कार्तिक मास का हिंदू धर्म में खासा महत्व है। वहीं कार्तिक पूर्णिमा को तो विशेष रूप से स्नान-दान किया जाता है, साथ ही कार्तिक पूर्णिमा पर कई नियमों का पालन भी किया जाता है। कार्तिक पूर्णिमा को डुबकी पूनम भी कहते हैं क्योंकि इस दिन तीर्थ स्थान पर पवित्र नदियों में डुबकी लगाने का भी महत्व है।

माना जाता है कि इस दिन अगर सभी नियमों का पालन किया जाए तो ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा और गंगा स्नान के नाम से भी जाना जाता है। इस पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा इसलिए कहा जाता है कि इस दिन ही भगवान शिव ने त्रिपासुर नामक राक्षस का अंत किया था।

मान्यता है कि इस दिन कृतिका में शिव शंकर के दर्शन करने से सात जन्म तक व्यक्ति ज्ञानी और धनवान होता है। इस दिन चन्द्र जब आकाश में उदित हो रहा हो उस समय शिवा, संभूति, संतति, प्रीति, अनुसूया और क्षमा इन छ: कृतिकाओं का पूजन करने से शिव जी की प्रसन्नता प्राप्त होती है।

इस दिन गंगा नदी में स्नान करने से भी पूरे वर्ष पुण्य स्नान करने का फल मिलता है। इसीलिए भक्तजन वाराणसी, हरिद्वार व प्रयागराज जाते हैं ताकि पुण्य फल प्राप्त कर सकें।

आइये यहां जानते हैं कि आखिर कार्तिक पूर्णिमा पर क्या कुछ करना चाहिए ...

- माना जाता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान अवश्य करना चाहिए, यदि आप गंगा स्नान करने नहीं जा सकते हैं तो घर में ही थोड़ा सा गंगाजल नहाने के पानी में मिलाकर स्नान करें। इससे भी गंगा स्नान का फल मिल सकता है।

- कार्तिक पूर्णिमा के दिन आपको गाय का दान, दूध का दान, केले का दान, खजूर का दान, अमरूद का दान, चावल का दान, तिल और आवंले का दान जरूर करना चाहिए।

- कार्तिक पूर्णिमा के दिन ब्राह्मण, बहन और बुआ को अपनी श्रद्धा के अनुसार वस्त्र और दक्षिणा जरूर दें।

- कार्तिक पूर्णिमा के दिन शाम के समय जल में कच्चा दूध मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य जरूर दें।

- कार्तिक पूर्णिमा के दिन जल में दूध, शहद मिलाकर पीपल के वृक्ष पर जरूर चढ़ाना चाहिए और दीपक भी जलाना चाहिए क्योंकि इस दिन पीपल के पेड़ पर मां लक्ष्मी का वास माना जाता है।

- कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है, इसलिए इस दिन सत्यनारायण भगवान की कथा अवश्य सुनें।

कार्तिक पूर्णिमा पर तीर्थ स्नान का भी महत्व है 
कार्तिक पूर्णिमा पर तीर्थ स्नान का भी महत्व है 

- कार्तिक पूर्णिमा के दिन घर के मुख्य द्वार पर आम का तोरण जरूर बांधें और द्वार पर रंगोली भी अवश्य बनाएं।

- कार्तिक पूर्णिमा के दिन अगर आपके घर पर कोई भिखारी आ जाए तो उसे भोजन जरूर कराएं।

- कार्तिक पूर्णिमा के दिन दीपदान को विशेष माना जाता है इसलिए इस दिन किसी पवित्र नदी, तालाब आदि में दीप जरूर जलाएं। ऐसा करने से आपको पुण्य फलों की प्राप्ति होगी।

- कार्तिक पूर्णिमा के दिन तुलसी पूजन जरूर करें और तुलसी के पौधे के नीचे दीपक अवश्य जलाएं।

कार्तिक पूर्णिमा पर तीर्थ में भी किया जाता है दीपदान 
कार्तिक पूर्णिमा पर तीर्थ में भी किया जाता है दीपदान 

कार्तिक पूर्णिमा पर भूलकर भी न करें ये गलतियां ....

-कार्तिक पूर्णिमा के दिन तामसिक भोजन का प्रयोग बिल्कुल न करें, क्योंकि इस पूर्णिमा को अति विशेष माना जाता है।

- कार्तिक पूर्णिमा के दिन शारीरिक संबंध न बनाएं, यदि आप ऐसा करेंगे तो आपको चंद्रमा के दुष्प्रभाव का सामना करना पड़ेगा।

- कार्तिक पूर्णिमा पर घर में किसी भी प्रकार का झगड़ा बिल्कुल नहीं करना चाहिए।

- इस दिन शराब का सेवन बिल्कुल भी न करें क्योंकि शराब मनुष्य को अंहकार की ओर ले जाती है।

कार्तिक पूर्णिमा पर है दीपदान का महत्व 
कार्तिक पूर्णिमा पर है दीपदान का महत्व 

- इस दिन गरीब और मजबूर लोगों का अपमान नहीं करना चाहिए।

- इस दिन किसी जानवर को न तो सताएं और न ही उसे मारें, क्योंकि ऐसा करने से आप इस दिन पाप के भागीदार बनते हैं।

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- कार्तिक पूर्णिमा के दिन किसी भी बूढ़े-बुजु्र्ग का अपमान बिल्कुल भी न करें क्योंकि इस दिन देवता किसी भी रूप में आपके पास आ सकते हैं।

- कार्तिक पूर्णिमा के दिन तुलसी के पौधे को न तो उखाडे़ं और न ही तुलसी के पत्तों को तोड़ें।

- कार्तिक पूर्णिमा के दिन उड़द, मसूर, करेला, बैंगन और हरी सब्जियों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

- कार्तिक पूर्णिमा के दिन किसी भी देवी या देवता का बिल्कुल भी अपमान न करें। ऐसा करेंगे तो आपको उनके क्रोध का सामना करना पड़ सकता है।