कार्तिक महीने की चतुर्थी को करवा चौथ का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन सुहागिन स्त्रियां अपने पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखती हैं।

तो यहां सबसे पहले यह जानना चाहिए कि करवा चौथ होती क्या है, साथ ही यह भी कि चौथ का मतलब तो चतुर्थी होती है वहीं करवा का क्या मतलब होता है।

तो ये होता है करवा

सबसे पहले तो आप ये जान लें कि करवा एक मिट्टी का बर्तन होता है। काली मिट्टी में शक्कर की चासनी मिलाकर उस मिट्टी से तैयार किए गए मिट्टी की वस्तु को करवा कहते हैं।

कुछ लोग तांबे के बने करवे लाते हैं। इस तरह दो करवे बनाए जाते हैं। करवा में रक्षासूत्र बांधकर, हल्दी और आटे के सम्मिश्रण से एक स्वस्तिक बनाते हैं।

एक करवे में जल तथा दूसरे करवे में दूध भरते हैं और इसमें ताम्बे या चांदी का सिक्का डालते हैं। जब बहू व्रत शुरू करती है तो सास उसे करवा देती है, उसी तरह बहू भी सास को करवा देती है।

पूजा करते समय और कथा सुनते समय दो करवे रखने होते हैं- एक वो जिससे महिलाएं अर्घ्य देती हैं यानी जिसे उनकी सास ने दिया होता है और दूसरा वो जिसमें पानी भरकर बायना देते समय उनकी सास को देती हैं।

करवा और सरगी का महत्व 
करवा और सरगी का महत्व 

सास उस पानी को किसी पौधे में डाल देती हैं और अपने पानी वाले लोटे से चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं। मिट्टी का करवा महिलाएं इसलिए लेती हैं, क्योंकि उसे डिस्पोज किया जा सकता है।

मिट्टी का करवा न हो तो कुछ महिलाएं स्टील के लोटे का प्रयोग भी कर लेती हैं।

करवा से जुड़ी कथा

करवा चौथ पर करवा से जुड़ी यह कथा भी सुनी जाती है। इस कथा के अनुसार करवा नाम की एक पतिव्रता स्त्री के नाम पर ही करवा चौथ का नाम करवा चौथ पड़ा है।

कहते हैं कि करवा नाम की पतिव्रता स्त्री अपने पति के साथ नदी के किनारे के गांव में रहती थी। एक दिन उसका पति नदी में स्नान कर रहा था तभी एक मगर ने उसका पैर पकड़ लिया।

वह मनुष्य करवा-करवा कह के अपनी पत्नी को पुकारने लगा। उसकी आवाज सुनकर उसकी पत्नी करवा भागी हुई आई और आकर उसदे मगरम्छ को कच्चे धागे से बांध दिया।

मगर को बांधकर वो यमराज के यहां पहुची गई और यमराज से कहने लगी- हे भगवन! मगरमच्छ ने मेरे पति का पैर पकड़ लिया है। उस मगर को पैर पकड़ने के अपराध में आप नरक में ले जाओ।

व्रत से पहले सुबह सवेरे व्रती महिलाएं करती हैं सरगी 
व्रत से पहले सुबह सवेरे व्रती महिलाएं करती हैं सरगी 

यमराज बोले, 'लेकिन अभी मगर की आयु शेष है, अतः मैं उसे नहीं मार सकता। इस पर करवा बोली, 'अगर आप ऐसा नहीं करोगे तो मैं आपको श्राप देकर नष्ट कर दूंगी।'

सुनकर यमराज डर गए और उन्होंने मगरमच्‍छ को यमपुरी भेज दिया और करवा के पति को दीर्घायु रहने का आशीर्वाद दे दी। तभी से उस महिला को करवा माता कहने लगे।

कहते हैं कि इस पतिव्रता महिला के नाम पर ही यह करवा चौथ त्योहार का नाम पड़ा। जैसे करवा ने अपने पति को मौत के मुंह से निकाल लिया ठीक उसी तरह सुहागिन महिलाएं व्रत रखकर पति की लंबी आयु की कामना करती है।

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जानें क्या होती है सरगी

करवा चौथ के दिन सरगी की यह रस्म अक्सर पंजाब प्रांत में मनाई जाती है। कोई भी महिला जब करवा चौथ का व्रत रखती है तो उसकी सास उसे सरगी बनाकर देती है।

