दिवाली का त्योहार अब बस आने को है। कार्तिक अमावस्या को दीपों का त्योहार दिवाली मनाया जाता है। दिवाली की तैयारियां कई दिन पहले से शुरू हो जाती है। दिवाली की रात को मां लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है।

माना जाता है कि लक्ष्मी पूजा से भक्तजन के सारे कष्ट दूर करके मां लक्ष्मी धन-धान्य से भंडार भर देती है।वहीं इस बार दिवाली कई विशेष योग के साथ मनेगी। जी हां, इस बार तिथियों की अनूठी स्थिति का असर दिवाली के पर्व के दौरान नजर आएगा।

ज्योतिषियों के अनुसार इस बार तिथियों की विचित्र स्थिति के साथ कई विशेष संयोग भी बनेंगे जो पर्व की महत्ता को कई गुना बढ़ा देंगे।

सुबह होगी रूप चौदस और शाम को होगी अमावस्या

27 अक्टूबर रविवार की सुबह चतुर्दशी तिथि रहेगी और शाम को अमावस्या रहेगी। इस वजह से रविवार को ही लक्ष्मी पूजन किया जाएगा।

धन की देवी लक्ष्मी का होता है विशेष पूजन 
धन की देवी लक्ष्मी का होता है विशेष पूजन 

ज्योतिषियों के अनुसार देवी लक्ष्मी की पूजा के लिए रात का समय ही श्रेष्ठ रहता है। इस वजह से अधिकतर लोग देर रात लक्ष्मी पूजन करते हैं। इस संबंध में मान्यता है कि जो लोग दिवाली की रात जागकर लक्ष्मी पूजा करते हैं, उनके घर में देवी लक्ष्मी का आगमन होता है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

27 अक्टूबर को सुबह उदयाकाल में चतुर्दशी होने से रूप चतुर्दशी पर अभ्यंग स्‍नान से सौंदर्य निखारा जाएगा जबकि शाम को प्रदोषकाल में कार्तिक अमावस्या होने से महालक्ष्मी पूजन भी इसी दिन होगा।

तो इस बार 27 अक्टूबर को ही दिवाली मनेगी और रात को मां लक्ष्मी की पूजा की जाएगी।

इसके साथ ही दीपावली के अगले दिन 28 अक्टूबर सुबह अमावस्या तिथि होने से सोमवती अमावस्या का संयोग भी बनेगा।

लक्ष्मी पूजा का महत्व 
लक्ष्मी पूजा का महत्व 

जो लोग अमावस्या तिथि पर पितरों के लिए श्राद्ध करना चाहते हैं, उन्हें सोमवार, 28 अक्टूबर की सुबह श्राद्ध कर्म करना चाहिए। श्राद्ध कर्म के लिए सुबह का समय श्रेष्ठ रहता है और 28 अक्टूबर की सुबह अमावस्या तिथि रहेगी। वहीं इस बार पर्व के दौरान हर दिन कुछ विशेष मंगलकारी संयोग बनेंगे।

इस वर्ष धन की देवी महालक्ष्मी के पूजन का पांच दिनी पर्व की शुरुआत 25 अक्टूबर को धनतेरस के साथ होगी।

दिवाली पर विशेष योग का विचित्र संयोग

धनतेरस के दिन ब्रह्म और ऐंद्र योग रहेगा। इसी तरह 26 को हस्त नक्षत्र और महालक्ष्मी पूजन के दिन 27 को चित्रा नक्षत्र रहेगा।

इस बार कार्तिक शुक्ल की प्रतिपदा तिथि किसी भी दिन सूर्योदय को स्पर्श नहीं करने के कारण इस तिथि का क्षय हो रहा है। भाई दूज पर 29 अक्टूबर को सौभाग्य और आयुष्मान जैसे मंगलकारी योग रहेंगे।

