भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र कार्तिकेय को स्कंद कहा गया है। हर वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को स्कन्द षष्ठी मनाई जाती है, जो इस वर्ष 19 अक्टूबर दिन शनिवार को है।

कुछ लोग आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को स्कंद षष्ठी मानते हैं और 'तिथितत्त्व' में चैत्र शुक्ल पक्ष की षष्ठी को 'स्कंद षष्ठी' कहा है, लेकिन कार्तिक कृष्ण पक्ष की षष्ठी को भी 'स्कंद षष्ठी व्रत' के नाम से जाना जाता है।

यह व्रत 'संतान षष्ठी' नाम से भी जाना जाता है। स्कंदपुराण के नारद-नारायण संवाद में इस व्रत की महिमा का वर्णन मिलता है।

इस व्रत को रखने से संतान की सभी तरह की पीड़ा का शमन हो जाता है। एक दिन पूर्व व्रत रख कर षष्ठी को कार्तिकेय की पूजा की जाती है।

दक्षिण भारत में इस व्रत का ज्यादा प्रचलन है। खासकर तमिलनाडु में यह व्रत प्रत्येक मास की कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को किया जाता है।

भगवान कार्तिकेय 
भगवान कार्तिकेय 

वर्ष के किसी भी मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी को यह व्रत आरंभ किया जा सकता है। खासकर चैत्र, आश्विन और कार्तिक मास की षष्ठी को इस व्रत को आरंभ करने का प्रचलन अधिक है।

स्कंद षष्ठी के अवसर पर शिव-पार्वती की पूजा के साथ ही स्कंद की पूजा की जाती है। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

दक्षिण भारत में कार्तिकेय को कुमार, स्कंद और मुरुगन के नाम से भी जाना जाता है। स्कंद षष्ठी की कथा के अनुसार स्कंद षष्ठी के व्रत से च्यवन ऋषि को आंखों की ज्योति प्राप्त हुई थी।

स्कंद षष्ठी की कृपा से प्रियव्रत का मृत शिशु जीवित हो गया था। इस तरह इसके व्रत के महत्व के कई उदाहरण पुराणों में मिलते हैं।

ये है स्कंदषष्ठी व्रत का महत्व

इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती के बड़े पुत्र और गणेश जी के बड़े भाई कार्तिकेय की पूजा की जाती है। स्कन्द षष्ठी व्रत करने से नि:संतानों को संतान की प्राप्ति होती है, सफलता, सुख-समृद्धि प्राप्त होता है।

हर दु:ख का निवारण हो जाता है, दरिद्रता मिट जाती है। इस व्रत को करने से क्रोध, लोभ, अहंकार, काम जैसी बुराइयां भी खत्म हो जाती हैं।

स्कन्द षष्ठी के दिन कुमार कार्तिकेय की विधि विधान से पूजा करने पर विजय की प्राप्ति होती है। लोगों के बिगड़े कार्य बनते हैं। यदि पूजा के समय दही और सिंदूर मिलाकर उनको
अर्पित करें तो आपके काम में आने वाली अड़चनें दूर होती हैं।स्कन्द की पूजा करने से बच्चों को रोग या कोई कष्ट नहीं रहता है।

भगवान गणेश और कार्तिकेय
भगवान गणेश और कार्तिकेय

ऐसे करें भगवान स्कंद की पूजा

- स्कन्द षष्ठी के दिन स्नानादि से निवृत्त होने के बाद भगवान कार्तिकेय, भगवान शिव और माता गौरी की प्रतिमा या तस्वीर पूजा स्थल पर स्थापित करें।

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- फिर उनको अक्षत्, हल्दी, चंदन, दूध, जल, मौसमी फल, मेवा, कलावा, दीपक, गाय का घी, इत्र, पुष्प आदि अर्पित करें।

- पूजा के दौरान एक अखंड दीपक जलाएं। इसके पश्चात स्कंद षष्ठी महात्म्य का पाठ करें और अंत में आरती के बाद प्रसाद वितरण करें।

- विधि प्रकार से स्कन्द कुमार की पूजा करने से सुयोग्य संतान प्राप्त होती है।