र, शालिग्राम, गणेश जी की प्रतिमा या फोटो पीला कपड़ा, कोई सुंदर रूमाल, श्रृंगार का सामान, कपूर, घी का दीपक, आंवला, चने की भाजी, सिंघाड़ा हवन सामग्री इत्यादि.

इन चीजों के अलावा तुलसी विवाह में वे सभी चीजें प्रयुक्त होती हैं जो विवाह कराने में जरूरी होती हैं। तुलसी विवाह के लिए पारंपरिक तौर पर मंडप सजाना चाहिए।

तुलसी विवाह की पूजा सामग्री 
तुलसी विवाह की पूजा सामग्री 

गन्ने का प्रयोग करके तुलसी विवाह के लिए मंडप सजाएं। तुलसी विवाह में लाल चुनरी का प्रयोग होना चाहिए। तुलसी विवाह में सुहाग की सारी सामग्री के साथ लाल चुनरी जरूर चढ़ाएं।

तुलसी विवाह में शालिग्राम और तुलसी दोनों के विवाह की पूरी सामग्री रखें। इसमें सुहाग का सामान और वर-वधू के लिए आवश्यक वस्तुएं शामिल करें।

पूरे विधि-विधान से किया जाता है तुलसी विवाह 
पूरे विधि-विधान से किया जाता है तुलसी विवाह 

तुलसी विवाह में भगवान शालिग्राम को माता तुलसी के पास ही रखें जो कि वह दोनों वर-वधू की तरह लगें। विवाह में तुलसी और शालिग्राम पर चावल न चढ़ाएं बल्कि तिल अर्पित करें। ये शुभ होगा।

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विवाह के दौरान तुलसी और शालिग्राम की दूध में भीगी हल्दी के साथ पूजा करें। तुलसी विवाह के बाद शाम को तुलसी के पौधे को घर के आंगन में रख दें। तुलसी विवाह के बाद प्रार्थना अवश्य करें।