कोजागरी पूर्णिमा पर यूं करेंगे मां लक्ष्मी की पूजा तो धन-धान्य से भर जाएंगे भंडार  

कोजागरी पूर्णिमा पर होता है मां लक्ष्मी का जन्मदिन  - Sakshi Samachar

आश्विन माह की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा का त्योहार मनाया जाता है। इसी पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। शास्त्रों की मान्यतानुसार इसी दिन मां लक्ष्मी का समुद्र मंथन से जन्म हुआ था।

कोजागरी पूर्णिमा को माता लक्ष्मी के जन्मदिन के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन पूरे विधि-विधान से माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है।माना जाता है कि इस दिन रात में मां लक्ष्मी पृथ्वी लोक का विचरण करती है और जो भक्त जागकर मां का ध्यान कर रहा होता है उसे धन-वैभव का वरदान भी देती है।

कहते हैं कि कोजागरी पूर्णिमा के व्रत से दरिद्रता दूर होती है और घर में सुख-संपदा की बढ़ोतरी होती है। पूरे विधि-विधान से मां लक्ष्मी की पूजा करके भक्तजन मां की कृपा के पात्र बनते हैं।

इस बार कोजागरी पूर्णिमा 13 अक्टूबर रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन भक्तजन माता लक्ष्मी के लिए व्रत रखकर, पूजा करके, मां को खीर का भोग लगाकर अपनी आर्थिक परेशानियों से मुक्ति पा सकते हैं।

पूरे विधि-विधान से की जाती है मां लक्ष्मी की पूजा 

कोजागरी पूर्णिमा शुभ मुहूर्त

कोजागर पूर्णिमा तिथि: रविवार, 13 अक्‍टूबर 2019

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 13 अक्‍टूबर 2019 की रात 12 बजकर 36 मिनट से

पूर्णिमा तिथि समाप्‍त: 14 अक्‍टूबर की रात 02 बजकर 38 मिनट तक

चंद्रोदय का समय: 13 अक्‍टूबर 2019 की शाम 05 बजकर 26 मिनट

ये है कोजागरी पूर्णिमा का महत्‍व

हिन्‍दू धर्म में कोजागरी पूर्णिमा का विशेष महत्‍व है। मान्‍यता है कि इस दिन धन की देवी लक्ष्‍मी रात के समय विचरण करते हुए कहती हैं- 'को जाग्रति'।

संस्‍कृत में 'को जाग्रति' का मतलब है कि 'कौन जगा हुआ है?' कहा जाता है कि जो भी व्‍यक्ति शरद पूर्णिमा के दिन रात में जगा होता है मां लक्ष्‍मी उन्‍हें उपहार देती हैं।

माना जाता है कि शरद पूर्णिमा के दिन ही मां लक्ष्‍मी का जन्‍म हुआ था। इस वजह से देश के कई हिस्‍सों में इस दिन मां लक्ष्‍मी की पूजा की जाती है, जिसे 'कोजागरी लक्ष्‍मी पूजा' के नाम से जाना जाता है।

मान्‍यता है कि कोजागरी पूर्णिमा के दिन व्रत रखने से सभी दुखों का नाश होता है और घर-गृहस्‍थी सुख-संपन्‍न हो जाती है।

मां लक्ष्मी का जन्मदिन है कोजागरी पूर्णिमा 

ऐसे करें कोजागरी पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की पूजा

- कोजागरी पूर्णिमा के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठ जाएं। स्‍नान कर स्‍वच्‍छ वस्‍त्र धारण करें और दिन भर व्रत का संकल्‍प लें।

- फिर घर के मंदिर या पूजा स्‍थान पर पीतल, चांदी, तांबे या सोने से बनी लक्ष्‍मी की प्रतिमा को कपड़े से ढककर पूजा करें।

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- माता की ढकी हुई प्रतिमा के आगे घी का दीपक जलाएं।

- अब हाथ में फूल लेकर मां का आह्वाहन करें।

- मां की प्रतिमा को पंचामृत और फिर शुद्ध जल अर्पित करें।

- फिर मां को पुष्‍प, ऋतुफल और नैवेद्य अर्पित करें उनकी आरती उतारें।

कोजागरी पूर्णिमा पर प्रकट हुई थी मां लक्ष्मी 

- शाम के समय दूध से बनी खीर तैयार करें।

- इसके बाद रात्रि के समय चंद्रोदय होने पर घर में घी के 11 दीपक जलाएं।

- अब आकाश के नीचे चांद की रोशनी में खीर को रखें।

- इसके बाद माता लक्ष्‍मी की आरती उतारें।

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- रात 12 बजे सबसे पहले मां लक्ष्‍मी को चांद की रोशनी में रखी खीर का भोग लगाएं।

- अब इस खीर को घर के सभी लोगों में प्रसाद स्‍वरूप वितरण करें।

- आप स्‍वयं भी प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पारण करें।

- इस पूर्णिमा के दिन रात्रि जागरण करने का बड़ा महत्व है।

मां लक्ष्मी करती है पृथ्वी लोक का विचरण 

मां लक्ष्‍मी की आरती ...

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता

तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता। ॐ जय लक्ष्मी माता... ॥

उमा रमा ब्रह्माणी, तुम ही जग माता,

सूर्य चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता। ॐ जय लक्ष्मी माता...॥

दुर्गा रूप निरंजनि, सुख सम्पति दाता

जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि सिद्धि धन पाता।ॐ जय लक्ष्मी माता...॥

तुम पाताल निवासिनी, तुम ही शुभ दाता

कर्म प्रभाव प्रकाशिनी, भव निधि की त्राता। ॐ जय लक्ष्मी माता...॥

जिस घर तुम रहती सब सद्‍गुण आता

सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता। ॐ जय लक्ष्मी माता...॥

तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता

खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता। ॐ जय लक्ष्मी माता...॥

शुभ गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि जाता

रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता। ॐ जय लक्ष्मी माता...॥

महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई नर गाता

उर आनंद समाता, पाप उतर जाता। ॐ जय लक्ष्मी माता...॥

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