सरगी एक भोजन की थाली है जिसमें खाने की कुछ चीजें होती हैं। जिसको खाने के बाद दिनभर निर्जला उपवास रखा जाता है और फिर रात में चांद की पूजा करने के बाद ही व्रत खोलने के बाद खाया जाता है।

बहू को सास देती है सरगी 
बहू को सास देती है सरगी 

चूंकि सरगी को खाकर व्रत की शुरुआत की जाती है इसलिए सरगी की थाली में ऐसी चीजें होती है जिसे खाने से भूख और प्यास कम लगती है और दिनभर एनर्जी बनी रहती। इसमें अक्सर सूखे मेवे और फल होते हैं।

सास द्वारा दी हुई सरगी से बहू अपने व्रत की शुरुआत करती है। अगर सास साथ में नहीं हैं तो वो बहू को पैसे भिजवा सकती हैं, ताकि वो अपने लिए सारा सामान खरीद सके।

इस सरगी में कपड़े, सुहाग की चीजें, फेनिया, फ्रूट, ड्राईफ्रूट, नारियल आदि रखे होते हैं। हालांकि उत्तर प्रदेश और बिहार में इस त्योहार को मनाने का तरीका अलग है।

किसके हाथों ली जाती है सरगी

सरगी लेने का रिवाज सास के हाथों है लेकिन अगर घर में सास नहीं हैं तो फिर बड़ी ननद या जेठानी के हाथों इसे लेना चाहिए। सरगी लेने का सही समय भोर में तीन से चार बजे के बीच होता है।

क्या होना चाहिए सरगी में

सरगी को खाकर ही करवा चौथ के व्रत की शुरुआत होती है तो सरगी की थाली में ऐसी चीजें होनी चाहिए जिससे भूख और प्यास कम लगे और दिनभर एनर्जी बनी रहे।

सरगी में खाने की चीजों के अलावा होता है श्रृंगार का सामान 
सरगी में खाने की चीजों के अलावा होता है श्रृंगार का सामान 

दूध और फेनिया - सरगी का एक जरूरी हिस्सा है दूध और फेनिया। यह रीति-रिवाज के लिहाज से ही नहीं सेहत के लिहाज से भी बहुत अहम है। फेनिया गेहूं के आटे से तैयार होती है और इसे दूध में बनाया जाता है। यह प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट का अच्छा मेल है। इसे खाने से आप दिन भर एनर्जी से भरपूर रह सकती हैं

सरगी में फल जरूर खाएं- फलों में काफी मात्रा में फाइबर और पानी होता है जो निर्जला व्रत के दौरान आपको हाइड्रेट रखने में मदद करता है। तो सरगी में फलों को खास जगह दें। ऐसे फल लें जो पचने में समय लगाएं और फाइबर से भरपूर हों।

तला-भुना न खाएं- अगर आप ज्यादा तला-भुना, मीठा या बिना नमक का खाना ले रहे हैं तो यह आपको ब्लडप्रेशर से जुड़ी समस्या दे सकता है। ठीक इसके उलट अगर आप सिर्फ फ्रूट्स खाते हैं और पानी कम पीते हैं तो कब्ज या शारीरिक कमजोरी महसूस हो सकती है।

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फल और मेवे- यह तो हम सभी जानते हैं कि करवा चौथ के दिन महिलाएं पूरा दिन निर्जल रहती हैं। ऐसे में शरीर में पानी की कमी हो सकती है तो यह जरूरी हो जाता है कि आप सरगी में ही ऐसे फल लें जो पूरा दिन शरीर को हाइड्रेट रखें।

अगर आप इस दौरान कुछ ड्राई फ्रूट्स भी ले लेती हैं तो यह पूरा दिन आपकी मदद करेंगे। मुट्ठी भर ड्राईफ्रूट्स खाने से शरीर को भरपूर विटामिन और मिनरल्स मिलेंगे।

नारियल पानी - व्रत में आपको पूरे दिन बिना पानी के रहना है इसलिए यह जरूरी हो जाता है कि आप सरगी के समय नारियल गिरी और नारियल पानी लें। यह तासीर में ठंड़ा होता है और शरीर को पूरा दिन हाइड्रेट रख सकता है।