धनतेरस का महत्व 
धनतेरस का महत्व 

धनतरेस पर रहेगा मंगलकारी ब्रह्मयोग

पांच दिनी पर्व धनतेरस की शुरुआत 25 अक्टूबर को शुक्रवार को होगी। इस दिन भगवान धनवंतरी के साथ लक्ष्मी-कुबेर का पूजन भी होगा।

इस दिन त्रयोदशी तिथि शाम 7.08 मिनट पर लगेगी जो अगले दिन 26 को दोपहर 3.46 बजे तक रहेगी। प्रदोषकाल में त्रयोदशी तिथि 25 अक्टूबर को होने से इस दिन धनतेरस मनाना शास्त्र सम्मत है। इस दिन सुबह 9.51 बजे तक ब्रह्मयोग और फिर ऐंद्र योग लगेगा।

शुभ संयोग में मनेगी दिवाली 
शुभ संयोग में मनेगी दिवाली 

रूप चौदस का दीपदान और अभ्यंग स्नान रहेगा अलग-अलग दिन

इस बार रूप चतुर्दशी का अभ्यंग स्‍नान और दीपदान अलग-अलग दिन होगा। चतुर्दशी 26 को दोपहर 3.47 बजे लगेगी जो अगले दिन 27 को दोपहर 12.47 बजे तक रहेगी।

26 अक्टूबर को रात 8.27 बजे से हस्त नक्षत्र लगेगा जो अगले दिन शाम 5.48 बजे तक रहेगा।

रूप चतुर्दशी के अभ्यंग स्नान का महत्व सूर्योदय से पहले है। इसलिए यह लक्ष्मी पूजन वाले दिन 27 को सुबह होगा जबकि दीपदान प्रदोषवेला में किया जाता है इसलिए दीपदान 26 को ही किया जाएगा।

मंगलकारी चित्रा नक्षत्र में होगा महालक्ष्मी पूजन

महालक्ष्मी पूजन 27 अक्टूबर को होगा। इस दिन अमावस्या तिथि दोपहर 12.23 से 28 को सुबह 9.08 बजे तक रहेगी। इसके इस दिन शाम को 5.48 बजे तक हस्त नक्षत्र और इसके बाद चित्रा नक्षत्र लगेगा।

इस बार महालक्ष्मी का पूजन हस्त और चित्रा नक्षत्र के मंगलकारी संयोग में बनेगा। इस अवसर पर लोग दीपदान करेंगे। हालांकि उदयाकाल चतुर्दशी होने से तिल-तेल के उबटन से स्‍नान के साथ भगवान कृष्ण का पूजन भी किया जाएगा।

दिवाली पर दीपदान का महत्व 
दिवाली पर दीपदान का महत्व 

28 अक्टूबर को बनेगा सोमवती अमावस्या का संयोग

गिरिराज और गो-धन के पूजन का पर्व इस वर्ष 28 अक्टूबर को मत-मतांतर के साथ सोमवार को किया जाएगा। इसके पीछे कारण कार्तिक शुक्ल की प्रतिपदा तिथि का क्षय होना है।

प्रतिपदा तिथि किसी भी दिन सूर्योदय को स्पर्श नहीं कर रही है। अमावस्या तिथि इस दिन सुबह 9.08 बजे तक रहेगी। इसके बाद सुबह 9.09 बजे से 29 को सुबह 6.12 बजे तक रहेगी। इस दिन उदयाकाल में कार्तिक अमावस्या होने से सोमवती अमावस्या का संयोग रहेगा।

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भाईदूज पर होगा आयुष्मान योग

वहीं यह भी कहा जा रहा है कि इस बार भाईदूज 29 अक्टूबर मंगलवार को मनाई जाएगी। इस दिन द्वितीया तिथि सुबह 6.13 से 30 अक्टूबर को तड़के 3.47 बजे तक रहेगी।

इस दिन बहनों को सौभाग्य प्रदान के लिए सौभाग्य और भाई को लंबी उम्र देने वाला आयुष्मान योग भी रहेगा। आयुष्मान योग दोपहर 3.02 बजे तक और इसके बाद सौभाग्य योग लगेगा।