हम अक्सर सुनते हैं कि पुष्य नक्षत्र में खरीदारी करना शुभ होता है, रवि पुष्य और गुरु पुष्य में अक्सर लोग खरीदारी करते हैं। वहीं दूसरी ओर दिवाली से पहले भी पुष्य नक्षत्र में खरीदारी की जाती है।

आखिर पुष्य नक्षत्र है क्या और क्यों इसमें खरीदारी करने को शुभ माना जाता है। विवाह को छोड़कर कई महत्वपूर्ण कामों की शुरुआत भी पुष्य नक्षत्र में की जाती है।

इसके साथ ही खरीदारी, निवेश और बड़े व्यापारिक लेन-देन इस नक्षत्र में करना शुभ माना जाता है। वहीं शरद ऋतु यानी कार्तिक माह में आने वाले पुष्य नक्षत्र को शुभ और कल्याणकारी माना गया है।

तो ये है पुष्य नक्षत्र का महत्व

पाणिनी संहिता में लिखा है -

पुष्य सिद्धौ नक्षत्रे सिध्यन्ति अस्मिन् सर्वाणि कार्याणि सिध्यः।

पुष्यन्ति अस्मिन् सर्वाणि कार्याणि इति पुष्य।।

अर्थात पुष्य नक्षत्र में शुरू किए गए सभी कार्य पुष्टि दायक, सर्वार्थसिद्ध होते ही हैं, निश्चय ही फलीभूत होते हैं।

पुष्य नक्षत्र पर खरीदारी होती है शुभ 
पुष्य नक्षत्र पर खरीदारी होती है शुभ 

ज्योतिष में पुष्य नक्षत्र का महत्व

सत्ताइस नक्षत्रों में पुष्य आठवां नक्षत्र है। इस नक्षत्र के उदय होने पर ज्योतिषी शुभ कार्य करने की सलाह देते हैं। सभी नक्षत्रों में इसे सबसे अच्छा माना जाता है।

पुष्य नक्षत्र के दौरान चंद्रमा कर्क राशि में स्थित होता है। बारह राशियों में एकमात्र कर्क राशि का स्वामी चंद्रमा है। इसके अलावा चंद्रमा अन्य किसी राशि का स्वामी नहीं है।

चंद्रमा धन का देवता है। इसलिए पुष्य नक्षत्र को धन के लिए अत्यन्त पवित्र माना जाता है। इसलिए सोना, चांदी और नए सामानों की खरीदारी के लिए पुष्य नक्षत्र को सबसे पवित्र माना जाता है।

पोषण करने और ऊर्जा देने वाला पवित्र नक्षत्र है पुष्य

पुष्य शब्द का अर्थ है पोषण करना या पोषण करने वाला। पुष्य ऊर्जा-शक्ति प्रदान करने वाला नक्षत्र है। इस शब्द के ही अनुसार ये नक्षत्र सौभाग्य, समृद्धि और सुख के साथ पोषण करने वाला माना गया है।

कुछ वैदिक ज्योतिषियों द्वारा पुष्य को तिष्य नक्षत्र भी कहा गया है। तिष्य शब्द का अर्थ है शुभ होना तथा यह अर्थ भी पुष्य नक्षत्र को शुभता ही प्रदान करता है।

मतान्तर से पुष्य शब्द को पुष्प का बिगड़ा रूप मानते हैं। इस शब्द के कारण भी ये नक्षत्र सुंदरता और पवित्रता लिए हुए है।

पुष्य नक्षत्र में कौन से काम करना शुभ होता है

- पुष्य नक्षत्र खरीदारी के लिए उत्तम माना गया है। इस दौरान वाहन, जमीन या घर खरीदना बेहद लाभकारी माना जाता है। - पुष्य नक्षत्र में किए गए काम दोषमुक्त होते हैं और जल्दी ही सफल हो जाते हैं।

- पुष्य नक्षत्र रविवार या गुरुवार को पड़े तो यह बेहद शुभदायक माना जाता है। इस शुभ संयोग को रवि पुष्य और गुरु पुष्य कहा जाता है।

- पुष्य एक अन्ध नक्षत्र है। पुष्य-नक्षत्र में खोई हुई वस्तु शीघ्र प्राप्त हो जाती है। पुष्य नक्षत्र को शुभ तो माना ही जाता है लेकिन इसको थोड़ा अशुभ भी माना जाता है।

