Tulsi Vivah 2019: जानें तुलसी के होते हैं कितने प्रकार और किस तुलसी से कराया जाए शालिग्राम का विवाह  

तुलसी विवाह का महत्व  - Sakshi Samachar

देवउठनी एकादशी की तिथि बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु चार माह की योग निद्रा के बाद जागते हैं। इसी दिन तुलसी विवाह भी संपन्न होता है। इस बार देवउठनी एकादशी 8 नवंबर शुक्रवार को है और इसी दिन तुलसी विवाह किया जाएगा।

यहां सहज ही यह सवाल उठता है कि आखिर तुलसी कितने प्रकार की होती है और किस तुलसी का विवाह शालिग्राम से कराया जाना चाहिए।

पूरे विधि-विधान से होता है तुलसी विवाह 

तो आइये यहां जानते हैं इन सवालों के जवाब ...

तो इतने प्रकार की होती है तुलसी

तुलसी के पौधे में अनेकों गुण पाए जाते हैं। तुलसी न केवल धार्मिक रूप से बल्कि वैज्ञानिक रूप से भी बहुत गुणकारी मानी जाती है क्योंकि तुलसी में अनेकों औषधीय गुण पाए जाते हैं।

पृथ्वी पर पांच तरह की तुलसी पाई जाती है। जिसमें राम तुलसी, श्याम तुलसी, श्वेत विष्णु तुलसी, वन तुलसी, नींबू तुलसी शामिल है। लेकिन घरों में मुख्य रूप से राम तुलसी या श्याम तुलसी ही रखी जाती है।

शास्त्रों के अनुसार देवउठनी एकादशी पर तुलसी विवाह को सबसे ज्यादा शुभ माना जाता है। तुलसी विवाह से न केवल शुभफलों की प्राप्ति होती है बल्कि कन्यादान जैसे शुभ फलों की प्राप्ति भी होती है।

घर में मुख्य रूप से राम तुलसी और श्याम तुलसी ही रखी जाती है। अन्य तुलसियों को घर में रखना शास्त्रों के अनुसार उचित नहीं माना जाता।

तो इसलिए राम तुलसी से किया जाता है शालिग्राम का विवाह

हल्के हरे रंग के पत्ते और भूरी छोटी मंजरी व पत्तियों वाली तुलसी को राम तुलसी कहा जाता है। इस तुलसी की टहनियां सफेद रंग की होती है। इसकी शाखांए भी श्वेतार्क वर्ण लिए होती है। इसकी गंध और तीक्ष्णता कम होती है।

राम तुलसी का प्रयोग कई त्वचा संबंधी औषधियों के रूप में किया जाता है। श्याम तुलसी से ज्यादा राम तुलसी का पौधा घर में अत्यधिक मिलता है। इतना ही नहीं इसे धार्मिक रूप से अधिक प्रयोग किया जाता है।

राम तुलसी से होता है शालिग्राम का विवाह 

माना जाता है कि जिस समय वृंदा ने अपने शरीर का त्याग किया था तो उस समय उसकी राख से जो तुलसी का पौधा उगा था वह हल्के हरे रंग का था यानी वह पौधा राम तुलसी था। इसलिए धार्मिक रूप से राम तुलसी का अधिक प्रयोग किया जाता है।

इतना ही नहीं देवउठनी एकादशी पर शालिग्राम का विवाह जिस तुलसी से कराया जाता है वह राम तुलसी ही होती है।

ऐसी होती है श्याम तुलसी

श्याम तुलसी राम तुलसी से ज्यादा गुणकारी होती है। श्याम तुलसी को कृष्ण तुलसी या काली तुलसी भी कहा जाता है। इसके पत्ते हल्के जामुनी या कृष्ण रंग के और इसकी मंजरी जामुनी रंग की होती है। श्याम तुलसी की शाखाएं लगभग एक से तीन फुट ऊंची और बैंगनी आभा वाली होती है।

श्याम तुलसी 

इसके पत्ते एक से दो इंच लंबे एंव अंडाकार या आयताकार आकृति के होते हैं। कृष्ण तुलसी का प्रयोग विभिन्न प्रकार के रोगों और कफ की समस्या के लिए होता है।

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घरों में मुख्य रूप से राम तुलसी और श्याम तुलसी दोनों का ही प्रयोग किया जाता है लेकिन अधिकतर घरों में श्याम तुलसी से ज्यादा राम तुलसी का प्रयोग किया जाता है।

पूजा में श्याम तुलसी को अधिक महत्व नहीं दिया जाता लेकिन लोग इसके औषधीय गुण के कारण इसे अपने घर में अवश्य रखते हैं।

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