कार्तिक पूर्णिमा के दिन गुरु नानक जयंती मनाई जाती है। इस बार 12 नवंबर मंगलवार को यह पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। इसकी तैयारियां जोरों से चल रही है। गुरु नानक जयंती को प्रकाश पर्व भी कहा जाता है और इस बार तो गुरु नानक जी का 550 वां प्रकाश पर्व है तो इसे विशेष रूप से मनाये जाने के लिए देश भर के गुरुद्वारों में खास तैयारियां चल रही है।

प्रकाश पर्व के अवसर पर आइये जानते हैं गुरु नानकदेव से जुड़ी ऐसी कहानियां जो उनके चमत्कार को दर्शाती है। उत्तराखंड के चम्पावत जिले के पाटी विकास खंड में लधिया और रतिया के संगम में स्थित रीठा साहिब गुरुद्वारा सिखों का प्रमुख तीर्थ स्थल है।

गुरु नानक देव के चमत्कार 
गुरु नानक देव के चमत्कार 

माना जाता है कि यहां सिखों के प्रथम गुरु नानक देव अपने शिष्य मरदाना के संग चौथी उदासी के वक्त पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने कड़वे रीठे को मिठास देकर इस स्थान को प्रमुख तीर्थ स्थल में बदल दिया था।

रीठा साहिब गुरुद्वारा जिला मुख्यालय चम्पावत से करीब 72 किमी दूर है। गुरुद्वारा प्रबंधक के अनुसार वर्ष 1501 में श्री गुरुनानक देव अपने शिष्य मरदाना के साथ रीठा साहिब आए।

रीठा साहिब गुरुद्वारा 
रीठा साहिब गुरुद्वारा 

इस दौरान उनकी मुलाकात सिद्ध मंडली के महंत गुरु गोरखनाथ के शिष्य ढेरनाथ से हुई। इस बीच गुरुनानक और ढेरनाथ के संवाद के बीच शिष्य मरदाना को भूख लगी। जब भोजन न मिला तो निराश शिष्य गुरुनानक देव के पास पहुंचा।

गुरु नानक देव ने शिष्य को सामने रीठे के पेड़ को छूकर फल खाने का आदेश दिया। रीठा कड़वा होता है यह जानकर मरदाना ने गुरु के आदेश का पालन करते हुए जैसे ही रीठे को खाया, वह मीठा हो गया।

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तबसे इस स्थान का नाम रीठा साहिब पड़ गया। यहां श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में मीठा रीठा बांटा जाता है। मई-जून में लगने वाले जोड़ मेले में सबसे ज्यादा श्रद्धालु रीठा साहिब गुरुद्वारे में पहुंचते हैं।

आस्था के इस केंद्र रीठा साहिब में श्री गुरुनानक देव के चमत्कार से कड़वा रीठा भी मीठा हो गया था। कुछ ऐसी थी गुरु नानकदेव जी की महिमा कि उनके छूने मात्र से कड़वा रीठा मीठा हो गया।