- जब पुष्य नक्षत्र शुक्रवार के दिन आता है तब यहृ उत्पात व बाधाकारक होता है।

- विवाह में भी पुष्य नक्षत्र को अशुभ माना गया है। विवाह लग्न के लिए पुष्य नक्षत्र अशुभ माना जाता है।

- यदि कोई पुष्य नक्षत्र के योग में स्वर्ण आभूषण खरीदता है तो उसे इन चीजों से स्थाई लाभ प्राप्त होता है। इनसे प्राप्त धन बरकत देता है।

- पुष्य नक्षत्र में यदि आप किसी कंपनी के शेयर में निवेश करना चाहते हैं तो यह भी फायदेमंद हो सकता है।

- यदि पुष्य नक्षत्र में वाहन खरीदते हैं तो उस वाहन से दुर्घटना की संभावनाएं कम रहती हैं। साथ ही, वाहन से दुर्घटना के योग टल भी सकते हैं।

- इस दिन बही-खाते खरीदने की परंपरा है। ऐसा माना जाता है कि पुष्य नक्षत्र में बही-खाते खरीदने पर व्यापार में मुनाफा अधिक होता है और लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।

दिवाली से पहले कब है पुष्य नक्षत्र

21 से 27 अक्टूबर के बीच 7 दिनों में खरीदी के कई विशेष मुहूर्त और शुभ योग आ रहे हैं, जिन्हें ज्योतिष की दृष्टि से शुभफल देने वाला माना गया है।

21 अक्टूबर को आहोई अष्टमी है। जिस दिन सोम पुष्य नक्षत्र के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है।

22 अक्टूबर को पुष्य नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग है। पु्ष्य नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग दोनों ही बहुत शुभ मुहूर्त है। इसमें नई खरीदारी और नया काम अक्षय फल देता है।

पुष्य नक्षत्र का पावन मुहूर्त

पुष्य नक्षत्र 21 अक्टूबर की शाम 5.30 से लेकर 22 अक्टूबर की शाम 4.40 तक रहेगा।

इस नक्षत्र में गाड़ी, मकान, दुकान, सोना, बर्तन की खरीदारी शुभ रहेगी। बता दें कि ज्योतिष शास्त्र में 27 नक्षत्र होते हैं और उनमें आठवां नक्षत्र पुष्य होता है।

पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रों का राजा माना गया है और इस नक्षत्र के स्वामी शनि हैं जबकि देवता स्वयं बृहस्पति हैं जिसका कारक सोना है।

इस बार यह नक्षत्र 21 अक्टूबर सोमवार की शाम को प्रारंभ होगा और 22 अक्टूबर मंगलवार की शाम तक बना रहेगा। इस तरह कहा जा सकता है कि दो पुष्य नक्षत्र होंगे एक सोम पुष्य और भौम पुष्य।

यही नहीं जानकारों की मानें तो इस दिन सिद्धा और साध्य योग भी होगा जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाएगा। दिवाली से पहले पड़ रहे पुष्य नक्षत्र के प्रथम भाग सोम पुष्य में सोने और चांदी की खरीदारी करना आपके लिए विशेष लाभकारी हो सकता है।

इसके अलावा आप इस दिन निवेश भी कर सकते हैं। सोने चांदी के अलावा इस दिन पुस्तक, बहीखाते व धार्मिक वस्तुएं खरीदना भी शुभ माना गया है।

25 और 26 अक्टूबर को है धनतेरस और सर्वार्थ सिद्धि योग

कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस है। धनतेरस पर नई खरीदारी करने की परंपरा होती है। इस दिन जो भी नई चीज खरीदी जाती है उसमें 13 गुना तक की वृद्धि होती है।

25 अक्टूबर शुक्रवार को त्रयोदशी सुबह 7.08 बजे शुरू होगी और 26 अक्टूबर शनिवार को दोपहर 3.47 बजे तक रहेगी।

धनतेरस पर सर्वार्थ सिद्धि योग भी है इसीलिए इस दिन खरीदी और पूजन का महत्व बढ़ गया है।

तारीख शुभ योग खरीदारी

20 अक्टूबर रवि योग सजावटी सामान

21 अक्टूबर पुष्य-सर्वार्थ सिद्धि चांदी, बर्तन की खरीदी

22 अक्टूबर पुष्य, सर्वार्थ सिद्धि जमीन, मकान की खरीदी

25 अक्टूबर धनतेरस,सर्वार्थ सिद्धि सोने चांदी के बर्तन और सिक्के, सभी तरह के सामान

27 अक्टूबर दीपावली सोना-चांदी, सिक्के, लक्ष्मी प्रतिमा