धनतेरस के साथ ही दिवाली पर भी करेंगे कुबेर की पूजा तो धन से भर जाएंगे भंडार, जानें पूजा विधि   

दिवाली पर कुबेर पूजा का महत्व  - Sakshi Samachar

धनतेरस पर तो मां लक्ष्मी के साथ कुबेर की पूजा होती ही है पर दिवाली पर ज्यादातर लोग सिर्फ लक्ष्मी के साथ गणेश की पूजा ही करते हैं। दिवाली पर कुबेर की पूजा बहुत से लोग नहीं करते पर क्या आप जानते हैं कि कुबेर की पूजा के बिना दिवाली की पूजा अधूरी मानी जाती है।

भगवान कुबेर को जहां कुछ लोग उनका सेवक मानते हैं तो कुछ खजांची, पर जो भी हो उनकी पूजा धनतेरस के साथ ही दिवाली पर भी की जानी चाहिए तभी आपके यहां धन टिकेगा।

धन के भंडार भरना चाहते हैं या फिर चाहते हैं कि आपके यहां लक्ष्मी स्थिर रूप में निवास करे तो आपको दिवाली पर मां लक्ष्मी व गणेश के साथ कुबेर की पूजा भी जरूर करनी चाहिए।

यदि आप दिवाली के दिन मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं और कुबेर जी की पूजा नहीं करते तो आपको मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त नहीं हो सकता और यदि आप दिवाली के दिन भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की पूजा के साथ कुबेर जी की पूजा करते हैं तो आपको जीवन भर कभी भी पैसों की कोई कमी नहीं सताएगी।

बेहद फलदायी होती है कुबेर की पूजा

धन के देवता कुबेर जी की पूजा के बिना धन की देवी लक्ष्मी जी की प्राप्ति नहीं की जा सकती। कुबेर माता लक्ष्मी जी के सेवक हैं और माता लक्ष्मी अपने सेवक के बिना कहीं भी भ्रमण नहीं करती।

जब आप भगवान कुबेर की पूजा करेंगे तो वह माता लक्ष्मी जी से आपके घर जाने का आग्रह करेंगे और लक्ष्मी माता अपने सेवक का आग्रह कभी नहीं टालती, इसलिए कुबेर की पूजा धनतेरस और दिवाली के दिन मुख्य रूप से की जाती है।

कुबेर की पूजा से भर जाते हैं धन के भंडार 

दिवाली के दिन भगवान कुबेर की पूजा करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। कुबेर को मां लक्ष्मी के धन का प्रतिनिधि माना जाता है इसलिए बिना कुबेर जी की पूजा के आपको मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त नहीं हो सकता।

दिवाली के अलावा कुबेर की पूजा धनतेरस के दिन भी की जाती है। जिससे घर में धन का भंडार हमेशा ही भरा रहे। भगवान कुबेर को आभूषणों का देवता भी माना जाता है। इसके अलावा अगर आप धन संबंधी परेशानियों से घिरे हुए हैं तो आप इस दिन कुबेर जी का पूजन करके धन संबंधी परेशानियों को दूर कर सकते हैं।

ऐसे करें भगवान कुबेर की पूजा

- भगवान कुबेर की पूजा धनतेरस और दिवाली के दिन की जाती है। दिवाली के दिन आपको शाम को भगवान गणेश और मां लक्ष्मी के साथ कुबेर जी की पूजा भी अवश्य करनी चाहिए।

- इसके लिए आप एक साफ चौकी लें और उस पर गंगाजल छिड़कें। इसके बाद उस पर एक लाल रंग का कपड़ा बिछाएं और उस पर भी गंगाजल छिड़कें।

लक्ष्मी के सेवक हैं कुबेर 

- इसके बाद उस चौकी पर अक्षत डालें और भगवान गणेश मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।

- प्रतिमा स्थापित करने के बाद अपने आभूषण, पैसे और सभी कीमती चीजें भगवान कुबेर के आगे रखें।

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- इसके बाद आभूषण के डिब्बे पर स्वास्तिक बनाएं या फिर स्वास्तिक बनाकर अपने सभी पैसे और आभूषण उस पर रखें।

- इसके बाद भगवान कुबेर का तिलक करें और कुबेर जी के साथ- साथ सभी आभूषण और पैसों को अक्षत अर्पित करें।

- इसके बाद भगवान कुबेर को फल और फूल, माला अर्पित करें और आभूषण और पैसों पर भी फूल अर्पित करें।

मां लक्ष्मी व गणेश के साथ करें कुबेर की पूजा 

- इसके बाद कुबेर

त्वं धनाधीश गृहे ते कमला स्थिता।

तां देवीं प्रेषयाशु त्वं मद्गृहे ते नमो नम:।।

मंत्र का जाप करें।

- मंत्र जाप के बाद भगवान कुबेर को मिठाई का भोग लगाएं।

- इसके बाद भगवान कुबेर की धूप व दीप से आरती उतारें।

- इसके बाद एक साफ गिलास में जल लेकर भगवान कुबेर को जल अर्पित करें।

- अंत में भगवान कुबेर को हाथ जोड़कर नमन करें और उनसे जाने अनजाने में हुई भूल के लिए क्षमा प्रार्थना करें और उनसे अपना आशीर्वाद सदा बनाए रखने के लिए भी प्रार्थना करें।

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