खरीदारी के लिए पुष्य नक्षत्र को शुभ माना जाता है। पुष्य नक्षत्र में खरीदारी का भी बड़ा महत्व होता है। कहते हैं कि पुष्य नक्षत्र में कुछ भी खरीदने से उसमें बढ़ोतरी होती है।

सोमवार 21 अक्टूबर को अहोई अष्टमी है और इसी दिन बन रहा है पुष्य नक्षत्र का संयोग। इसे सोम पुष्य नक्षत्र कहा जाता है। इस बार पुष्य नक्षत्र 21 अक्टूबर की शाम 5.30 से लेकर 22 अक्टूबर की शाम 4.40 तक रहेगा। तो सोम पुष्य और भौम पुष्य दोनों का संयोग इस बार बन रहा है जिसका लाभ उठाया जा सकता है।

पुष्य नक्षत्र के संयोग में सोना, चांदी, बर्तन, वाहन, भूमि और मकान आदि खरीदे जाते हैं। वहीं ज्योतिष के कुछ ऐसे उपाय भी हैं जिन्हें इस दिन करने से कई तरह की परेशानियां दूर हो सकती है।

पुष्य नक्षत्र में खरीदारी से मां लक्ष्मी होती है प्रसन्न
पुष्य नक्षत्र में खरीदारी से मां लक्ष्मी होती है प्रसन्न

आइये यहां जानते हैं इन उपायों के बारे में ...

- जिस दिन पुष्य नक्षत्र होता है कहते हैं उस दिन कुंडली में विद्यमान दूषित सूर्य के दुष्प्रभाव को घटाया जा सकता है। इसके लिए सूर्य को अर्घ्य दें और सूर्य से संबंधित वस्तुओं का दान करें।

- इस दिन रोटी पर घी चुपड़कर उसके साथ गुड़ मिलाकर गाय को खिलाने से धन लाभ प्राप्त होता है।

- इस दिन उपवास रखने से काम की गुणवत्ता और असर में भी सुधार होता है और जीवन के हर एक क्षेत्र में सफलता की प्राप्ति होती है।

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पुष्य नक्षत्र में क्यों की जाती है खरीदारी, जानें कब बन रहा है इसका संयोग व महत्व

- पुष्य नक्षत्र का स्वामी शनि, देवता बृहस्पति और कर्क राशि में इसका भ्रमण होने के कारण इस पर चंद्रमा का प्रभाव भी रहता है। अत: इस दिन शनि, बृहस्पति और चंद्रदेव की पूजा करने से जीवन के हर एक क्षेत्र में सफलता की प्राप्ति होती है।

चाहें तो इस दिन पीपल, शमी और आंकड़े के पेड़ या दूध वाले पेड़ की पूजा कर सकते हैं।

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- लक्ष्मी माता के समक्ष घी का दीपक जलाकर उन्हें कमल पुष्प अर्पित करके इस दिन श्रीसूक्त का पाठ करने से माता लक्ष्मी बहुत ही जल्द प्रसन्न होती है।

इस शुभदायी दिन पर माता लक्ष्मी की पूजा और साधना करने से उसका विशेष फल प्राप्त होता है। सर्वप्रथम अपने घर में सूर्योदय एवं सूर्यास्त के समय मां लक्ष्मी के सामने घी से दीपक जलाएं। किसी नए मंत्र की जाप की शुरुआत करें। फिर पूजा आदि करने के बाद श्रीसूक्त का पाठ करें और बाद में फिर पूजा करें।

- इस नक्षत्र में दिव्य औषधियों को लाकर उनकी सिद्धि की जाती है। जैसे इस दिन हत्था जोड़ी लाकर उसकी विशेष पूजा की जाती और उसे चांदी की डिबिया में सिंदूर लगाकर तिजोरी में रखा जाता है जिससे लक्ष्मी का स्थाई निवास होता है। यह प्रयोग शंखपुष्‍पी की जड़ के साथ भी किया जा सकता है। दोनों ही प्रयोग किसी ज्योतिष से पूछकर ही करें तो अच्छा होगा।